नीट विवाद पर संसदीय समिति की बैठक को जदयू ने बताया अहम, छात्रों से शिकायत दर्ज कराने की अपील
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं ने नीट पेपर लीक विवाद, सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रक्रिया और तीन-भाषा फॉर्मूले पर 1 और 2 जून को आयोजित संसदीय स्थायी समिति की बैठक को जनहित में एक निर्णायक कदम करार दिया है। जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने पटना में कहा कि यह बैठक शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण है।
समिति के एजेंडे में क्या है
संसदीय स्थायी समिति 1 और 2 जून को नीट पेपर लीक, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली, पेन-पेपर और कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) मोड, सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली तथा तीन-भाषा फॉर्मूले के क्रियान्वयन पर विस्तृत विचार-विमर्श कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्र और अभिभावक आक्रोशित हैं।
जदयू नेताओं की प्रतिक्रिया
राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, 'संसदीय स्थायी समिति की बैठक में नीट, सीबीएसई और तीन-भाषा फॉर्मूला जैसे राष्ट्रीय स्तर के गंभीर मुद्दों पर चर्चा हो रही है। ये जनता से जुड़े बेहद अहम मामले हैं। समिति पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ इन मुद्दों पर आगे का रास्ता निकालेगी।' उन्होंने छात्रों से अपील की कि जो अभ्यर्थी मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर कोई चिंता या आपत्ति रखते हैं, वे अपनी शिकायतें औपचारिक रूप से दर्ज कराएं।
प्रसाद ने कहा, 'यह छात्रों के लिए एक अवसर है। NTA द्वारा उनकी शिकायतों का समाधान पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाएगा।'
सांसद संजय कुमार झा का बयान
जदयू सांसद संजय कुमार झा ने नीट मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा, 'यह एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। परीक्षा देकर जब छात्र घर लौटता है और उसे पेपर लीक या अनियमितता की खबर मिलती है, तो पूरा परिवार दुखी और परेशान हो जाता है। हम सभी परीक्षा की प्रक्रिया से गुजरे हैं। परीक्षा के बाद आमतौर पर मानसिक राहत महसूस होती है, लेकिन इस बार छात्रों को वह राहत नहीं मिली।' झा ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर सक्रिय रुख अपनाया है और किसी भी तथ्य को दबाने की कोशिश नहीं की गई।
सरकार की भूमिका और आगे की राह
गौरतलब है कि नीट-यूजी 2024 परीक्षा में कथित पेपर लीक और ग्रेस मार्क्स विवाद के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया था। संसदीय समिति की यह बैठक परीक्षा सुधारों की दिशा में एक संस्थागत प्रयास के रूप में देखी जा रही है। झा के अनुसार, परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं की पुनरावृत्ति रोकने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।