इजरायली नौसेना ने गाजा जा रहे सहायता बेड़े पर कब्जा किया, दक्षिण कोरियाई कार्यकर्ता किम डोंग-ह्योन हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
इजरायली नौसेना ने सोमवार देर रात साइप्रस के निकट अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक मानवीय सहायता बेड़े को रोककर उस पर कब्जा कर लिया, जिस पर दक्षिण कोरियाई कार्यकर्ता किम डोंग-ह्योन सवार थे। फिलिस्तीन समर्थक एक नागरिक समूह के अनुसार, 'काइरियाकोस एक्स' नामक जहाज को इजरायली नौसैनिक बलों ने गाजा पट्टी की ओर जाते समय रोका और किम को अन्य देशों के कार्यकर्ताओं के साथ संभवतः एक इजरायली युद्धपोत पर हिरासत में रखा गया है।
मुख्य घटनाक्रम
नागरिक समूह के बयान के अनुसार, किम डोंग-ह्योन इस महीने की शुरुआत में गाजा के लिए रवाना हुए थे, जबकि दक्षिण कोरियाई सरकार ने उस क्षेत्र की यात्रा पर पाबंदी लगा रखी है। दक्षिण कोरियाई कानून के तहत बिना सरकारी अनुमति के गाजा पट्टी में प्रवेश करने या वहाँ रहने पर एक वर्ष तक की जेल या 10 लाख वोन (लगभग 6,685 अमेरिकी डॉलर) तक का जुर्माना हो सकता है।
समूह ने यह भी बताया कि एक अन्य नाव — जिस पर एक और कार्यकर्ता किम आह-ह्यून सवार हैं — 'काइरियाकोस एक्स' के पास ही है और उसे भी जब्त किए जाने का खतरा बना हुआ है।
पूर्व घटनाओं से संदर्भ
यह पहली बार नहीं है जब दक्षिण कोरियाई नागरिक गाजा पहुँचने की कोशिश में अवरोध का सामना कर चुके हों। कार्यकर्ता किम आह-ह्यून इससे पहले अक्टूबर में बिना सरकारी अनुमति के गाजा प्रवेश की कोशिश कर चुकी थीं, जिसके बाद उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया था। उस समय इजरायली सेना ने उन्हें हिरासत में लिया था और बाद में रिहा किया था। यह ऐसे समय में आया है जब गाजा में मानवीय सहायता पहुँचाने को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता जा रहा है।
नागरिक समूह की माँग
समूह ने सोल स्थित इजरायली दूतावास के सामने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हिरासत में लिए गए कार्यकर्ता की तत्काल रिहाई की माँग की। साथ ही दक्षिण कोरियाई सरकार से अपील की गई कि वह राजनयिक माध्यमों से उनकी जल्द रिहाई सुनिश्चित करे। समूह के अनुसार, यह अभियान इस बात के विरोध में है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पिछले दो वर्षों से इजरायल के कथित 'जनसंहार' पर चुप्पी साधे हुआ है।
आगे क्या होगा
अभी तक दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कार्यकर्ताओं की रिहाई और उनकी वर्तमान स्थिति को लेकर स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। नागरिक समूह ने कहा है कि वे हर संभव कानूनी और राजनयिक रास्ते अपनाएँगे।