छात्रों पर पैलेट गन: विपक्ष ने अमित शाह से माँगा जवाब, नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स पर भी उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
संसद के मॉनसून सत्र में 27 जुलाई 2026 को विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन और बल-प्रयोग के आदेश को लेकर सीधी जवाबदेही माँगी। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा सुधार के लिए तकनीक विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की घोषणा पर भी सवाल उठाए गए।
पैलेट गन आदेश पर विपक्ष का सवाल
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने सदन में कहा कि दिल्ली पुलिस और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) सीधे गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यदि प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई का आदेश गृह मंत्री की ओर से आया था, तो जवाबदेही तय होनी चाहिए — और यदि नहीं आया था, तो यह स्पष्ट किया जाए कि आदेश किसने दिया।
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने भी यही सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस बिना किसी उच्च आदेश के पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं कर सकती। उनके अनुसार, गृह मंत्रालय को इस पूरे मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
पीएम मोदी की 'नैतिक ताकत' पर कांग्रेस का हमला
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के युवा सरकार के फैसलों पर खुलकर सवाल उठा रहे हैं, जो प्रधानमंत्री की नैतिक स्थिति को कमज़ोर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संसद में छात्रों और युवाओं की आवाज़ दबाने की कोशिश कर रही है और प्रधानमंत्री को इस विषय पर सीधा जवाब देना चाहिए।
परीक्षा सुधार विधेयक और टास्क फोर्स पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
लोकसभा में पेश 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' को लेकर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि विधेयक में सज़ा और जुर्माने के प्रावधानों पर ज़ोर है, जबकि छात्रों की मूल माँग परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और ढाँचागत सुधार की थी।
कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की माँगों पर सार्थक चर्चा से बच रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कई कानून बनाए हैं, लेकिन उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्न बने हुए हैं।
हालाँकि, कांग्रेस सांसद फूलो देवी नेताम ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में बनने वाली टास्क फोर्स का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि देशभर में पेपर लीक की घटनाओं के कारण छात्रों में गहरी नाराज़गी है और नई समिति परीक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार ला सकती है।
विपक्ष की आगे की रणनीति
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने स्पष्ट किया कि संसद में विपक्ष छात्रों के मुद्दे, पुलिस कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को पूरी मज़बूती के साथ उठाता रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब मॉनसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव पहले से ही तीखा है।