रीइमैजिनिंग केरलम: सतीशन कैबिनेट ने आईआईएमके में केरल के अगले दशक की रणनीति पर किया मंथन
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के नेतृत्व में केरल मंत्रिमंडल ने 5 सितंबर 2025 को भारतीय प्रबंधन संस्थान, कोझिकोड (आईआईएमके) में आयोजित दो दिवसीय रणनीतिक कार्यशाला 'रीइमैजिनिंग केरलम' में भाग लिया, जिसका उद्देश्य राज्य की अगले एक दशक की विकास रणनीति और नीतिगत प्राथमिकताओं को नए सिरे से परिभाषित करना है। 4 सितंबर को शुरू हुई यह कार्यशाला आईआईएमके के मैनेजमेंट डेवलपमेंट सेंटर में आयोजित की गई, जो शनिवार को संपन्न होगी।
कार्यशाला का स्वरूप और उद्देश्य
यह पहल पारंपरिक प्रशासनिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों से भिन्न है। इसमें नीति-निर्माताओं को शिक्षाविदों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद का अवसर मिला, ताकि दीर्घकालिक संरचनात्मक चुनौतियों की पड़ताल की जा सके। मुख्यमंत्री सतीशन ने शुक्रवार को पारंपरिक दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
कार्यशाला में मंत्रिपरिषद के सदस्यों के अलावा राज्य के मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के सचिव, विशेष कार्याधिकारी और राज्य प्रोटोकॉल अधिकारी भी शामिल हुए।
पहले दिन के प्रमुख विषय
पहले दिन की चर्चा केरल के सामने उपस्थित कुछ सबसे बड़े संरचनात्मक बदलावों पर केंद्रित रही — आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), बढ़ती उम्र वाली आबादी, जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, रोज़गार और अर्थव्यवस्था का बदलता स्वरूप। चर्चाओं में रोज़गार, उद्यमिता, कौशल विकास, उच्च शिक्षा, वित्तीय क्षेत्र, पलायन, रेमिटेंस और केरल की वैश्विक ब्रांडिंग जैसे विषय भी शामिल रहे।
चर्चा के एक प्रमुख बिंदु के रूप में केरल को हेल्थ और वेलनेस हब के रूप में स्थापित करने की संभावना सामने आई। साथ ही तेज़ी से बढ़ती उम्र वाली आबादी की आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए एक विशेष 'सिल्वर इकोनॉमी मिशन' के विचार पर भी विचार-विमर्श किया गया।
विशेषज्ञ कौन हैं
आईआईएमके के निदेशक प्रो. देबाशीष चटर्जी ने एआई के दौर में परिवर्तनकारी नेतृत्व विषय पर उद्घाटन सत्र का संचालन किया। नारायण हेल्थ के संस्थापक डॉ. देवी शेट्टी सार्वजनिक स्वास्थ्य के भविष्य पर एक सत्र में भाग लेंगे। जापान की केइओ यूनिवर्सिटी के प्रो. राजीव शॉ और किंग्स कॉलेज लंदन के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संचयन बनर्जी भी अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के रूप में सत्रों में हिस्सा ले रहे हैं।
केरल के सामने दोहरी चुनौती
यह कार्यशाला ऐसे समय में आयोजित हो रही है जब केरल एक साथ दो परस्पर विरोधी लक्ष्यों को साधने की कोशिश कर रहा है — एक ओर ज्ञान-आधारित और प्रौद्योगिकी-सक्षम अर्थव्यवस्था बनाना, और दूसरी ओर बढ़ती उम्र वाली आबादी, जलवायु जोखिमों, पलायन के बदलते स्वरूप और बढ़ते वित्तीय दबावों से निपटना। गौरतलब है कि केरल में प्रवासी रेमिटेंस राज्य की अर्थव्यवस्था की एक महत्वपूर्ण धुरी है, और इसमें किसी भी बदलाव का असर व्यापक होगा।
आगे क्या उम्मीद है
'रीइमैजिनिंग केरलम' से ऐसे नीतिगत विचार और दिशा-निर्देश मिलने की उम्मीद है जो सरकार को तात्कालिक प्रशासनिक चुनौतियों से आगे बढ़कर संरचनात्मक बदलावों से निपटने में सहायता करें। संभावित नीतिगत उपायों की पहचान के लिए वैश्विक अनुभवों और साक्ष्य-आधारित तरीकों का उपयोग किए जाने की उम्मीद है। कार्यशाला का समापन शनिवार, 6 सितंबर को होगा, जिसके बाद कैबिनेट और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक साझा दीर्घकालिक दृष्टिकोण उभरने की संभावना है।