जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन: मणिकम टैगोर ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया, अमित शाह से माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर बी. ने 7 अगस्त 2026 को लोकसभा सचिव को पत्र भेजकर स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। उन्होंने 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संसद में विस्तृत बयान देने की माँग की है। आरोप है कि प्रदर्शनकारी छात्रों — जिनमें महिलाएँ भी शामिल थीं — के विरुद्ध लाठीचार्ज, पैलेट गन, आँसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।
स्थगन प्रस्ताव में उठाए गए मुद्दे
अपने पत्र में मणिकम टैगोर ने कहा कि घटना से जुड़ी रिपोर्टों और आरोपों ने प्रदर्शनकारियों को हटाने में इस्तेमाल बल के तरीके और मात्रा को लेकर 'गंभीर चिंताएँ' पैदा की हैं। उन्होंने माँग की कि इन आरोपों की 'पूरी, निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच' होनी चाहिए।
सांसद ने सदन के समक्ष कई प्रश्न रखे — पुलिस कार्रवाई की मंजूरी किसने दी, क्या बल का प्रयोग संवैधानिक प्रावधानों और तय पुलिस प्रक्रियाओं के अनुरूप था, तथा घायल, हिरासत में लिए गए और गिरफ्तार छात्रों की संख्या कितनी है।
एफआईआर वापसी और न्यायिक जाँच की माँग
मणिकम टैगोर ने सरकार से यह भी जानना चाहा कि क्या वह दिल्ली विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तुरंत वापस लेगी। उन्होंने माँग की कि सरकार यह भरोसा दे कि शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शन और लोकतांत्रिक असहमति पर किसी प्रकार का कानूनी दबाव नहीं डाला जाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने घटना की 'स्वतंत्र, निष्पक्ष और समय-सीमा के भीतर न्यायिक जाँच' का आदेश देने की अपील की, ताकि तथ्यों का पता लगाया जा सके और जहाँ आवश्यक हो, जवाबदेही तय की जा सके।
प्रधानमंत्री से माफी की माँग
सांसद ने यह भी पूछा कि यदि जाँच में यह साबित होता है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध अनावश्यक या अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया, तो क्या प्रधानमंत्री संसद में खेद व्यक्त करेंगे और छात्रों से माफी माँगेंगे। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि जबरदस्ती के बजाय बातचीत के माध्यम से छात्रों की शिकायतें दूर की जाएँ।
संवैधानिक अधिकारों पर सवाल
मणिकम टैगोर ने कहा कि इस घटना ने भाषण व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा के अधिकार, नागरिक स्वतंत्रता की सुरक्षा और कानून लागू करने वाली एजेंसियों में जनता के भरोसे जैसी 'संवैधानिक गारंटियों' पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि 'सदन का यह कर्तव्य है कि वह इन मुद्दों की जाँच करे और सरकार को जवाबदेह ठहराए।' यह प्रस्ताव संसद के मानसून सत्र में विपक्ष और सरकार के बीच टकराव का नया बिंदु बन सकता है।