लोकसभा में हंगामा: राहुल गांधी के 'पैलेट गन' आरोप पर सदन स्थगित, रिजिजू ने माँगा सबूत
सारांश
मुख्य बातें
नेता विपक्ष राहुल गांधी ने 29 जुलाई को लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा आरोप लगाया कि उन्होंने 20 जुलाई के 'चलो संसद' मार्च में छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश दिया था। इस बयान के बाद सत्ता पक्ष के सांसद अपनी सीटों से खड़े हो गए और सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया, जिसके चलते लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यवाही दोपहर 2:30 बजे तक स्थगित कर दी।
राहुल गांधी के मुख्य आरोप
राहुल गांधी ने सदन में कहा कि शिक्षा मंत्रालय को वास्तव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) संचालित करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के हर विश्वविद्यालय में RSS से जुड़े कुलपति नियुक्त किए जा रहे हैं और छात्रों को स्वतंत्र रूप से सोचने का अवसर नहीं दिया जा रहा।
इसके बाद उन्होंने 20 जुलाई के छात्र मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सुरक्षा बलों का उपयोग गृह मंत्री के आदेश पर ही होता है, किसी और के आदेश पर नहीं।
सत्ता पक्ष की कड़ी प्रतिक्रिया
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'आप वह आदेश की प्रति दिखाइए, जिसमें गृह मंत्री ने किसी अधिकारी को फायरिंग या पैलेट गन चलाने का निर्देश दिया हो। ऑर्डर नंबर बताइए और दस्तावेज सदन के पटल पर रखिए।' रिजिजू ने यह भी कहा कि किसी मंत्री पर बिना प्रमाण के सीधे आरोप लगाना स्वीकार्य नहीं है।
अध्यक्ष ओम बिरला की चेतावनी
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सदन में बिना पूर्व सूचना और तथ्यों के आधार पर किसी पर व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाए जा सकते। उन्होंने राहुल गांधी को स्मरण कराया, 'आप नेता प्रतिपक्ष हैं। सदन में जो भी कहा जाता है, वह वर्षों तक रिकॉर्ड का हिस्सा रहता है। इसलिए मर्यादा और नियमों का पालन करते हुए ही अपनी बात रखें।'
विपक्ष का एकजुट समर्थन
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राहुल गांधी का समर्थन करते हुए कहा कि यदि नेता विपक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं, तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह स्पष्ट करे कि छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई किसके आदेश पर हुई। विपक्षी सांसदों ने 'गृह मंत्री जवाब दो' के नारे लगाए, जिससे सदन में शोर और बढ़ गया।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब मानसून सत्र में एंटी पेपर लीक बिल पर विधायी चर्चा प्राथमिकता पर थी। गौरतलब है कि 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष पहले से ही सरकार को घेरता रहा है। अब सदन के स्थगन के बाद यह देखना होगा कि क्या राहुल गांधी अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज़ी साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं, या सत्ता पक्ष की माफी की माँग और तेज होती है।