नीट प्रदर्शनकारियों पर पुलिस बल प्रयोग: विपक्षी सांसदों ने संसद में दिए स्थगन प्रस्ताव नोटिस
सारांश
मुख्य बातें
विपक्षी दलों के कई सांसदों ने सोमवार, 27 जुलाई 2026 को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में स्थगन प्रस्ताव नोटिस दाखिल किए और मांग की कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर नीट विरोधी प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर किए गए बल प्रयोग पर तत्काल संसदीय चर्चा हो। यह नोटिस ऐसे समय में आए हैं जब नीट पेपर लीक विवाद देश की शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़े राजनीतिक संकट का रूप ले चुका है।
20 जुलाई का 'संसद चलो' प्रदर्शन और हिंसा
20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में 'संसद चलो' मार्च आयोजित किया गया था, जिसमें सैकड़ों छात्रों ने हिस्सा लिया। यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के विरोध में बुलाया गया था। प्रदर्शनकारी तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी माँग कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ गए और हिंसा की घटनाएँ सामने आईं, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए।
लोकसभा में विपक्ष की माँगें
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के सांसद केसी वेणुगोपाल, मणिकम टैगोर, हिबी ईडन और विजयकुमार उर्फ विजय वसंत ने लोकसभा में अलग-अलग स्थगन प्रस्ताव नोटिस दाखिल किए। इन नोटिसों में आरोप लगाया गया है कि सुरक्षा बलों ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पेलेट गन और शॉक बैटन सहित अत्यधिक और कथित तौर पर घातक बल का इस्तेमाल किया, जिससे कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए और कुछ के दृष्टि खोने की आशंका भी जताई गई है।
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के सांसद टीआर बालू ने भी लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस देकर नीट पर तत्काल प्रतिबंध लगाने और जंतर-मंतर पर कथित रूप से घातक हथियारों के इस्तेमाल की स्वतंत्र जाँच कराने की माँग की।
राज्यसभा में नियम 267 के तहत नोटिस
राज्यसभा में कांग्रेस सांसद सैयद नासिर हुसैन ने नियम 267 के तहत कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस दाखिल किया। उन्होंने 20 जुलाई 2026 को दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित अत्यधिक बल प्रयोग पर तत्काल चर्चा की माँग की। गौरतलब है कि नियम 267 के तहत नोटिस सदन के नियमित कार्यक्रम को स्थगित कर किसी अत्यावश्यक मामले पर बहस कराने की अनुमति देता है।
सरकार का जवाब: परीक्षा सुधार विधेयक
इस बीच, केंद्र सरकार सोमवार, 27 जुलाई को संसद में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करने जा रही है। इस विधेयक का उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली धाँधली के खिलाफ कानूनी ढाँचे को और मज़बूत बनाना है। आलोचकों का कहना है कि यह कदम विपक्ष के दबाव और छात्र आंदोलन की प्रतिक्रिया में उठाया गया है।
आगे क्या होगा
स्थगन प्रस्ताव नोटिसों की स्वीकृति लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति के विवेक पर निर्भर करती है। यह ऐसे समय में आया है जब नीट विवाद संसद के मानसून सत्र में एक केंद्रीय मुद्दा बन चुका है और आने वाले दिनों में सदन में तीखी बहस की संभावना है।