हेमंत सोरेन PMLA कोर्ट में नहीं हुए पेश, 21 सितंबर को व्यक्तिगत या वर्चुअल हाज़िरी का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 19 सितंबर 2026 को रांची की विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए। यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ ज़मीन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग का है, जिसकी जाँच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रही है। उनके अधिवक्ता ने अदालत में आवेदन देकर बताया कि मुख्यमंत्री पूर्व-निर्धारित संवैधानिक दायित्वों में व्यस्त हैं।
अदालत का आदेश
विशेष पीएमएलए अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 21 सितंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है। अदालत ने सीएम सोरेन को 21 सितंबर को शाम 4 बजे व्यक्तिगत रूप से अथवा वर्चुअल माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया है। यह सुनवाई उस पृष्ठभूमि में हो रही है जिसमें झारखंड उच्च न्यायालय ने 18 सितंबर को उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज करने वाले निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा था।
हाईकोर्ट का निर्णय और पृष्ठभूमि
झारखंड उच्च न्यायालय ने 18 सितंबर 2026 को हेमंत सोरेन को इस मामले में राहत देने से इनकार किया। अदालत ने रांची की विशेष पीएमएलए अदालत द्वारा डिस्चार्ज याचिका खारिज करने के आदेश को बरकरार रखते हुए निचली अदालत में कार्यवाही के लिए रास्ता साफ कर दिया। गौरतलब है कि 16 सितंबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखा था।
इससे पूर्व, रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने 8 जून 2026 को हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका खारिज की थी। अदालत ने उस समय कहा था कि उपलब्ध सामग्री प्रथम दृष्टया आरोपों पर आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त है। हेमंत सोरेन ने उसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और निचली अदालत में कार्यवाही पर रोक लगाने की माँग भी की थी।
मामले का मूल विवाद
प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ ज़मीन से संबंधित दस्तावेजों और प्रक्रियाओं में फर्जीवाड़ा किया गया तथा कथित अवैध तरीके से ज़मीन हासिल की गई। एजेंसी ने सीएम हेमंत सोरेन सहित करीब 18 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है। विशेष अदालत कई अन्य आरोपियों के खिलाफ पहले ही आरोप गठित कर चुकी है।
यह ऐसे समय में आया है जब ईडी के अनुसार जाँच के दौरान सामने आए दस्तावेज, गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्य प्रथम दृष्टया मामला बनाते हैं। हालाँकि, इस स्तर पर किसी प्रकार के दोषसिद्धि का निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।
सीएम सोरेन का पक्ष
हेमंत सोरेन की ओर से आरोपों को खारिज करते हुए कहा गया है कि उनके विरुद्ध पर्याप्त प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। उनके अधिवक्ता लगातार कानूनी प्रक्रिया के हर चरण पर न्यायालय में अपना पक्ष रखते रहे हैं।
आगे क्या होगा
अब सबकी निगाहें 21 सितंबर 2026 की सुनवाई पर टिकी हैं, जब मुख्यमंत्री को शाम 4 बजे उपस्थित होना है। यदि वे इस बार भी पेश नहीं होते, तो अदालत अगले कदम के संबंध में कोई निर्देश दे सकती है। मामले का अगला घटनाक्रम झारखंड की राजनीति पर भी प्रभाव डाल सकता है।