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क्या केरल के सीएम विजयन ने 'मलयालम भाषा विधेयक 2025' का बचाव किया?

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क्या केरल के सीएम विजयन ने 'मलयालम भाषा विधेयक 2025' का बचाव किया?

सारांश

केरल के मुख्यमंत्री पिन्नाराई विजयन ने 'मलयालम भाषा विधेयक, 2025' का बचाव करते हुए कहा है कि यह विधेयक समावेशिता और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित है। जानिए इस विधेयक की खास बातें और इसके पीछे की सोच।

मुख्य बातें

विधेयक समावेशिता पर आधारित है।
भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री द्वारा विरोध।
छात्रों को मातृभाषा चुनने की स्वतंत्रता।
धर्मनिरपेक्षता और बहुलवाद को बनाए रखना।

तिरुवनंतपुरम, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केरल के मुख्यमंत्री पिन्नाराई विजयन ने 'मलयालम भाषा विधेयक, 2025' को लेकर उठ रही चिंताओं पर शनिवार को स्पष्ट जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह विधेयक समावेशिता और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित है।

यह विधेयक अक्टूबर 2025 में केरल विधानसभा में पेश किया गया था और 9 अक्टूबर को पारित किया गया। अब यह राज्यपाल की स्वीकृति का इंतजार कर रहा है। इस बीच, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने हाल ही में विधेयक को 'भाषाई स्वतंत्रता पर हमला' बताते हुए इसे संविधान के खिलाफ बताया।

सीएम विजयन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपने पोस्ट में इस विवाद पर चर्चा की और पड़ोसी राज्य कर्नाटक की चिंताओं का उत्तर देते हुए कहा, "मलयालम भाषा विधेयक, 2025 के बारे में जताई गई चिंताएं तथ्यों या केरल विधानसभा द्वारा पारित कानून की समावेशी भावना को नहीं दर्शाती हैं। केरल की प्रगति हमेशा समानता और भाईचारे पर आधारित व्यापक विकास में निहित रही है।"

उन्होंने कहा, "सरकार धर्मनिरपेक्षता और बहुलवाद के संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए दृढ़ है। इस विधेयक में भाषाई अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से कन्नड़ और तमिल भाषी समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक स्पष्ट और असंदिग्ध नॉन-ऑब्स्टैंटे क्लॉज़ (धारा 7) शामिल है।"

विजयन ने आगे कहा, "मुख्य प्रावधान यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी भी भाषा को थोपा न जाए और भाषाई स्वतंत्रता पूरी तरह से सुरक्षित रहे। अधिसूचित क्षेत्रों में, तमिल और कन्नड़ भाषी सचिवालय, विभागाध्यक्षों और स्थानीय कार्यालयों के साथ आधिकारिक पत्राचार के लिए अपनी मातृभाषा का उपयोग जारी रख सकते हैं, और जवाब भी उन्हीं भाषाओं में दिए जाएंगे।"

मुख्यमंत्री ने बताया, "जिन छात्रों की मातृभाषा मलयालम नहीं है, वे राष्ट्रीय शिक्षा पाठ्यक्रम के अनुसार स्कूलों में उपलब्ध भाषाओं में से चुनने के लिए स्वतंत्र हैं। अन्य राज्यों या विदेशी देशों के छात्रों को 9वीं, 10वीं या उच्चतर माध्यमिक स्तर पर मलयालम परीक्षाओं में बैठने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।"

उन्होंने स्पष्ट किया, "केरल की भाषा नीति आधिकारिक भाषा अधिनियम, 1963 और भारत के संविधान के अनुच्छेद 346 और 347 के साथ पूरी तरह से संरेखित है। भारत की विविधता का जश्न मनाया जाना चाहिए, न कि उसे एक ही सांचे में ढाला जाए।"

संपादकीय दृष्टिकोण

जो भारतीय विविधता को प्रोत्साहित करता है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मलयालम भाषा विधेयक, 2025 क्या है?
यह विधेयक केरल में मलयालम भाषा के अधिकारों की रक्षा करने के लिए लाया गया है।
क्या यह विधेयक अल्पसंख्यक भाषाओं को प्रभावित करेगा?
सीएम विजयन के अनुसार, यह विधेयक अल्पसंख्यक भाषाओं के अधिकारों की रक्षा करता है।
इस विधेयक के मुख्य प्रावधान क्या हैं?
इसमें भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए नॉन-ऑब्स्टैंटे क्लॉज़ शामिल है।
क्या कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने इस विधेयक का विरोध किया है?
हाँ, सिद्धारमैया ने इसे 'भाषाई स्वतंत्रता पर हमला' कहा है।
क्या छात्रों को मलयालम भाषा की परीक्षा में बैठने के लिए मजबूर किया जाएगा?
नहीं, छात्रों को अपनी मातृभाषा चुनने की स्वतंत्रता है।
राष्ट्र प्रेस
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