30 सितंबर 2026
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हेमंत सोरेन को झारखंड हाई कोर्ट से राहत नहीं, 8.86 एकड़ भूमि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में PMLA कोर्ट में पेशी तय

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हेमंत सोरेन को झारखंड हाई कोर्ट से राहत नहीं, 8.86 एकड़ भूमि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में PMLA कोर्ट में पेशी तय

सारांश

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 8.86 एकड़ भूमि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। अदालत ने ईडी को पूरक शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को तय की। सोरेन को अब स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में भी पेश होना होगा।

मुख्य बातें

झारखंड उच्च न्यायालय ने 30 सितंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 8.86 एकड़ भूमि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तत्काल राहत देने से इनकार किया।
ईडी को पूरक शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश; प्रति संबंधित पक्ष को 20 अक्टूबर तक देनी होगी।
मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश एम.एस.
सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद की खंडपीठ के समक्ष होगी।
सोरेन ने स्पेशल पीएमएलए अदालत के 21 सितंबर के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसने आरोप गठन प्रक्रिया पर रोक लगाने की माँग अस्वीकार की थी।
हाई कोर्ट से राहत न मिलने के कारण हेमंत सोरेन को स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में पेश होना होगा।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 30 सितंबर को झारखंड उच्च न्यायालय से तत्काल कोई राहत नहीं मिली, जब रांची के बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ भूमि से जुड़े कथित धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में उनकी आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पूरक शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 28 अक्टूबर के लिए निर्धारित कर दी।

मामले का पृष्ठभूमि और मूल विवाद

यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल में 8.86 एकड़ भूमि से जुड़े कथित अनियमितताओं और धनशोधन की जाँच से संबंधित है। ईडी की जाँच में भूमि दस्तावेजों में कथित हेरफेर और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की जा रही है। ये आरोप अभी जाँच एजेंसी के मामले का हिस्सा हैं और न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

हाई कोर्ट में सुनवाई का घटनाक्रम

मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने स्पेशल पीएमएलए अदालत के 21 सितंबर के आदेश को चुनौती देने वाली हेमंत सोरेन की याचिका पर सुनवाई की। उस आदेश में निचली अदालत ने ईडी की जाँच पूरी होने तक आरोप तय करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की माँग को अस्वीकार कर दिया था, जिससे आरोप गठन का रास्ता साफ हो गया था।

सुनवाई के दौरान याचिका की 'मेंटेनेबिलिटी' (विचारणीयता) का प्रश्न भी उठा। ईडी की ओर से इस कानूनी आधार पर आपत्ति दर्ज कराई गई, जिसके बाद अदालत ने एजेंसी को अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए पूरक शपथपत्र दाखिल करने को कहा। शपथपत्र की प्रति संबंधित पक्ष को 20 अक्टूबर तक उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

दोनों पक्षों की कानूनी दलीलें

हेमंत सोरेन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस. नागामुथु ने पक्ष प्रस्तुत किया। वहीं ईडी की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू, वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने दलीलें पेश कीं। दोनों पक्षों की बहस के बाद अदालत ने अगली तारीख तय करते हुए आदेश सुरक्षित रख लिया।

आगे की न्यायिक प्रक्रिया

हाई कोर्ट से तत्काल राहत न मिलने के कारण हेमंत सोरेन को स्पेशल पीएमएलए अदालत में भी पेश होना होगा। इस मामले में आगे की दिशा दो मोर्चों पर निर्भर करेगी — 28 अक्टूबर को झारखंड उच्च न्यायालय में होने वाली अगली सुनवाई और निचली अदालत में जारी आरोप गठन की प्रक्रिया। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में राजनीतिक हलचल तेज है और सोरेन सरकार पर विपक्षी दलों का दबाव लगातार बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सोरेन के कानूनी पक्ष के लिए शुभ संकेत नहीं। आलोचकों का कहना है कि ईडी जाँच और समानांतर राजनीतिक दबाव का यह संयोजन झारखंड में शासन की स्थिरता पर दीर्घकालिक प्रश्नचिह्न लगाता है — और मुख्यधारा की कवरेज इस पहलू को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हेमंत सोरेन के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामला क्या है?
यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल में 8.86 एकड़ भूमि से जुड़े कथित अनियमितताओं और धनशोधन की ईडी जाँच से संबंधित है। जाँच एजेंसी का आरोप है कि भूमि दस्तावेजों में हेरफेर कर अवैध वित्तीय लेन-देन किया गया।
झारखंड हाई कोर्ट ने हेमंत सोरेन को राहत क्यों नहीं दी?
हाई कोर्ट ने याचिका की 'मेंटेनेबिलिटी' पर ईडी की आपत्ति के बाद एजेंसी को पूरक शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को तय की। तत्काल राहत देने के बजाय अदालत ने दोनों पक्षों की पूरी दलीलें सुनने का निर्णय लिया।
स्पेशल पीएमएलए कोर्ट का 21 सितंबर का आदेश क्या था?
स्पेशल पीएमएलए अदालत ने 21 सितंबर को हेमंत सोरेन की वह माँग खारिज कर दी थी जिसमें ईडी जाँच पूरी होने तक उनके खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की अपील की गई थी। इसी आदेश को सोरेन ने झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
झारखंड उच्च न्यायालय में अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित है। इससे पहले ईडी को 20 अक्टूबर तक पूरक शपथपत्र की प्रति संबंधित पक्ष को उपलब्ध करानी होगी।
हेमंत सोरेन को अब आगे क्या करना होगा?
हाई कोर्ट से तत्काल राहत न मिलने के कारण हेमंत सोरेन को स्पेशल पीएमएलए अदालत में पेश होना होगा। इसके साथ ही हाई कोर्ट में 28 अक्टूबर की सुनवाई पर भी उनकी कानूनी टीम की नज़र रहेगी, जहाँ याचिका की विचारणीयता पर निर्णय होना है।
राष्ट्र प्रेस
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