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नीट पेपर लीक: सुप्रीम कोर्ट ने कहा — संस्थागत जवाबदेही तय हो, शिक्षा मंत्रालय को जुलाई तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

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नीट पेपर लीक: सुप्रीम कोर्ट ने कहा — संस्थागत जवाबदेही तय हो, शिक्षा मंत्रालय को जुलाई तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने नीट पेपर लीक मामले में साफ कहा — व्यक्तिगत नहीं, संस्थागत जवाबदेही चाहिए। UPSC की तुलना करते हुए कोर्ट ने NTA को आईना दिखाया और शिक्षा मंत्रालय को जुलाई तक सुधार का रोडमैप पेश करने का निर्देश दिया।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 29 मई 2026 को नीट पेपर लीक मामले में कहा कि संस्थागत जवाबदेही तय होना अनिवार्य है।
शिक्षा मंत्रालय को जुलाई के दूसरे सप्ताह तक परीक्षा सुधार पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश।
पूर्व इसरो अध्यक्ष के.
राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली हाई पावर कमेटी ने अपना जवाब अदालत में दाखिल किया।
NTA ने 3 मई की नीट 2026 परीक्षा रद्द कर CBI जाँच सौंपने को शुचिता के प्रति प्रतिबद्धता बताया।
याचिकाकर्ताओं ने माँग की — सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में नीट परीक्षा कराई जाए।

सर्वोच्च न्यायालय ने 29 मई 2026 को नीट पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब तक वास्तविक जवाबदेही — व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संस्थागत स्तर पर — तय नहीं होगी, तब तक परीक्षा प्रणाली में सुधार संभव नहीं है। अदालत ने शिक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह जुलाई के दूसरे सप्ताह तक एक हलफनामा दाखिल करे, जिसमें भविष्य की परीक्षा प्रक्रिया और परिणाम व्यवस्था में सुधार का स्पष्ट रोडमैप हो।

सुनवाई का मुख्य घटनाक्रम

यह सुनवाई जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ द्वारा की गई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि पूर्व इसरो अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली हाई पावर कमेटी ने अपना जवाब सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल कर दिया है। यह हलफनामा अदालत के 25 मई के उस आदेश के अनुपालन में दाखिल किया गया, जिसमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से कमेटी की सिफारिशों के क्रियान्वयन की स्थिति बताने को कहा गया था।

याचिकाकर्ताओं ने माँग की है कि परीक्षा को नए सिरे से कराने के लिए एक नई हाई पावर कमेटी गठित की जाए और आगामी नीट परीक्षा सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में संपन्न कराई जाए।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

अदालत ने कहा कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) जैसी संस्थाओं में परीक्षा-शुचिता को लेकर ऐसी स्थिति कभी उत्पन्न नहीं होती — इसलिए अन्य परीक्षा संस्थाओं को उससे सीख लेने की आवश्यकता है। न्यायालय का यह संदेश स्पष्ट था: प्रणालीगत विफलता के लिए प्रणालीगत जवाबदेही चाहिए, न कि केवल व्यक्तिगत कार्रवाई।

NTA और सरकार का रुख

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया कि 3 मई को हुई नीट 2026 परीक्षा को रद्द कर री-टेस्ट का निर्णय 'छात्रों के हित में' और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में जनता का भरोसा बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया था। एजेंसी ने यह भी कहा कि मामले को केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंपना परीक्षा की शुचिता के प्रति उसकी गंभीरता को दर्शाता है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार छात्रों के साथ है और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाने के लिए एक नया तंत्र तैयार किया गया है, जिसकी निगरानी उच्च स्तर पर की जा रही है।

विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें

पूर्व इसरो अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने बताया कि समिति ने NTA को संस्थागत रूप से मज़बूत करने की सलाह दी थी और कई सुधार पहले ही लागू किए जा चुके हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि आगामी नीट परीक्षा के आयोजन में समिति के सभी सुझावों को ध्यान में रखा गया है। गौरतलब है कि यह कमेटी नीट 2024 विवाद के बाद गठित की गई थी, जब पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों ने देशभर में छात्रों का आक्रोश भड़का दिया था।

आगे क्या होगा

शिक्षा मंत्रालय को जुलाई के दूसरे सप्ताह तक हलफनामा दाखिल करना है। यह मामला ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों का भविष्य परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर निर्भर है। न्यायालय की निगरानी में सुधार प्रक्रिया का अगला चरण जुलाई की सुनवाई में तय होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये सुधार केवल कागज़ी हैं या व्यवहार में भी लागू होंगे। जुलाई का हलफनामा एक अवसर है, लेकिन बिना स्वतंत्र ऑडिट और सत्यापन-योग्य मानकों के यह भी पिछली आश्वासन-सूची में जुड़ सकता है। लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों का भरोसा वापस जीतने के लिए शब्दों से ज़्यादा, मापने योग्य बदलाव चाहिए।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई को क्या कहा?
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए संस्थागत स्तर पर जवाबदेही तय होना ज़रूरी है, न केवल व्यक्तिगत। अदालत ने UPSC का उदाहरण देते हुए NTA को सुधार का रोडमैप पेश करने को कहा।
शिक्षा मंत्रालय को हलफनामा कब तक दाखिल करना है?
सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षा मंत्रालय को जुलाई के दूसरे सप्ताह तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस हलफनामे में भविष्य की परीक्षा प्रक्रिया और परिणाम व्यवस्था में सुधार का स्पष्ट विवरण होना चाहिए।
नीट 2026 परीक्षा क्यों रद्द की गई थी?
NTA ने 3 मई को हुई नीट 2026 परीक्षा को रद्द कर री-टेस्ट का निर्णय लिया था। एजेंसी ने इसे छात्रों के हित में और परीक्षा प्रणाली में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए ज़रूरी बताया, साथ ही मामले की जाँच CBI को सौंपी।
के. राधाकृष्णन कमेटी ने क्या सिफारिशें दी हैं?
पूर्व इसरो अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली हाई पावर कमेटी ने NTA को संस्थागत रूप से मज़बूत करने की सलाह दी थी। कमेटी के अनुसार कई सुधार पहले ही लागू किए जा चुके हैं और आगामी नीट परीक्षा में सभी सुझावों को ध्यान में रखा गया है।
याचिकाकर्ताओं की मुख्य माँगें क्या हैं?
याचिकाकर्ताओं ने माँग की है कि नीट परीक्षा को नए सिरे से कराने के लिए एक नई हाई पावर कमेटी गठित की जाए। साथ ही माँग है कि परीक्षा सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में संपन्न कराई जाए।
राष्ट्र प्रेस
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