नीट-यूजी पेपर लीक: शिक्षा मंत्रालय ने कोएम्प्ट कंपनी से माँगी रिपोर्ट, साइबर एजेंसियाँ जाँच में जुटीं
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले में 2 जून 2026 को औपचारिक प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी है। मंत्रालय ने निजी कंपनी कोएम्प्ट को दिए गए विवादास्पद परिचालन अनुबंध के संदर्भ में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, जाँचकर्ता कंपनी की तकनीकी योग्यता और पिछले प्रदर्शन के अभिलेखों की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि सरकार कथित डेटा उल्लंघन और पेपर लीक की घटना को अत्यंत गंभीरता से ले रही है। मंत्रालय ने कड़ी चेतावनी जारी की है कि लापरवाही या मिलीभगत में लिप्त पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या बाहरी प्रतिनिधि के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि यह मामला देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
जाँच एजेंसियों की भूमिका
सरकार ने कथित सुरक्षा खामियों की पूरी सीमा का पता लगाने के लिए साइबर सुरक्षा एजेंसियों और परीक्षा बोर्ड के प्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित किया है। प्राथमिक जाँच की जिम्मेदारी केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दी गई है, जो इस आंतरिक जाँच को प्रशासनिक तंत्र में तत्काल सुधार की दिशा में एक अहम कदम मानती हैं।
तकनीकी सुधार और नई व्यवस्था
डिजिटल बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति को परीक्षा केंद्रों पर सख्त बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य करने और पेपर ट्रांसमिशन के लिए उन्नत एन्क्रिप्शन प्रोटोकॉल लागू करने का दायित्व सौंपा गया है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए पहल की है कि परीक्षा के प्रश्नपत्र भारतीय वायु सेना के विमानों द्वारा परिवहन किए जाएँ।
सरकार का आश्वासन
शिक्षा मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि जाँच के अंतिम निष्कर्षों के आधार पर वर्तमान परीक्षा प्रबंधन प्रोटोकॉल में पूर्ण सुधार किया जाएगा। मंत्रालय ने भविष्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कदाचार के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाने की प्रतिबद्धता जताई है। यह ऐसे समय में आया है जब लाखों छात्रों और उनके परिवारों की नजरें परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर टिकी हैं।
आगे क्या होगा
जाँच के दायरे में कोएम्प्ट को अनुबंध देने की प्रक्रिया, तकनीकी खामियाँ और संभावित मिलीभगत — तीनों पहलू शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का परिणाम भविष्य की राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं के संचालन ढाँचे को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है।