गुरुग्राम हत्याकांड: शादी की खरीदारी के बाद लापता हुए युवराज सिंह का शव नाले में मिला, पूर्व सहयोगी व उसका पार्टनर गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
गुरुग्राम में 31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा की हत्या कर उनके शव को नाले में फेंक दिया गया। पुलिस के मुताबिक, यह कृत्य युवराज की पूर्व सहयोगी वत्स और उसके पार्टनर ने पैसों के विवाद के चलते किया। युवराज 6 सितंबर 2026 को अपनी बहनों के साथ शादी की खरीदारी करने के बाद एक जरूरी मीटिंग के बहाने गुरुग्राम गया था और फिर कभी घर नहीं लौटा।
घटनाक्रम: उस शाम क्या हुआ
6 सितंबर को युवराज अपनी बहनों के साथ लाजपत नगर मार्केट में शादी की खरीदारी के लिए गया था। दोपहर 4 बजकर 15 मिनट पर परिवार गोल्डन ड्रैगन रेस्टोरेंट में भोजन के लिए रुका। थोड़ी देर बाद युवराज ने बहनों को बताया कि उसे गुरुग्राम में अपनी पूर्व सहयोगी से एक जरूरी मीटिंग के लिए जाना है और वह रेस्टोरेंट से अकेला निकल गया।
उसी शाम 7 बजे युवराज ने परिवार से फोन पर बात की और कहा कि वह रात 10 बजे तक घर लौट आएगा। लेकिन वह वापस नहीं आया। परिवार ने बार-बार संपर्क करने की कोशिश की, परंतु सफलता नहीं मिली।
8 सितंबर को शाम 4 बजकर 16 मिनट पर परिवार को युवराज के नंबर से आखिरी व्हाट्सऐप संदेश मिला, उसके बाद उसका मोबाइल बंद हो गया। परिवार ने 11 सितंबर को लाजपत नगर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस जांच और गिरफ्तारी
जांच में पता चला कि युवराज की फोन पर आखिरी बातचीत उसकी पूर्व सहयोगी वत्स से हुई थी। जांचकर्ताओं ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और दोनों के कार्यस्थलों से जुड़ी जानकारी की पड़ताल की। वत्स का मोबाइल भी बंद मिला, जिसके बाद पुलिस ने उसका नया नंबर ट्रेस किया और उसे उत्तराखंड से गिरफ्तार कर लिया। उसके पार्टनर को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने युवराज की हत्या की और शव को गुरुग्राम में अपने घर के निकट नाले में फेंक दिया। पुलिस को संदेह है कि हत्या के पीछे पैसों का लेन-देन हो सकता है, हालांकि युवराज के परिवार का कहना है कि वत्स ने हत्या की असली वजह अभी तक नहीं बताई है। दोनों आरोपियों को 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
शव की पहचान में देरी और परिवार की शिकायत
परिवार ने गंभीर आरोप लगाया है कि गुरुग्राम पुलिस ने 10 सितंबर को ही युवराज का शव बरामद कर लिया था, लेकिन उन्हें सूचित नहीं किया गया। परिवार का यह भी कहना है कि अज्ञात शवों की जानकारी के लिए बने सरकारी प्लेटफॉर्म ZIPNET (जोनल इंटीग्रेटेड पुलिस नेटवर्क) पर भी तय समय के भीतर शव की जानकारी अपलोड नहीं की गई।
परिवार के अनुसार, 14 सितंबर को अधिकारियों ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया, जबकि मृत्यु की सूचना उन्हें दो दिन बाद दी गई। नियम के अनुसार, यदि तय समय तक पहचान स्थापित करने के प्रयास विफल रहते हैं तो अधिकारी अज्ञात शव का अंतिम संस्कार कर सकते हैं।
युवराज के परिवार ने अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जांच के दस्तावेज, फोटो, डीएनए सैंपल और उनके निजी सामान को सुरक्षित रखने तथा उन्हें सौंपने की मांग की है।
परिवार पर असर
पड़ोसियों ने युवराज को बेहद संस्कारी और अच्छे स्वभाव का बताया। एक पड़ोसी ने कहा, 'हम यहाँ पिछले 30 सालों से रह रहे हैं और परिवार को जानते हैं — वह बहुत अच्छा लड़का था। यकीन नहीं होता कि ऐसा कैसे हो गया।'
युवराज के पिता के एक पुराने मित्र ने बताया, 'मैं उसे 15 सालों से जानता हूँ, उसने मुझे बताया था कि वह शादी करने वाला है।' उनकी शादी अक्टूबर 2026 में होने वाली थी। परिवार की स्थिति और दर्दनाक हो जाती है क्योंकि युवराज घर में अकेला कमाने वाला था — उनके पिता लकवाग्रस्त हैं और माँ को हृदय रोग है।
आगे की जांच
पुलिस दोनों आरोपियों से हत्या की असली वजह, घटनाओं का पूरा क्रम और सटीक परिस्थितियों का पता लगाने में जुटी है। परिवार की शिकायत और ZIPNET पर जानकारी अपलोड न होने के आरोप एक अलग प्रशासनिक जांच की माँग उठाते हैं। यह मामला इस बात को भी उजागर करता है कि अज्ञात शवों की समय पर पहचान और परिजनों को सूचना देने की प्रक्रिया में कितनी खामियाँ हो सकती हैं।