जंतर-मंतर पैलेट गन मामला: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस दिया, घायलों के इलाज और SOP पर माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 30 जुलाई को जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल के मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और पैलेट गन से घायल हुए पीड़ितों को पूरा चिकित्सा उपचार सुनिश्चित कराने का आदेश दिया। न्यायालय ने सरकार से यह भी पूछा कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) क्या है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ ने गुरुवार को रिटायर्ड इंटेलिजेंस ब्यूरो के स्पेशल डायरेक्टर यशोवर्धन आजाद तथा दो अन्य याचिकाकर्ताओं — प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी — की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की।
न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि RAF द्वारा प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल किए गए हथियारों और गोलियों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए, ताकि जाँच के दौरान साक्ष्य नष्ट न हों।
याचिका में क्या माँगा गया है
याचिका में 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई के दौरान पैलेट से घायल हुए सभी पीड़ितों को मुआवजा दिए जाने और उनका उचित इलाज कराए जाने की माँग की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि शांतिपूर्ण भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल न केवल अनुचित है, बल्कि कथित तौर पर संविधान के प्रावधानों के विरुद्ध भी है।
इसके साथ ही, न्यायालय ने याचिकाकर्ता को पैलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की माँग में आवश्यक संशोधन करने का निर्देश भी दिया।
पृष्ठभूमि: नीट विरोध और पुलिस कार्रवाई
यह मामला 20 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित संसद मार्च से जुड़ा है, जिसमें नीट पेपर लीक के विरोध में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र हुए थे। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जिन हथियारों का इस्तेमाल किया, उनमें पैलेट गन भी शामिल थी, जिससे कई प्रदर्शनकारी घायल हुए। गौरतलब है कि पैलेट गन का इस्तेमाल पहले मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर में होता रहा है और इसके दुष्प्रभावों को लेकर मानवाधिकार संगठन पहले से सवाल उठाते रहे हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की सुनवाई
केंद्र सरकार को नोटिस का जवाब देना है, जिसमें पैलेट गन के इस्तेमाल की SOP और घायलों के उपचार की स्थिति का ब्यौरा माँगा गया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सरकार को सभी संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने होंगे। अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष सामने आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय का यह हस्तक्षेप महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पहली बार है जब शीर्ष अदालत ने मुख्यभूमि भारत में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के उपयोग को सीधे चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से जवाब माँगा है। आलोचकों का कहना है कि यह हथियार भीड़ नियंत्रण के लिए अनुपातहीन बल का उदाहरण है।