27 जुलाई 2026
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नीट प्रदर्शनकारियों पर पुलिस बल प्रयोग: विपक्षी सांसदों ने संसद में दिए स्थगन प्रस्ताव नोटिस

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नीट प्रदर्शनकारियों पर पुलिस बल प्रयोग: विपक्षी सांसदों ने संसद में दिए स्थगन प्रस्ताव नोटिस

सारांश

नीट पेपर लीक के खिलाफ 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए 'संसद चलो' प्रदर्शन में पुलिस के कथित अत्यधिक बल प्रयोग — पेलेट गन और शॉक बैटन — को लेकर विपक्ष ने संसद में मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस और डीएमके सांसदों के स्थगन नोटिस मानसून सत्र में टकराव की आहट दे रहे हैं।

मुख्य बातें

विपक्षी सांसदों ने 27 जुलाई 2026 को लोकसभा और राज्यसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस दाखिल किए।
नोटिस 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर नीट विरोधी प्रदर्शन में पेलेट गन और शॉक बैटन के कथित इस्तेमाल पर केंद्रित हैं।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल , मणिकम टैगोर , हिबी ईडन , विजय वसंत और सैयद नासिर हुसैन तथा डीएमके सांसद टीआर बालू ने अलग-अलग नोटिस दिए।
तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दे दिया था।
केंद्र सरकार लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 सोमवार को संसद में पेश करने जा रही है।

विपक्षी दलों के कई सांसदों ने सोमवार, 27 जुलाई 2026 को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में स्थगन प्रस्ताव नोटिस दाखिल किए और मांग की कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर नीट विरोधी प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर किए गए बल प्रयोग पर तत्काल संसदीय चर्चा हो। यह नोटिस ऐसे समय में आए हैं जब नीट पेपर लीक विवाद देश की शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़े राजनीतिक संकट का रूप ले चुका है।

20 जुलाई का 'संसद चलो' प्रदर्शन और हिंसा

20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में 'संसद चलो' मार्च आयोजित किया गया था, जिसमें सैकड़ों छात्रों ने हिस्सा लिया। यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के विरोध में बुलाया गया था। प्रदर्शनकारी तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी माँग कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ गए और हिंसा की घटनाएँ सामने आईं, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए।

लोकसभा में विपक्ष की माँगें

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के सांसद केसी वेणुगोपाल, मणिकम टैगोर, हिबी ईडन और विजयकुमार उर्फ विजय वसंत ने लोकसभा में अलग-अलग स्थगन प्रस्ताव नोटिस दाखिल किए। इन नोटिसों में आरोप लगाया गया है कि सुरक्षा बलों ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पेलेट गन और शॉक बैटन सहित अत्यधिक और कथित तौर पर घातक बल का इस्तेमाल किया, जिससे कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए और कुछ के दृष्टि खोने की आशंका भी जताई गई है।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के सांसद टीआर बालू ने भी लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस देकर नीट पर तत्काल प्रतिबंध लगाने और जंतर-मंतर पर कथित रूप से घातक हथियारों के इस्तेमाल की स्वतंत्र जाँच कराने की माँग की।

राज्यसभा में नियम 267 के तहत नोटिस

राज्यसभा में कांग्रेस सांसद सैयद नासिर हुसैन ने नियम 267 के तहत कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस दाखिल किया। उन्होंने 20 जुलाई 2026 को दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित अत्यधिक बल प्रयोग पर तत्काल चर्चा की माँग की। गौरतलब है कि नियम 267 के तहत नोटिस सदन के नियमित कार्यक्रम को स्थगित कर किसी अत्यावश्यक मामले पर बहस कराने की अनुमति देता है।

सरकार का जवाब: परीक्षा सुधार विधेयक

इस बीच, केंद्र सरकार सोमवार, 27 जुलाई को संसद में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करने जा रही है। इस विधेयक का उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली धाँधली के खिलाफ कानूनी ढाँचे को और मज़बूत बनाना है। आलोचकों का कहना है कि यह कदम विपक्ष के दबाव और छात्र आंदोलन की प्रतिक्रिया में उठाया गया है।

आगे क्या होगा

स्थगन प्रस्ताव नोटिसों की स्वीकृति लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति के विवेक पर निर्भर करती है। यह ऐसे समय में आया है जब नीट विवाद संसद के मानसून सत्र में एक केंद्रीय मुद्दा बन चुका है और आने वाले दिनों में सदन में तीखी बहस की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली जवाबदेही तब होगी जब सरकार स्वतंत्र जाँच की माँग पर स्पष्ट रुख अपनाए। लोक परीक्षा संशोधन विधेयक का उसी दिन पेश होना एक सोची-समझी रणनीति दिखती है — ध्यान धाँधली-रोकथाम पर केंद्रित करो, बल प्रयोग की जवाबदेही से बचो। संसद का यह सत्र बताएगा कि क्या सरकार जाँच से बचती है या पारदर्शिता की ओर बढ़ती है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विपक्षी सांसदों ने स्थगन प्रस्ताव नोटिस क्यों दिए?
विपक्षी सांसदों ने 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर नीट विरोधी प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा कथित तौर पर पेलेट गन और शॉक बैटन के इस्तेमाल पर संसद में तत्काल चर्चा की माँग के लिए ये नोटिस दिए। कई छात्रों के गंभीर रूप से घायल होने और कुछ की दृष्टि खोने की आशंका ने इस मुद्दे को संसदीय बहस का केंद्र बना दिया।
20 जुलाई का 'संसद चलो' प्रदर्शन क्या था?
'संसद चलो' मार्च 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा नीट पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में आयोजित किया गया था। इसमें सैकड़ों छात्रों ने हिस्सा लिया और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की, जो बाद में 25 जुलाई को दे दिया गया।
किन सांसदों ने स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिए?
लोकसभा में कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल, मणिकम टैगोर, हिबी ईडन और विजय वसंत तथा डीएमके के टीआर बालू ने नोटिस दिए। राज्यसभा में कांग्रेस सांसद सैयद नासिर हुसैन ने नियम 267 के तहत नोटिस दाखिल किया।
लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 क्या है?
यह केंद्र सरकार द्वारा 27 जुलाई 2026 को संसद में पेश किया जाने वाला विधेयक है, जिसका उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा धाँधली के खिलाफ मौजूदा कानूनी ढाँचे को और मज़बूत बनाना है। यह नीट विवाद की पृष्ठभूमि में आया है।
नीट पेपर लीक विवाद में अब तक क्या हुआ?
नीट पेपर लीक विवाद के चलते छात्र आंदोलन तेज़ हुआ, 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को इस्तीफा दे दिया। अब विपक्ष ने संसद में पुलिस बल प्रयोग पर बहस की माँग उठाई है।
राष्ट्र प्रेस
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