21 सितंबर 2026
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हेमंत सोरेन को PMLA अदालत से झटका: ट्रायल टालने की अर्जी खारिज, 24 सितंबर को तय होंगे आरोप

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हेमंत सोरेन को PMLA अदालत से झटका: ट्रायल टालने की अर्जी खारिज, 24 सितंबर को तय होंगे आरोप

सारांश

रांची की विशेष PMLA अदालत ने हेमंत सोरेन की ट्रायल टालने की अर्जी खारिज कर दी है। कथित 8.86 एकड़ जमीन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अब 24 सितंबर को आरोप तय होने की प्रक्रिया होगी — झारखंड के मुख्यमंत्री के लिए यह कानूनी मोर्चे पर बड़ा झटका है।

मुख्य बातें

रांची की विशेष PMLA अदालत ने 21 सितंबर 2026 को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ट्रायल स्थगित करने की अर्जी आधारहीन बताते हुए खारिज की।
अगली सुनवाई और आरोप-निर्धारण की प्रक्रिया 24 सितंबर को शाम 3.30 बजे निर्धारित।
मामला कथित 8.86 एकड़ जमीन की अनियमित खरीद-बिक्री और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।
ईडी के विशेष लोक अभियोजक ने अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि सुनवाई जानबूझकर टाली जा रही है।
सोरेन की डिस्चार्ज याचिका और उच्च न्यायालय में स्थगन की अर्जी पहले ही खारिज हो चुकी है।
तकनीकी खराबी के कारण सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सोरेन की अदालती उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 21 सितंबर 2026 को रांची की विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत से बड़ा झटका लगा, जब अदालत ने कथित जमीन घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुकदमे की सुनवाई तथा आरोप तय करने की प्रक्रिया स्थगित करने संबंधी उनकी अर्जी को आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने अगली सुनवाई और आरोप-निर्धारण की प्रक्रिया के लिए 24 सितंबर को शाम 3.30 बजे की तारीख तय की है।

अर्जी में क्या था तर्क

सोरेन के अधिवक्ता ने अर्जी में दलील दी थी कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मामले में आगे की जाँच और पूरक शिकायत दाखिल करने की अनुमति माँगी है। इसलिए जब तक जाँच पूरी न हो जाए, तब तक आगे की कार्रवाई और आरोप तय करने की प्रक्रिया रोकी जाए। अधिवक्ता ने इस सिलसिले में सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला भी दिया, जिसमें कहा गया था कि जाँच जारी रहने की स्थिति में ट्रायल शुरू नहीं होना चाहिए।

ईडी का पक्ष और अदालत का फैसला

ईडी के विशेष लोक अभियोजक ने अर्जी का कड़ा विरोध करते हुए अदालत को बताया कि सुनवाई जानबूझकर टालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सोरेन की डिस्चार्ज याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है और उच्च न्यायालय ने भी मामले की आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रांची सिविल कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (एजेसी-प्रथम) ने अर्जी खारिज करते हुए कहा कि मामले में आगे की जाँच जारी रहने और पूरक शिकायत दाखिल किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि मौजूदा मुकदमे की सुनवाई रोक दी जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून के तहत मूल शिकायत दाखिल होने के बाद भी आगे की जाँच हो सकती है और बाद में दाखिल पूरक शिकायत को उसी मामले का हिस्सा माना जाता है।

दस्तावेज़ों पर अदालत का निर्देश

अदालत ने ईडी को यह भी निर्देश दिया कि वह मामले में पहले उपलब्ध कराए गए ऐसे दस्तावेजों की सूची दोबारा प्रस्तुत करे, जिन पर अभियोजन पक्ष अपनी दलीलें आधारित नहीं कर रहा है। गौरतलब है कि सोमवार को तकनीकी खराबी के चलते वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हेमंत सोरेन की अदालत में उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला रांची में कथित 8.86 एकड़ जमीन की अनियमित खरीद-बिक्री और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से संबंधित है। ईडी ने इस मामले में हेमंत सोरेन सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है। यह ऐसे समय में आया है जब सोरेन झारखंड की सत्ता में हैं और इस मामले में अदालत में आरोप अभी तय होने बाकी हैं।

आगे क्या होगा

24 सितंबर 2026 को विशेष पीएमएलए अदालत में आरोप-निर्धारण की प्रक्रिया पर सुनवाई होगी। इस सुनवाई के नतीजे इस बात का निर्धारण करेंगे कि मुकदमे का औपचारिक संचालन किस दिशा में आगे बढ़ेगा। आलोचकों का कहना है कि यह मामला झारखंड की राजनीति और कानून-व्यवस्था दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण मोड़ पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह सवाल झारखंड की राजनीति में केंद्रीय बन सकता है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हेमंत सोरेन का जमीन घोटाला मामला क्या है?
यह मामला रांची में कथित 8.86 एकड़ जमीन की अनियमित खरीद-बिक्री और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से संबंधित है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में हेमंत सोरेन सहित कई लोगों के खिलाफ PMLA के तहत जाँच और कार्रवाई की है।
PMLA अदालत ने सोरेन की अर्जी क्यों खारिज की?
अदालत ने कहा कि आगे की जाँच जारी रहने और पूरक शिकायत दाखिल होने का अर्थ यह नहीं है कि मौजूदा मुकदमे की सुनवाई रोकी जाए। कानून के तहत मूल शिकायत के बाद भी जाँच हो सकती है और पूरक शिकायत उसी मामले का हिस्सा मानी जाती है।
24 सितंबर को अदालत में क्या होगा?
24 सितंबर 2026 को शाम 3.30 बजे रांची की विशेष PMLA अदालत में आरोप-निर्धारण की प्रक्रिया पर सुनवाई होगी। इस सुनवाई में यह तय किया जाएगा कि हेमंत सोरेन पर औपचारिक रूप से कौन-से आरोप लगाए जाएँगे।
सोरेन की पिछली कानूनी कोशिशों का क्या हुआ?
सोरेन की डिस्चार्ज याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है और उच्च न्यायालय ने भी मामले की आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। 21 सितंबर को ट्रायल टालने की यह तीसरी प्रमुख कानूनी कोशिश भी विफल रही।
ईडी ने अदालत में क्या तर्क दिया?
ईडी के विशेष लोक अभियोजक ने तर्क दिया कि सुनवाई जानबूझकर टाली जा रही है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि डिस्चार्ज याचिका खारिज हो चुकी है और उच्च न्यायालय ने भी स्थगन देने से इनकार किया था, इसलिए अर्जी स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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