केरल विधानसभा में पीएम श्री योजना पर UDF-LDF आमने-सामने, LDF का वॉकआउट
सारांश
मुख्य बातें
केरल विधानसभा में बुधवार, 24 जून 2026 को केंद्र प्रायोजित पीएम श्री (प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया) योजना को लेकर सत्तारूढ़ यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) और विपक्षी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के बीच तीखी नोकझोंक हुई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर राज्य के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया, और अंततः विधानसभा अध्यक्ष द्वारा स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार किए जाने के विरोध में LDF सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई
LDF विधायक पी. प्रसाद द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव से इस बहस की नींव पड़ी। प्रस्ताव में सरकार के पीएम श्री योजना पर रुख को लेकर सदन में चर्चा की माँग की गई थी। यह योजना केंद्र सरकार की एक प्रमुख शिक्षा पहल है, जिसके तहत देशभर में चुनिंदा स्कूलों को आदर्श विद्यालयों के रूप में विकसित किया जाना है।
शिक्षा मंत्री का पलटवार
शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन ने सदन में दस्तावेज पेश करते हुए पिछली LDF सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2024 में तत्कालीन सामान्य शिक्षा सचिव ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर केरल की योजना लागू करने की इच्छा जताई थी।
मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि 16 अक्टूबर 2025 को एलडीएफ सरकार ने केंद्र के साथ एक ऐसे समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें यह शर्त स्वीकार की गई थी कि समझौते से हटने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास होगा। शम्सुद्दीन ने कहा, 'पिछली सरकार ने इस समझौते पर हस्ताक्षर करके केरल के हितों से समझौता किया। वर्तमान सरकार ने न तो कोई नया समझौता किया है और न ही राज्य के अधिकारों से समझौता किया है।'
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि UDF सरकार द्वारा गठित कैबिनेट उपसमिति का उद्देश्य योजना को लागू करना नहीं है, और इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है — समिति की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
विपक्ष के नेता का तीखा जवाब
विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने सरकार पर पलटवार करते हुए कहा कि सत्ता में आने से पहले UDF ने पीएम श्री योजना का विरोध किया था, लेकिन अब उसका रुख बदल गया है। विजयन ने कहा, 'UDF ने वादा किया था कि वह इस योजना को बाहर का रास्ता दिखाएगी। अब वह ऐसा करने को तैयार क्यों नहीं है?'
उन्होंने दावा किया कि LDF सरकार ने उस MoU को प्रभावी रूप से ठंडे बस्ते में डाल दिया था और इसके क्रियान्वयन की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। विजयन के अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर होने के आठ महीने बाद भी केरल में योजना लागू नहीं हुई और राज्य ने योजना में शामिल किए जाने वाले स्कूलों की सूची तक केंद्र को नहीं भेजी। उन्होंने सरकार पर 'संघ परिवार के एजेंडे के आगे झुकने' का आरोप लगाते हुए माँग की कि सरकार स्पष्ट रूप से आश्वासन दे कि राज्य में पीएम श्री योजना लागू नहीं की जाएगी।
स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार, LDF का वॉकआउट
शिक्षा मंत्री के जवाब के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव को अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके विरोध में LDF सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया, जिसके साथ ही इस मुद्दे पर हुई गरमागरम बहस समाप्त हुई। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब केरल में शिक्षा नीति को लेकर केंद्र-राज्य संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं।
आगे क्या होगा
कैबिनेट उपसमिति की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि UDF सरकार पीएम श्री योजना के बारे में अंतिम रूप से क्या निर्णय लेती है। तब तक राज्य और केंद्र के बीच MoU की स्थिति अनिश्चित बनी रहेगी, और यह मुद्दा केरल की राजनीति में तूल पकड़ता रहेगा।