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केरल उद्योग मंत्री कुन्हालीकुट्टी का निवेशकों को भरोसा: नीतियाँ रहेंगी स्थिर, दुबई-लंदन में खुलेंगे 'केरल डेस्क'

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केरल उद्योग मंत्री कुन्हालीकुट्टी का निवेशकों को भरोसा: नीतियाँ रहेंगी स्थिर, दुबई-लंदन में खुलेंगे 'केरल डेस्क'

सारांश

सरकार बदली, लेकिन केरल के उद्योग मंत्री कुन्हालीकुट्टी का संदेश साफ है — नीतियाँ नहीं बदलेंगी। दुबई से टोक्यो तक 'केरल डेस्क', निवेश सलाहकार परिषद और 'इन्वेस्ट केरल सेल' के साथ राज्य रेमिटेंस-निर्भरता से निवेश-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बड़ा कदम उठा रहा है।

मुख्य बातें

उद्योग मंत्री पी.के.
कुन्हालीकुट्टी ने 28 जुलाई को तिरुवनंतपुरम में KSIDC की बैठक में निवेशकों को नीतिगत स्थिरता का भरोसा दिलाया।
100-दिवसीय कार्यक्रम के तहत निवेश सलाहकार परिषद , इन्वेस्ट केरल सेल और केरल डेस्क की स्थापना की घोषणा।
दुबई, लंदन, न्यूयॉर्क, सिंगापुर और टोक्यो में प्रस्तावित विदेशी केरल डेस्क वैश्विक — विशेषकर मलयाली प्रवासी — निवेश आकर्षित करेंगे।
सरकार केरल को रेमिटेंस-निर्भर से निवेश-आधारित अर्थव्यवस्था में बदलने का लक्ष्य रख रही है।
उद्योग जगत ने भूमि बैंक , KSIDC को वैधानिक दर्जा , K-SWIFT पोर्टल सुधार और श्रम संहिता पर स्पष्टता की माँग की।

केरल के उद्योग मंत्री पी.के. कुन्हालीकुट्टी ने मंगलवार, 28 जुलाई को तिरुवनंतपुरम में उद्योग जगत के नेताओं के साथ बैठक में स्पष्ट किया कि राज्य की औद्योगिक नीतियाँ सरकार बदलने के बावजूद अटूट रहेंगी। उन्होंने कहा, 'सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन नीतियाँ बनी रहती हैं।' यह बैठक केरल राज्य औद्योगिक विकास निगम (KSIDC) द्वारा आयोजित की गई थी।

मुख्य घोषणाएँ और 100-दिवसीय कार्यक्रम

मंत्री ने बताया कि सरकार अपने 100-दिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत तीन प्रमुख पहलें शुरू करेगी। पहली — मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में निवेश सलाहकार परिषद; दूसरी — KSIDC के तहत 'इन्वेस्ट केरल सेल'; और तीसरी — वैश्विक निवेश आकर्षित करने के लिए प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में 'केरल डेस्क' की स्थापना। कुन्हालीकुट्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि 'इन्वेस्ट केरल' पहल के तहत घोषित सभी परियोजनाएँ योजना के अनुसार जारी रहेंगी।

वैश्विक 'केरल डेस्क': पाँच शहरों में नेटवर्क

प्रस्तावित विदेशी केरल डेस्क दुबई, लंदन, न्यूयॉर्क, सिंगापुर और टोक्यो में स्थापित किए जाएँगे। इनका मुख्य उद्देश्य वैश्विक निवेश — विशेष रूप से मलयाली प्रवासी समुदाय से — को केरल की ओर आकर्षित करना है। यह ऐसे समय में आया है जब केरल अपनी रेमिटेंस-निर्भर अर्थव्यवस्था को निवेश-आधारित अर्थव्यवस्था में बदलने की दिशा में काम कर रहा है।

व्यापारिक माहौल और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस'

कुन्हालीकुट्टी ने कहा कि बेहतर तकनीक और बुनियादी ढाँचे के कारण निवेशकों की शिकायतों में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' सुधारों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का वादा किया। मंत्री ने कहा, 'केरल को अब कारोबार शुरू करने और निवेश करने के लिए सबसे उपयुक्त जगहों में से एक माना जाता है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि सूचना प्रौद्योगिकी और उभरते क्षेत्रों में कौशल विकास को और मजबूत किया जाए, तो केरल भारत के सबसे महत्वपूर्ण निवेश स्थलों में से एक बन सकता है।

राजनीतिक तटस्थता का संकल्प

उद्यमियों को भरोसा दिलाते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक संबद्धता की परवाह किए बिना निवेश का स्वागत किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'चाहे वे सत्ताधारी पार्टी के समर्थकों की ओर से हों या विपक्ष की ओर से — निवेश का स्वागत किया जाएगा।' गौरतलब है कि नई पहलों को कार्यकारी आदेशों और विधायी उपायों के ज़रिए अंतिम रूप देने से पहले उद्योग जगत की राय भी शामिल की जाएगी।

उद्योग जगत की माँगें

बैठक में उद्योग नेताओं ने कई सुधारों की माँग रखी — इनमें राज्य भूमि बैंक की स्थापना, KSIDC को वैधानिक दर्जा, समयबद्ध नियामक मंज़ूरी, K-SWIFT पोर्टल में सुधार, श्रम संहिता (Labour Code) के कार्यान्वयन पर स्पष्टता और लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाना शामिल हैं। इन माँगों का समावेश नीति-निर्माण में किया जाएगा या नहीं, यह आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन केरल में नीतिगत निरंतरता की असली परीक्षा हमेशा कार्यान्वयन में हुई है — न कि घोषणाओं में। राज्य दशकों से श्रम कानूनों और भूमि अधिग्रहण की जटिलताओं के कारण बड़े औद्योगिक निवेश से चूकता रहा है, और उद्योग जगत की माँगों की सूची यही दर्शाती है कि ज़मीनी बाधाएँ अभी भी बरकरार हैं। विदेशी केरल डेस्क का विचार नया नहीं है — असली सवाल यह है कि क्या इस बार इन्हें मापने योग्य निवेश लक्ष्यों से जोड़ा जाएगा। रेमिटेंस से निवेश-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव तब तक अधूरा रहेगा, जब तक KSIDC को वैधानिक दर्जा और नियामक मंज़ूरी में पारदर्शिता जैसी बुनियादी माँगें पूरी नहीं होतीं।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल उद्योग मंत्री कुन्हालीकुट्टी ने निवेशकों को क्या आश्वासन दिया?
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार बदलने के बावजूद केरल की औद्योगिक नीतियाँ स्थिर रहेंगी और 'इन्वेस्ट केरल' पहल के तहत सभी परियोजनाएँ योजनानुसार जारी रहेंगी। उन्होंने कहा, 'सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन नीतियाँ बनी रहती हैं।'
'केरल डेस्क' क्या है और यह कहाँ स्थापित होगा?
'केरल डेस्क' प्रमुख वैश्विक व्यापारिक केंद्रों में स्थापित किए जाने वाले कार्यालय हैं जो विदेशी और प्रवासी मलयाली निवेश को केरल की ओर आकर्षित करेंगे। ये दुबई, लंदन, न्यूयॉर्क, सिंगापुर और टोक्यो में प्रस्तावित हैं।
केरल सरकार के 100-दिवसीय कार्यक्रम में उद्योग के लिए क्या है?
100-दिवसीय कार्यक्रम के तहत तीन पहलें शुरू होंगी — मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में निवेश सलाहकार परिषद, KSIDC के तहत 'इन्वेस्ट केरल सेल', और पाँच वैश्विक शहरों में 'केरल डेस्क'। इन पहलों को अंतिम रूप देने से पहले उद्योग जगत की राय भी ली जाएगी।
उद्योग जगत ने केरल सरकार से क्या माँगें रखीं?
उद्योग नेताओं ने राज्य भूमि बैंक की स्थापना, KSIDC को वैधानिक दर्जा, समयबद्ध नियामक मंज़ूरी, K-SWIFT पोर्टल में सुधार, श्रम संहिता पर स्पष्टता और लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाने की माँग की।
केरल किस तरह की अर्थव्यवस्था बनाना चाहता है?
केरल सरकार राज्य को विदेशों से आने वाली कमाई (रेमिटेंस) पर निर्भर अर्थव्यवस्था से बदलकर निवेश-आधारित अर्थव्यवस्था बनाना चाहती है। इसके लिए व्यापक निवेश इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है जिसमें वैश्विक और घरेलू दोनों निवेशकों को आकर्षित करने की रणनीति शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
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