बिहार में वज्रपात का कहर: गया, औरंगाबाद समेत 4 जिलों में 7 की मौत, CM सम्राट चौधरी ने ₹4-4 लाख मुआवजे का ऐलान किया
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के गया, औरंगाबाद, सारण और खगड़िया जिलों में 29 मई 2025 को आकाशीय बिजली गिरने से 7 लोगों की मौत हो गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इन घटनाओं पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रत्येक मृतक के परिजनों को तत्काल ₹4 लाख का अनुग्रह अनुदान देने के निर्देश आपदा प्रबंधन विभाग को दिए हैं।
जिलेवार मृतकों का ब्योरा
राज्य में हुई वज्रपात की इन घटनाओं में सर्वाधिक 3 मौतें गया जिले में दर्ज की गईं। औरंगाबाद में 2, जबकि सारण और खगड़िया में 1-1 व्यक्ति की मौत की पुष्टि अधिकारियों ने की है। इस प्रकार चार जिलों में कुल 7 लोग आकाशीय बिजली की चपेट में आए।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'राज्य में वज्रपात की घटना में औरंगाबाद में 2, गया में 3, सारण में 1 और खगड़िया में 1 व्यक्ति की असामयिक मृत्यु अत्यंत दुःखद है।' उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार इस कठिन घड़ी में पीड़ित परिजनों के साथ खड़ी है।
चौधरी ने आपदा प्रबंधन विभाग को निर्देश दिया कि सभी मृतकों के परिजनों को अविलंब ₹4-4 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान उपलब्ध कराया जाए।
आम जनता से सतर्कता की अपील
मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों से खराब मौसम के दौरान पूरी सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए और खराब मौसम में यथासंभव घरों में रहा जाए।
बिहार में वज्रपात: एक गंभीर समस्या
गौरतलब है कि बिहार उन राज्यों में शामिल है जहाँ प्रतिवर्ष मानसून-पूर्व और मानसून काल में वज्रपात से सर्वाधिक जनहानि होती है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आँकड़ों के अनुसार, भारत में वज्रपात प्राकृतिक आपदाओं में मृत्यु का एक प्रमुख कारण बना हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में प्री-मानसून गतिविधियाँ तेज हो रही हैं और मौसम विभाग ने कई जिलों में आँधी-तूफान की चेतावनी जारी की है।
क्या होगा आगे
आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों को मुआवजा राशि का त्वरित वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वज्रपात से बचाव के लिए विभाग के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें और खुले मैदान, पेड़ों के नीचे या जलाशयों के पास खड़े रहने से बचें।