नीट, एनटीए और सीबीएसई सुधारों पर संसदीय समिति की 1-2 जून को अहम बैठकें
सारांश
मुख्य बातें
शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति 1 और 2 जून 2025 को नई दिल्ली में दो महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित करेगी, जिनमें नीट परीक्षा विवाद, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की बोर्ड परीक्षाओं में उभरी समस्याओं की गहन समीक्षा की जाएगी। परीक्षा सुधार और शिक्षा नीति के इन ज्वलंत मुद्दों पर यह समिति संबंधित मंत्रालयों और एजेंसियों से सीधे जवाब माँगेगी।
1 जून की बैठक: नीट और एनटीए की समीक्षा
1 जून को सुबह 11 बजे होने वाली बैठक में समिति नीट परीक्षा के पेन-एंड-पेपर मोड और कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) के बीच तुलना एवं संभावित बदलावों पर विचार-विमर्श करेगी। इसके अलावा, पेपर लीक, ग्रेस मार्किंग और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता जैसे गंभीर मुद्दों की भी पड़ताल होगी।
इस बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव, एनटीए के महानिदेशक तथा यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट के प्रतिनिधि डॉ. (मेजर) गुलशन गर्ग को बुलाया गया है। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और हितधारकों से भी सुझाव लिए जाएंगे।
2 जून की बैठक: सीबीएसई की ओएसएम और त्रि-भाषा नीति
2 जून को सुबह 11 बजे होने वाली बैठक में कक्षा 12 की सीबीएसई परीक्षाओं में लागू ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) व्यवस्था और उससे छात्रों को होने वाली दिक्कतों पर चर्चा होगी। साथ ही, कक्षा 9 और 10 में तीन-भाषा फॉर्मूले के क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी। इस बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और सीबीएसई के चेयरमैन को तलब किया गया है।
विवाद की पृष्ठभूमि
पिछले कुछ वर्षों में नीट परीक्षा में पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए हैं। हज़ारों छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा प्रक्रिया में आमूल सुधार की माँग उठाई है। कई परीक्षार्थियों ने सीबीटी मोड में तकनीकी खामियों की भी शिकायत दर्ज कराई है।
यह ऐसे समय में आया है जब सीबीएसई द्वारा ओएसएम व्यवस्था लागू किए जाने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग में देरी, मूल्यांकन में त्रुटि और गलत अंकन की शिकायतें सामने आई थीं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब संसदीय समिति को इन मुद्दों पर हस्तक्षेप करना पड़ रहा है — पिछले वर्ष भी एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे।
समिति का दायरा और आगे की राह
संसदीय समिति इन सभी मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा मंत्रालय और संबंधित एजेंसियों से विस्तृत जवाब माँगेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बैठकों के निष्कर्ष भविष्य में परीक्षा सुधार नीति की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। समिति की सिफारिशें संसद में पेश की जाएंगी, जिससे नीति-निर्माण पर सीधा दबाव बनेगा।