नीट पेपर लीक: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से माँगा सुधारों का पूरा रोडमैप, अगली सुनवाई 3 अगस्त को
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 24 जुलाई 2026 को नीट पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार से परीक्षा प्रणाली में किए जा रहे सुधारों का विस्तृत रोडमैप तलब किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार अपने हलफनामे में प्रश्नपत्र की छपाई से लेकर परीक्षा केंद्रों तक की पूरी प्रक्रिया, डेटा सुरक्षा व्यवस्था और साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी का ब्यौरा दे। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित की गई है।
सुनवाई में क्या हुआ
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय को आश्वस्त किया कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए सर्वोच्च स्तर पर निगरानी में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'कुछ दिनों बाद मैं पूरी स्थिति और सभी सुधारों का विस्तृत विवरण कोर्ट के सामने रखूंगा।'
मेहता ने यह भी बताया कि राधाकृष्णन समिति की सभी सिफारिशों को लागू किया जा रहा है और सरकार के लिए छात्रों का हित सर्वोपरि है।
कोर्ट ने किन सवालों के जवाब माँगे
सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से तीन प्रमुख बिंदुओं पर स्पष्टीकरण माँगा। पहला — क्या भविष्य में नीट परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित बनाया जा सकता है। दूसरा — परीक्षा से जुड़े डेटा की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था होगी। तीसरा — साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी और उसकी निगरानी किस प्रकार की जाएगी। अदालत ने इन सभी पहलुओं पर हलफनामे में स्पष्ट और विस्तृत जवाब देने को कहा है।
राधाकृष्णन समिति और सुधार प्रक्रिया
गौरतलब है कि नीट पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने राधाकृष्णन समिति का गठन किया था, जिसने परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलावों की सिफारिश की थी। सरकार के अनुसार इन सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया जारी है। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि सरकार कंप्यूटर आधारित परीक्षा, डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी अपने हलफनामे में देगी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी 2024 पेपर लीक मामले ने देशभर में लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए थे और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगे थे। सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिकाओं में परीक्षा की पारदर्शिता और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने की माँग की गई है।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय ने 3 अगस्त को अगली सुनवाई निर्धारित की है, जिसमें सरकार को अपना विस्तृत हलफनामा पेश करना होगा। इस हलफनामे में परीक्षा सुधारों की समयसीमा, तकनीकी उपायों का विवरण और जवाबदेही तंत्र की रूपरेखा शामिल होने की उम्मीद है।