30 जुलाई 2026
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जंतर-मंतर पैलेट गन मामला: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस दिया, घायलों के इलाज और SOP पर माँगा जवाब

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जंतर-मंतर पैलेट गन मामला: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस दिया, घायलों के इलाज और SOP पर माँगा जवाब

सारांश

जंतर-मंतर पर नीट विरोध के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल पर सर्वोच्च न्यायालय सख्त हुआ — केंद्र को नोटिस, घायलों के इलाज का आदेश और SOP पर जवाब तलब। यह पहली बार है जब शीर्ष अदालत ने मुख्यभूमि भारत में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के उपयोग को सीधे कटघरे में खड़ा किया है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 30 जुलाई को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर पैलेट गन की SOP पर जवाब माँगा।
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक विरोध के दौरान RAF द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल से कई प्रदर्शनकारी घायल हुए।
न्यायालय ने सरकार को पैलेट से घायल पीड़ितों का पूरा चिकित्सा उपचार सुनिश्चित करने और हथियारों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश दिया।
याचिका यशोवर्धन आजाद , प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी की ओर से दायर की गई है।
CJI सूर्यकांत , जस्टिस बागची और जस्टिस वी.
मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता को पैलेट गन बैन की माँग में संशोधन करने का निर्देश दिया।

सर्वोच्च न्यायालय ने 30 जुलाई को जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल के मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और पैलेट गन से घायल हुए पीड़ितों को पूरा चिकित्सा उपचार सुनिश्चित कराने का आदेश दिया। न्यायालय ने सरकार से यह भी पूछा कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) क्या है।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ ने गुरुवार को रिटायर्ड इंटेलिजेंस ब्यूरो के स्पेशल डायरेक्टर यशोवर्धन आजाद तथा दो अन्य याचिकाकर्ताओं — प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी — की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की।

न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि RAF द्वारा प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल किए गए हथियारों और गोलियों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए, ताकि जाँच के दौरान साक्ष्य नष्ट न हों।

याचिका में क्या माँगा गया है

याचिका में 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई के दौरान पैलेट से घायल हुए सभी पीड़ितों को मुआवजा दिए जाने और उनका उचित इलाज कराए जाने की माँग की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि शांतिपूर्ण भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल न केवल अनुचित है, बल्कि कथित तौर पर संविधान के प्रावधानों के विरुद्ध भी है।

इसके साथ ही, न्यायालय ने याचिकाकर्ता को पैलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की माँग में आवश्यक संशोधन करने का निर्देश भी दिया।

पृष्ठभूमि: नीट विरोध और पुलिस कार्रवाई

यह मामला 20 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित संसद मार्च से जुड़ा है, जिसमें नीट पेपर लीक के विरोध में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र हुए थे। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जिन हथियारों का इस्तेमाल किया, उनमें पैलेट गन भी शामिल थी, जिससे कई प्रदर्शनकारी घायल हुए। गौरतलब है कि पैलेट गन का इस्तेमाल पहले मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर में होता रहा है और इसके दुष्प्रभावों को लेकर मानवाधिकार संगठन पहले से सवाल उठाते रहे हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की सुनवाई

केंद्र सरकार को नोटिस का जवाब देना है, जिसमें पैलेट गन के इस्तेमाल की SOP और घायलों के उपचार की स्थिति का ब्यौरा माँगा गया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सरकार को सभी संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने होंगे। अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष सामने आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय का यह हस्तक्षेप महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पहली बार है जब शीर्ष अदालत ने मुख्यभूमि भारत में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के उपयोग को सीधे चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से जवाब माँगा है। आलोचकों का कहना है कि यह हथियार भीड़ नियंत्रण के लिए अनुपातहीन बल का उदाहरण है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कश्मीर में 'कम घातक' विकल्प के रूप में विवादास्पद रही है, अब दिल्ली की सड़कों पर छात्र प्रदर्शनकारियों पर इस्तेमाल हो रही है। यह सिर्फ हथियार की पसंद का मामला नहीं है — यह इस बात का संकेत है कि राज्य असहमति को किस नज़र से देखता है। SOP पर सरकार का जवाब यह तय करेगा कि क्या यह एक व्यवस्थागत नीति थी या मैदानी स्तर पर लिया गया फैसला — और दोनों ही स्थितियों में जवाबदेही की माँग उठनी चाहिए।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंतर-मंतर पर पैलेट गन का इस्तेमाल कब और क्यों हुआ?
20 जुलाई को जंतर-मंतर , नई दिल्ली में नीट पेपर लीक के विरोध में आयोजित संसद मार्च के दौरान RAF ने भीड़ नियंत्रण के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल किया, जिससे कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या आदेश दिए हैं?
सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को तीन निर्देश दिए हैं: पैलेट गन से घायल पीड़ितों का पूरा चिकित्सा उपचार सुनिश्चित करना, RAF द्वारा इस्तेमाल हथियारों और गोलियों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना, और पैलेट गन के इस्तेमाल की SOP पर जवाब देना।
यह याचिका किसने दायर की है और इसमें क्या माँगा गया है?
यह याचिका रिटायर्ड IB स्पेशल डायरेक्टर यशोवर्धन आजाद , प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी ने दायर की है। इसमें घायल पीड़ितों को मुआवजा, उनका इलाज और पैलेट गन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध की माँग की गई है।
पैलेट गन की SOP क्या होती है और इस पर विवाद क्यों है?
SOP यानी मानक संचालन प्रक्रिया वह दिशानिर्देश है जो तय करती है कि किन परिस्थितियों में और किस प्रक्रिया के तहत पैलेट गन का इस्तेमाल किया जा सकता है। याचिकाकर्ताओं का कथित तौर पर तर्क है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर इसका इस्तेमाल संविधान-सम्मत नहीं है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
केंद्र सरकार को सर्वोच्च न्यायालय के नोटिस का जवाब देना है, जिसमें पैलेट गन SOP और घायलों के उपचार की स्थिति का ब्यौरा शामिल होगा। अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष सुनने के बाद न्यायालय आगे की कार्रवाई तय करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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