वित्त वर्ष 2025-26 में नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 5.12% बढ़कर ₹23.4 लाख करोड़, CBDT ने जारी किए आंकड़े
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने 4 मई 2026 को जारी आंकड़ों में बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह (नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन) पिछले वर्ष की तुलना में 5.12 प्रतिशत बढ़कर ₹23,40,406 करोड़ पर पहुँच गया। कॉरपोरेट और नॉन-कॉरपोरेट दोनों श्रेणियों से बेहतर वसूली तथा टैक्स रिफंड में मामूली कमी ने इस वृद्धि को संभव बनाया। नई दिल्ली से जारी यह आँकड़े वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय कर प्रशासन की स्थिरता को रेखांकित करते हैं।
ग्रॉस और नेट कलेक्शन के मुख्य आंकड़े
CBDT के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह (ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन) ₹28,11,936 करोड़ रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 के ₹27,03,107 करोड़ के मुकाबले 4.03 प्रतिशत अधिक है। वहीं, इस अवधि में जारी किए गए टैक्स रिफंड 1.09 प्रतिशत घटकर ₹4,71,531 करोड़ रह गए, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह ₹4,76,732 करोड़ थे। रिफंड में इस कमी के कारण सरकार के पास उपलब्ध शुद्ध राजस्व का अनुपात बढ़ा, जिससे नेट कलेक्शन ग्रोथ को अतिरिक्त बल मिला।
कॉरपोरेट और नॉन-कॉरपोरेट टैक्स का योगदान
कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन उल्लेखनीय रूप से बढ़कर ₹13,81,606 करोड़ हो गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 के ₹12,72,542 करोड़ की तुलना में काफी अधिक है। यह वृद्धि विभिन्न क्षेत्रों में स्थिर कॉरपोरेट मुनाफे की ओर संकेत करती है। दूसरी ओर, नॉन-कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन — जिसमें व्यक्तिगत करदाता, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF), फर्म और अन्य संस्थाएँ शामिल हैं — ₹13,72,474 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष के ₹13,73,905 करोड़ के मुकाबले मामूली रूप से कम है। विश्लेषकों के अनुसार, यह हल्की गिरावट व्यक्तिगत आय में उतार-चढ़ाव या बदलते टैक्स प्लानिंग रुझानों को दर्शा सकती है।
STT कलेक्शन में उल्लेखनीय उछाल
सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) से संग्रह बढ़कर ₹57,522 करोड़ हो गया, जो पूँजी बाज़ार में बढ़ती गतिविधियों का प्रतिबिंब है। गौरतलब है कि STT शेयर, म्यूचुअल फंड और डेरिवेटिव जैसे प्रतिभूति लेनदेन पर लगाया जाता है, और इसमें वृद्धि निवेशकों की सक्रियता को दर्शाती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विश्लेषकों के अनुसार, नेट टैक्स कलेक्शन में यह स्थिर बढ़ोतरी बेहतर टैक्स संग्रह क्षमता और कुशल प्रशासनिक तंत्र को दर्शाती है — खासकर तब, जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताएँ बनी हुई हैं। आयकर विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा,