खड़गे का अल्टीमेटम: अमित शाह सदन में आएं, छात्रों पर लाठीचार्ज का दें जवाब, PM मोदी मांगें माफी
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 6 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जंतर मंतर के निकट छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा एक बार फिर तेज़ी से उठाया। उन्होंने माँग की कि गृह मंत्री अमित शाह स्वयं संसद में उपस्थित होकर जवाब दें और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सार्वजनिक रूप से माफी माँगें।
मुख्य घटनाक्रम
खड़गे ने बताया कि पिछले 15 दिनों से समूचा विपक्ष इस एकमात्र माँग पर एकजुट है कि गृह मंत्री सदन में आकर छात्रों पर हुई कार्रवाई का स्पष्टीकरण दें। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को राज्यसभा में पुनः उठाया गया है और जब तक गृह मंत्री सदन में नहीं आते, संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकती।
छात्रों पर बल प्रयोग का आरोप
खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों के विरुद्ध अत्यधिक और अनुचित बल का प्रयोग किया गया। उनके अनुसार, पैलेट गन, आँसू गैस, लाठी, इलेक्ट्रिक बैटन और कील वाली लाठी — सभी का इस्तेमाल छात्रों पर किया गया। उन्होंने कहा, 'छात्रों ने कोई बवाल नहीं किया था। क्या उन्होंने 20-50 सरकारी गाड़ियाँ तोड़ीं? क्या किसी नेता को रोका और सवाल पूछा? वे शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन उन्हें हटाने के लिए जो तरीके अपनाए गए, वह बहुत गलत है।'
सरकार पर सीधा निशाना
खड़गे ने गृह मंत्री की संसद से अनुपस्थिति पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, 'इनको सदन में आकर जवाब देने में क्या मजबूरी है? इसके दो ही मतलब हो सकते हैं — एक तो ये सोच रहे हैं कि इस मुद्दे को नज़रअंदाज़ कर दिया जाए। दूसरा, ये डर गए हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन न चलने की ज़िम्मेदारी गृह मंत्री अमित शाह की है, न कि विपक्षी सांसदों की।
विपक्ष की माँगें
कांग्रेस अध्यक्ष ने दो-सूत्रीय माँग रखी — प्रधानमंत्री मोदी छात्रों से माफी माँगें और गृह मंत्री संसद में आकर लिखित बयान दें। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष झारखंड, पंजाब और दिल्ली — हर राज्य में छात्रों के साथ खड़ा है और उनकी समस्याओं के समाधान तक संघर्ष जारी रहेगा।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र छात्र-आंदोलन और उस पर हुई कार्रवाई को लेकर लगातार बाधित हो रहा है। गौरतलब है कि विपक्ष की यह माँग पहली बार नहीं उठी — पिछले दो सप्ताह में कई बार कार्यवाही स्थगित हो चुकी है। अब सबकी नज़र इस बात पर है कि सरकार इस दबाव में सदन में जवाब देती है या गतिरोध और लंबा खिंचता है।