नीट-यूजी सुधार पर संसदीय समिति की बैठक 1 जुलाई को, डॉ. राधाकृष्णन देंगे एनटीए सुधार का रोडमैप
सारांश
मुख्य बातें
शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक 1 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होगी, जिसमें नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा से मिले सबकों की समीक्षा और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) में संस्थागत सुधारों पर विस्तृत चर्चा होगी। यह बैठक उस पृष्ठभूमि में हो रही है जब नीट-यूजी पेपर लीक कांड के बाद एनटीए पहली बार संसदीय समिति के समक्ष जवाबदेही के लिए उपस्थित होगी।
बैठक का एजेंडा और समय-सारणी
बुधवार को होने वाली इस बैठक के दो सत्र निर्धारित हैं — पहला सत्र सुबह 10:30 बजे और दूसरा सत्र दोपहर 12 बजे से शुरू होगा। बैठक में नीट-यूजी पुनर्परीक्षा प्रक्रिया की समीक्षा के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र में स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग की संभावनाओं पर भी गंभीर विचार-विमर्श होगा।
मुख्य वक्ता और प्रस्तुतकर्ता
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष और एनटीए सुधार समिति के प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन समिति के समक्ष एजेंसी को सशक्त बनाने का अपना विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत करेंगे। इसके अतिरिक्त, उच्च शिक्षा सचिव और एनटीए के महानिदेशक भी बैठक में उपस्थित रहेंगे और चल रहे सुधारों तथा मौजूदा चुनौतियों से समिति को अवगत कराएंगे।
पेपर लीक के बाद पहली जवाबदेही
गौरतलब है कि नीट-यूजी पेपर लीक प्रकरण के बाद यह पहला अवसर है जब एनटीए सीधे संसदीय समिति के सामने जवाब देने जा रहा है। इससे पहले भी समिति ने इस घटनाक्रम पर एनटीए से कड़े सवाल किए थे, लेकिन यह बैठक औपचारिक जवाबदेही की दृष्टि से विशेष महत्व रखती है। यह ऐसे समय में आई है जब लाखों छात्रों का भविष्य परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर टिका हुआ है।
नए अध्यक्ष की पहली बैठक
यह बैठक कांग्रेस नेता एवं राज्यसभा सदस्य मुकुल वासनिक की समिति अध्यक्ष के रूप में पहली आधिकारिक बैठक होगी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह समिति के अध्यक्ष थे, जिनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया। वासनिक के नेतृत्व में यह बैठक एनटीए सुधार की दिशा में एक नई शुरुआत मानी जा रही है।
आगे की राह
समिति की इस बैठक के निष्कर्ष एनटीए के भविष्य के ढाँचे और परीक्षा प्रणाली में संस्थागत बदलावों की रूपरेखा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। शिक्षाविदों और छात्र संगठनों की नज़रें इस बैठक पर टिकी हैं, जो परीक्षा सुधार को लेकर ठोस कार्ययोजना की उम्मीद रखते हैं।