18 सितंबर 2026
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हेमंत सोरेन को झारखंड हाई कोर्ट से झटका: 8.86 एकड़ जमीन मनी लॉन्ड्रिंग केस में डिस्चार्ज याचिका खारिज

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हेमंत सोरेन को झारखंड हाई कोर्ट से झटका: 8.86 एकड़ जमीन मनी लॉन्ड्रिंग केस में डिस्चार्ज याचिका खारिज

सारांश

झारखंड हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की याचिका खारिज कर दी — अब 19 सितंबर को PMLA अदालत में आरोप गठन की सुनवाई होगी। 8.86 एकड़ जमीन घोटाले में ED के सामने एक सिटिंग सीएम की कानूनी लड़ाई और गहरी होती जा रही है।

मुख्य बातें

झारखंड हाई कोर्ट ने 18 सितंबर 2026 को हेमंत सोरेन की हस्तक्षेप याचिका खारिज की।
रांची के बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में निचली अदालत का आदेश बरकरार।
विशेष पीएमएलए अदालत में आरोप गठन की सुनवाई 19 सितंबर को निर्धारित; सोरेन को उपस्थित होना होगा।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हेमंत सोरेन सहित करीब 18 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज की है।
पीएमएलए अदालत अंतू तिर्की और विनोद कुमार सिंह सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ पहले ही आरोप गठित कर चुकी है।
विशेष अदालत ने 8 जून को डिस्चार्ज याचिका खारिज करते हुए कहा था कि रिकॉर्ड पर प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री है।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 18 सितंबर 2026 को झारखंड हाई कोर्ट से बड़ा न्यायिक झटका लगा है। रांची के बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अदालत ने निचली अदालत द्वारा डिस्चार्ज पिटीशन खारिज करने के आदेश को बरकरार रखा और सोरेन की हस्तक्षेप याचिका को अस्वीकार कर दिया। इस फैसले के साथ ही रांची की विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत में आरोप गठन की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है।

मुख्य घटनाक्रम

विशेष पीएमएलए अदालत, रांची ने 8 जून को हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री प्रथम दृष्टया मामला बनाए जाने के लिए पर्याप्त है। सोरेन ने इस आदेश को झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी थी और निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने की माँग भी की थी।

16 सितंबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए अदालत ने याचिका खारिज कर दी, जिससे निचली अदालत की आरोप-गठन प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगी।

मामले की पृष्ठभूमि

प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि रांची के बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और हस्तांतरण में फर्जी दस्तावेजों और अन्य अनियमित प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया गया। ईडी ने इस मामले में हेमंत सोरेन सहित करीब 18 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है।

गौरतलब है कि इसी मामले में विशेष पीएमएलए अदालत पहले ही अंतू तिर्की, आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह और कई अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप गठित कर चुकी है।

दोनों पक्षों की दलीलें

बचाव पक्ष ने निचली अदालत में दायर डिस्चार्ज याचिका में तर्क दिया था कि हेमंत सोरेन के खिलाफ कोई पर्याप्त प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं हैं और ईडी की ओर से पेश कुछ बयान तथा परिस्थितिजन्य साक्ष्य विश्वसनीय नहीं हैं।

वहीं, ईडी ने अदालत में कहा था कि जाँच के दौरान सामने आए दस्तावेज, गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्य मिलकर प्रथम दृष्टया आधार बनाते हैं। एजेंसी की दलील थी कि इस प्रारंभिक चरण में साक्ष्यों की विस्तृत जाँच नहीं होती — यह प्रक्रिया मुकदमे के दौरान की जाती है। अदालत ने भी अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि इस स्तर पर आरोपी की दोषसिद्धि तय नहीं की जा रही।

आगे क्या होगा

पीएमएलए अदालत में हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप गठन की सुनवाई के लिए 19 सितंबर की तारीख पहले से निर्धारित है, जिसमें उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। हाई कोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब उनके खिलाफ भी उसी तरह आरोप गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है जैसी अन्य आरोपियों के मामले में हो चुकी है। यह मामला झारखंड की राजनीति और ईडी की जाँच प्रक्रिया दोनों के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मामला इसलिए अलग है क्योंकि पीएमएलए के तहत आरोप गठन की दहलीज अपेक्षाकृत ऊँची मानी जाती है। सवाल यह है कि क्या झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) नेतृत्व और सत्तारूढ़ गठबंधन इस दबाव में प्रशासनिक स्थिरता बनाए रख पाएगा। 19 सितंबर की सुनवाई न केवल कानूनी, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी निर्णायक होगी।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड हाई कोर्ट ने हेमंत सोरेन की याचिका क्यों खारिज की?
हाई कोर्ट ने पाया कि रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने डिस्चार्ज याचिका खारिज करने में कोई कानूनी त्रुटि नहीं की। अदालत के अनुसार, रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेज, गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्य प्रथम दृष्टया मामला बनाने के लिए पर्याप्त हैं।
बड़गाईं जमीन मनी लॉन्ड्रिंग केस क्या है?
यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और हस्तांतरण से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस जमीन से जुड़े लेन-देन में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और यह धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनता है।
हेमंत सोरेन के मामले में आगे क्या होगा?
रांची की विशेष पीएमएलए अदालत में 19 सितंबर 2026 को आरोप गठन की सुनवाई निर्धारित है, जिसमें हेमंत सोरेन को उपस्थित होना होगा। हाई कोर्ट से राहत न मिलने के बाद उनके खिलाफ आरोप गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है।
इस मामले में कितने आरोपी हैं और किन पर पहले आरोप गठित हो चुके हैं?
ईडी ने इस मामले में हेमंत सोरेन सहित करीब 18 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है। विशेष पीएमएलए अदालत अंतू तिर्की, आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह और कई अन्य आरोपियों के खिलाफ पहले ही आरोप गठित कर चुकी है।
क्या डिस्चार्ज याचिका खारिज होने का मतलब है कि हेमंत सोरेन दोषी हैं?
नहीं। विशेष पीएमएलए अदालत ने स्वयं स्पष्ट किया था कि डिस्चार्ज याचिका खारिज करने का अर्थ आरोपी की दोषसिद्धि तय करना नहीं है। यह केवल यह संकेत देता है कि मामले में प्रथम दृष्टया मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है; दोष या निर्दोषता का निर्णय ट्रायल के दौरान होगा।
राष्ट्र प्रेस
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