बिहार विधानसभा ने नितिन नवीन के इस्तीफे की अधिसूचना जारी की: भावुकता के साथ नई शुरुआत
सारांश
Key Takeaways
- नितिन नवीन का इस्तीफा एक नई राजनीतिक यात्रा की शुरुआत है।
- वे 2006 से बांकीपुर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
- इस्तीफे के पीछे उनकी मां की याद और कार्यकर्ताओं के प्रति आभार है।
- राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद उन्होंने विधानसभा से त्याग पत्र दिया।
- भाजपा में उनके योगदान को नहीं भुलाया जा सकता।
पटना, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार विधानसभा ने बांकीपुर से विधायक नितिन नवीन के विधानसभा से इस्तीफे की अधिसूचना सोमवार को जारी की। नितिन नवीन ने राज्यसभा के सदस्य निर्वाचित होने के बाद विधानसभा से त्याग पत्र दिया था।
विधानसभा द्वारा जारी अधिसूचना में उल्लेख किया गया है, "सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि अष्टादश बिहार विधान सभा के निर्वाचन क्षेत्र संख्या-182, बांकीपुर से निर्वाचित सदस्य नितिन नवीन द्वारा भारत के संविधान के अनुच्छेद 190 (3) (ख) एवं बिहार विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-65 के अंतर्गत 30 मार्च को सदन से अपने स्थान का त्याग करने के अपने अभिप्राय की सूचना दी गई है। जिसे माननीय अध्यक्ष, बिहार विधान सभा द्वारा स्वीकार कर लिया गया है, जिसके फलस्वरूप निर्वाचन क्षेत्र संख्या-182, बांकीपुर, 30 मार्च से रिक्त हो गया है।"
2006 से लगातार बांकीपुर विधान सभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे हैं। अब वे अपनी विधायकी छोड़कर राज्य सभा जा रहे हैं। इस्तीफा देने के बाद नितिन नवीन ने भावुक होते हुए अपनी मां को याद करते हुए सोशल मीडिया पर एक गहरा संदेश साझा किया है।
नितिन नवीन ने बताया कि कैसे उनकी मां ने उनके मंत्री बनने तक का इंतजार किया और जैसे ही उन्होंने सफलता का वह शिखर छुआ, मां उन्हें हमेशा के लिए छोड़कर चली गईं। उन्होंने अपनी मां के साथ एक तस्वीर भी साझा की है। नितिन नवीन ने कहा कि मेरे कार्यकर्ताओं और बिहार की जनता के साथ मेरा जो अटूट संबंध है, वह सदैव बना रहेगा और मुझे नई ऊर्जा, प्रेरणा और मार्गदर्शन देता रहेगा।
भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन राज्यसभा के सदस्य चुने गए हैं। इसी कारण उन्होंने अपने विधायक पद से इस्तीफा दिया है। उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर भावुक पोस्ट करते हुए लिखा, "कार्यकर्ताओं ने मुझे भाई, परिवार के सदस्य और अभिभावक के रूप में अंगुली पकड़कर इस मुकाम तक पहुंचाया है। मैं पटना और बिहार की जनता को आश्वस्त करता हूं कि जो परिवार का भाव उन्होंने मुझे दिया है, उसका मैं सदैव सम्मान करता रहूंगा।"