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क्या केरल के सीएम ने केंद्र सरकार पर वित्तीय फंड को लेकर गंभीर आरोप लगाए?

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क्या केरल के सीएम ने केंद्र सरकार पर वित्तीय फंड को लेकर गंभीर आरोप लगाए?

सारांश

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इसके निर्णय राज्य की वित्तीय स्वतंत्रता को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने राज्य के विकास में बाधाएं उत्पन्न करने की बात की है। क्या यह आरोप केंद्र की नीतियों पर एक गंभीर सवाल उठाते हैं?

मुख्य बातें

केंद्र सरकार पर केरल की वित्तीय स्वतंत्रता को सीमित करने का आरोप राज्य की उधारी सीमा को लेकर विवादित निर्णय मुख्यमंत्री का विकास एजेंडा जारी रखने का संकल्प

तिरुवनंतपुरम, 24 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने केंद्र सरकार पर राज्य की वित्तीय स्वतंत्रता को सीमित करने और उसके विकास प्रयासों को कमजोर करने का आरोप लगाया है।

मुख्यमंत्री ने बुधवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में राज्य की पूंजीगत खर्च योजनाओं के लिए लगातार अवरोध पैदा किया गया है। उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण कदम के रूप में 2021-22 से केरल इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड के ऋणों को राज्य के कर्ज़ में शामिल करके राज्य की उधारी सीमा को पीछे से कम करने का जिक्र किया।

विजयन ने कहा, “1999 से ही रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने गारंटी और ऋण के बीच अंतर किया है, लेकिन केंद्र का केरल की उधारी सीमा को लेकर दृष्टिकोण इस सिद्धांत के विपरीत है। केरल इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड गारंटियों को राज्य के कर्ज में गिनना गलत है और हमारी उधारी क्षमता को काफी कम कर रहा है।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि कई बार अनुरोध और एक विस्तृत ज्ञापन 9 अक्टूबर को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंपने के बावजूद राज्य की कई जायज मांगों पर अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “केंद्र विकास की बातें करता है, लेकिन साथ ही केरल जैसे राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर करने के प्रयास भी करता है।”

विजयन ने एलडीएफ सरकार के तहत केरल की वित्तीय उपलब्धियों को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि मार्च 2021 में राज्य का शुद्ध कर राजस्व 47,000 करोड़ रुपये था, जो अब लगभग 80,000 करोड़ रुपये तक बढ़ गया है, जो वित्तीय अनुशासन का संकेत है। बावजूद इसके, उन्होंने कहा कि केंद्र की नीतियों- उधारी सीमाओं में कटौती, अनुमोदन में देरी और आईजीएसटी आवंटन में कमी, ने राज्य की प्रगति को प्रभावित किया है।

मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिबंधों, विशेषकर अमेरिकी आयात नियंत्रणों का भी जिक्र किया, जिससे समुद्री खाद्य, मसाले, काजू और वस्त्र उद्योग प्रभावित हुए और सालाना लगभग 2,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने कहा, “इन चुनौतियों के बावजूद, केंद्र ने हमारी उधारी सीमा में 2025-26 के लिए अकेले 14,358 करोड़ रुपये की कटौती की, जिससे केरल की वित्तीय क्षमता कमजोर हुई।”

विजयन ने केंद्र पर संविधान के अनुच्छेद 293(3) का दुरुपयोग करने और केरल इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड एवं सोशल सिक्योरिटी पेंशन लिमिटेड द्वारा जुटाई गई राशि को राज्य के कर्ज़ में शामिल करने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रेरित बताते हुए कहा कि यह केरल के विकास मॉडल को कमजोर करने का प्रयास है।

मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि इन बाधाओं के बावजूद राज्य अपने विकास एजेंडे को जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि केरल ने राजस्व और संसाधन जुटाने में शानदार प्रगति की है, और हम किसी भी तरह के मनमाने केंद्रीय हस्तक्षेप को अपनी प्रगति के रास्ते में आने नहीं देंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी महत्वपूर्ण है कि हम दोनों पक्षों की स्थिति को समझें।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल के मुख्यमंत्री ने केंद्र पर क्या आरोप लगाए हैं?
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने केंद्र पर राज्य की वित्तीय स्वतंत्रता को सीमित करने और विकास बाधित करने का आरोप लगाया है।
केरल इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड के ऋणों को किस प्रकार से प्रभावित किया गया है?
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र ने इन ऋणों को राज्य के कर्ज में शामिल कर दिया है, जिससे उधारी क्षमता कम हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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