केरल में 'नॉलेज वैली' और 'रिसर्च पार्क' की तैयारी, उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन ने की घोषणा
सारांश
मुख्य बातें
केरल सरकार राज्य को वैश्विक ज्ञान केंद्र बनाने की दिशा में 'नॉलेज वैली' और 'रिसर्च पार्क' स्थापित करने जा रही है। उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन ने 18 सितंबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में आयोजित एक गोलमेज बैठक में यह घोषणा की। यह परियोजना केरल की मौजूदा शैक्षणिक और शोध अवसंरचना को आधार बनाकर निजी क्षेत्र एवं अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों की भागीदारी के साथ आगे बढ़ाई जाएगी।
'रीइमेजिनिंग केरलम' में हुई चर्चा
यह प्रस्ताव तीन दिवसीय 'रीइमेजिनिंग केरलम' कार्यक्रम के अंतिम दिन आयोजित गोलमेज बैठक में सामने आया। चर्चा का नेतृत्व उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन और उच्च शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव बी. अशोक ने किया। बैठक में विश्वविद्यालयों, रिसर्च संस्थानों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
मंत्री रोजी एम. जॉन ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना महज एक नया संस्थान खड़ा करने की कोशिश नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य एक ऐसा समन्वित मंच तैयार करना है जो शिक्षा, रिसर्च, उद्योग और वैश्विक अवसरों को एक सूत्र में पिरोए। उनके अनुसार, केरल की रिसर्च क्षमता को व्यावसायिक रूप देकर युवाओं के लिए रोज़गार और उद्यमिता के नए अवसर उत्पन्न किए जा सकते हैं।
रिसर्च पार्क की मुख्य विशेषताएँ
प्रस्तावित रिसर्च पार्क में उद्योगों के साथ सुदृढ़ सहयोग पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा। यहाँ साझा अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ, उत्कृष्टता केंद्र और प्रोटोटाइप विकास की सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और नवीनतम तकनीक के व्यावसायिक विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा।
बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र को उद्योग-रिसर्च साझेदारी के लिए सबसे संभावनाशील क्षेत्र बताया गया। प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि पीएचडी कार्यक्रमों में पारंपरिक शोध प्रबंध-केंद्रित दृष्टिकोण से हटकर वास्तविक जीवन की समस्याओं और उद्योग-प्रासंगिक शोध को प्राथमिकता दी जाए।
नॉलेज ऑडिट और AI का प्रस्ताव
बैठक में एक महत्त्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि केरल में बड़ी मात्रा में शैक्षणिक शोध अनुपयोगी पड़ा है। इसके समाधान के रूप में पोस्ट ग्रेजुएट स्तर के शोध प्रबंधों की व्यवस्थित समीक्षा का प्रस्ताव रखा गया। प्रारंभिक छँटाई के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करने और फिर विशेषज्ञों द्वारा गहन मूल्यांकन कराने की बात कही गई। सेवानिवृत्त प्राध्यापकों को भी इस समीक्षा प्रक्रिया में शामिल करने का सुझाव आया।
इसके अलावा, केरल के रिसर्च संस्थानों, विशेषज्ञता, बुनियादी ढाँचे और बौद्धिक संपदा का व्यापक 'नॉलेज ऑडिट' कराने का प्रस्ताव भी दिया गया। गौरतलब है कि केरल में अंतरिक्ष, कृषि और खनिज सहित विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले करीब 47 रिसर्च संस्थान हैं, जिन्हें प्रस्तावित नॉलेज नेटवर्क से जोड़ा जा सकता है।
केंद्र सरकार की योजना से जुड़ाव की संभावना
नॉलेज वैली को केंद्र सरकार के यूनिवर्सिटी टाउनशिप कार्यक्रम से भी जोड़ने की संभावना तलाशी जा रही है। इसके तहत देश-विदेश के विश्वविद्यालयों को साझा प्रयोगशालाओं और सुविधाओं के साथ एक मंच पर लाने की परिकल्पना है। साथ ही एक ग्लोबल वर्चुअल क्लासरूम स्थापित करने का विचार भी प्रस्तुत किया गया, जो केरल की उच्च शिक्षा को वैश्विक नेटवर्क से जोड़ेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्य शोध-से-उद्योग पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की होड़ में हैं और केरल अपनी साक्षरता व शोध परंपरा का आर्थिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले महीनों में इस परियोजना की रूपरेखा और क्रियान्वयन योजना सामने आने की उम्मीद है।