कलबुर्गी में बिना अनुमति लगी सिद्दारमैया की 9 फुट प्रतिमा हटाई, CM शिवकुमार के दौरे पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कलबुर्गी नगर निगम ने गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की 9 फुट ऊँची प्रतिमा को कलबुर्गी के हाई कोर्ट सर्किल से हटा दिया। यह प्रतिमा रातोंरात बिना किसी अनुमति के स्थापित की गई थी। प्रतिमा हटाने की कार्रवाई भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच संपन्न हुई।
मुख्य घटनाक्रम
अधिकारियों के अनुसार, सिद्दारमैया के समर्थकों के एक समूह ने जिला प्रशासन और नगर निगम से आवश्यक अनुमति लिए बिना यह प्रतिमा स्थापित कर दी। सूत्रों का कहना है कि कुरुबा समाज से जुड़े लगभग आठ से दस लोगों ने इस कार्य में भूमिका निभाई।
उल्लेखनीय है कि यह वही स्थल था जहाँ से मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को अपने कलबुर्गी दौरे के दौरान गुज़रना था और वे गाणगापुर मंदिर भी जाने वाले थे। इससे इस घटनाक्रम को राजनीतिक रंग मिल गया।
पुराना विवाद, नई कोशिश
बताया जा रहा है कि यह पहली बार नहीं हुआ। लगभग तीन साल पहले भी इसी समूह ने इसी स्थान पर सिद्दारमैया की प्रतिमा स्थापित की थी और उस समय भी प्रशासन ने उसे हटा दिया था। यह समूह लंबे समय से हाई कोर्ट सर्किल का नाम सिद्दारमैया के नाम पर रखने की माँग करता रहा है, जिसे प्रशासन ने अभी तक मंजूरी नहीं दी है।
गौरतलब है कि इस बार प्रतिमा स्थापित करने का समय ऐसा था जब मुख्यमंत्री स्वयं शहर में मौजूद थे। कुछ जानकारों का मानना है कि इस कदम के ज़रिए सरकार पर प्रतिमा को नियमित मान्यता देने या सर्किल का नाम बदलने का दबाव बनाने की कोशिश की गई।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रतिमा स्थापना के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी और नियमों का उल्लंघन किया गया था। इसी आधार पर नगर निगम ने प्रतिमा हटाने का निर्णय लिया। कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति से बचने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।
राजनीतिक समीकरण और आगे की स्थिति
यह घटना कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के बीच के राजनीतिक समीकरणों पर नई बहस छेड़ सकती है। दोनों नेताओं के बीच समय-समय पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की चर्चाएँ होती रही हैं। हालाँकि, इस प्रतिमा विवाद पर अभी तक दोनों में से किसी ने भी कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुरुबा समाज की यह माँग आने वाले दिनों में एक नई राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकती है, खासकर तब जब राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर प्रश्न उठते रहे हैं।