नीट-यूजी पेपर लीक और NTA की जवाबदेही पर संसदीय समिति का कड़ा सवाल-जवाब, 21 जून पुनर्परीक्षा पर भी चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में संसद भवन एनेक्सी परिसर में 1 जून 2026 को शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति की अहम बैठक शुरू हुई, जिसमें नीट-यूजी परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा की विश्वसनीयता और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से गहन पूछताछ की जा रही है। इस बैठक में शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव और NTA के महानिदेशक को सीधे जवाब देने के लिए तलब किया गया है।
बैठक का एजेंडा और दायरा
संसदीय दस्तावेजों के अनुसार, बैठक के पहले सत्र में शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों (2025-26) पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई की समीक्षा की गई। दूसरे सत्र में परीक्षा प्रणाली के विभिन्न पहलुओं — पारदर्शिता, सुरक्षा व्यवस्था, प्रश्नपत्र प्रबंधन और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा — पर विस्तृत सवाल-जवाब किए जा रहे हैं। एजेंडे में कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) बनाम पारंपरिक पेन-एंड-पेपर प्रणाली की तुलनात्मक प्रभावशीलता पर चर्चा भी शामिल है।
नीट-यूजी पेपर लीक: मुख्य विवाद
गौरतलब है कि इस वर्ष नीट-यूजी के प्रश्नपत्र लीक होने की वजह से परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी, जिससे लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया। अब पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है। समिति इस पुनर्परीक्षा के निर्णय की आवश्यकता, परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उपायों और प्रभावित अभ्यर्थियों के हितों की सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी सरकार से जवाब मांग सकती है। NTA और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों से परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर पड़े प्रभाव को लेकर स्पष्टीकरण माँगा जा सकता है।
2 जून: CBSE और ऑन-स्क्रीन मार्किंग पर अगली बैठक
समिति की अगली बैठक 2 जून को होगी, जिसमें स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और CBSE अध्यक्ष उपस्थित रहेंगे। इस बैठक में कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली के उपयोग और उससे जुड़ी चुनौतियों पर विमर्श किया जाएगा। OSM के तहत उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन होता है, लेकिन छात्रों और शिक्षकों ने स्कैन की गुणवत्ता, आरेखों के मूल्यांकन और तकनीकी खामियों जैसी समस्याओं पर गंभीर चिंताएँ जताई हैं।
त्रिभाषा सूत्र की समीक्षा भी एजेंडे में
इसके अतिरिक्त, 2 जून की बैठक में कक्षा 9 और 10 में त्रिभाषा सूत्र के क्रियान्वयन की स्थिति और उसके व्यावहारिक प्रभावों की भी समीक्षा की जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत भाषा नीति को लेकर कई राज्यों में मतभेद सामने आ चुके हैं।
परीक्षा सुधार की दिशा में महत्व
संसदीय स्थायी समिति की ये बैठकें देश की परीक्षा व्यवस्था और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता के दृष्टिकोण से निर्णायक मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समिति की सिफारिशें NTA के पुनर्गठन और भविष्य की परीक्षा नीति को सीधे प्रभावित कर सकती हैं। आने वाले हफ्तों में समिति की रिपोर्ट पर सरकार की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि परीक्षा सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएँगे या नहीं।