जंतर-मंतर पुलिस कार्रवाई पर सपा सांसद रामजीलाल सुमन की मांग: अमित शाह संसद में दें जवाब
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रामजीलाल सुमन ने 12 अगस्त 2026 को संसद के मानसून सत्र के दौरान जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार से सीधी जवाबदेही की मांग की। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इस मामले में संसद के पटल पर स्पष्ट बयान देना चाहिए। सुमन ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है।
जंतर-मंतर हिंसा और पुलिस कार्रवाई पर विपक्ष का रुख
सुमन ने कहा कि मानसून सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष लगातार जंतर-मंतर पर हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाता रहा है। उनके अनुसार, संसद मार्च के दौरान छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने मांग की कि इस कार्रवाई की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और गृह मंत्री को इस पर अपनी जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए।
सरकार पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप
सपा सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार एक ओर कानून-व्यवस्था के मामलों में स्थानीय प्रशासन और संबंधित मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी की दलील देती है, जबकि दूसरी ओर पुराने मामलों में अलग राजनीतिक मानदंड अपनाए गए थे। उन्होंने विवादित ढांचे के विध्वंस के बाद की परिस्थितियों का जिक्र करते हुए तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार और मुलायम सिंह यादव पर लगाए गए आरोपों से मौजूदा स्थिति की तुलना की। सुमन का कहना था कि अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग मापदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए।
एफसीआरए संशोधन बिल और जेपीसी का फैसला
एफसीआरए संशोधन बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजे जाने के फैसले पर सुमन ने कहा कि यह केवल विपक्ष की मांग नहीं थी — देशभर में इस विधेयक को लेकर व्यापक असंतोष और चिंता थी। उन्होंने कहा कि समाज में इस मुद्दे पर विभाजन और गुस्सा स्पष्ट दिख रहा था, इसलिए व्यापक विचार-विमर्श के लिए बिल को समिति के पास भेजना उचित कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जेपीसी सभी पक्षों की राय सुनेगी।
'हर घर तिरंगा' और राष्ट्रवाद पर सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'हर घर तिरंगा' अभियान की अपील पर सुमन ने सवाल उठाया कि जिन संगठनों का स्वतंत्रता आंदोलन से कोई सीधा संबंध नहीं रहा, वे आज राष्ट्रवाद और तिरंगे की बात क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद लंबे समय तक नागपुर में तिरंगा नहीं फहराया गया और भगवा ध्वज को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने वंदे मातरम पर भी कहा कि संविधान सभा के दौर में इस बात पर सहमति बनी थी कि केवल उन्हीं अंशों को सार्वजनिक रूप से गाया जाए जिन पर व्यापक सहमति हो, क्योंकि गीत के कुछ हिस्सों को लेकर धार्मिक मतभेद थे।
सांप्रदायिक तनाव और सरकार के एजेंडे पर निशाना
सुमन ने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान गांधी ने विभिन्न समुदायों और विचारधाराओं को एकजुट करने का प्रयास किया था और किसी भी समुदाय की धार्मिक या सामाजिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे, इसका ध्यान रखा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा समय में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों के जरिए समाज में तनाव पैदा करने की कोशिश की जा रही है। सुमन ने कहा कि हिंदू-मुसलमान के मुद्दे के अलावा सरकार के पास कोई दूसरा कार्यक्रम नहीं है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब संसद में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच टकराव अपने चरम पर है।