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केरल विधानसभा में पीएम श्री योजना पर UDF-LDF आमने-सामने, LDF का वॉकआउट

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केरल विधानसभा में पीएम श्री योजना पर UDF-LDF आमने-सामने, LDF का वॉकआउट

सारांश

केरल विधानसभा में पीएम श्री योजना बनी राजनीतिक अखाड़ा — UDF ने 2025 का MoU दिखाकर LDF को घेरा, LDF ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार होने पर LDF का वॉकआउट। कैबिनेट उपसमिति की रिपोर्ट ही तय करेगी केरल का अगला कदम।

मुख्य बातें

24 जून 2026 को केरल विधानसभा में पीएम श्री योजना पर UDF और LDF के बीच तीखी बहस हुई।
शम्सुद्दीन ने दावा किया कि LDF सरकार ने 16 अक्टूबर 2025 को केंद्र के साथ MoU पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें समझौते से हटने का अधिकार केवल केंद्र को दिया गया था।
विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने UDF पर पीएम श्री योजना के विरोध से पलटी मारने का आरोप लगाया।
विधानसभा अध्यक्ष ने LDF विधायक पी.
प्रसाद का स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार किया, जिसके बाद LDF सदस्यों ने वॉकआउट किया।
UDF सरकार की कैबिनेट उपसमिति की रिपोर्ट आने तक योजना पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा।

केरल विधानसभा में बुधवार, 24 जून 2026 को केंद्र प्रायोजित पीएम श्री (प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया) योजना को लेकर सत्तारूढ़ यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) और विपक्षी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के बीच तीखी नोकझोंक हुई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर राज्य के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया, और अंततः विधानसभा अध्यक्ष द्वारा स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार किए जाने के विरोध में LDF सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई

LDF विधायक पी. प्रसाद द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव से इस बहस की नींव पड़ी। प्रस्ताव में सरकार के पीएम श्री योजना पर रुख को लेकर सदन में चर्चा की माँग की गई थी। यह योजना केंद्र सरकार की एक प्रमुख शिक्षा पहल है, जिसके तहत देशभर में चुनिंदा स्कूलों को आदर्श विद्यालयों के रूप में विकसित किया जाना है।

शिक्षा मंत्री का पलटवार

शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन ने सदन में दस्तावेज पेश करते हुए पिछली LDF सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2024 में तत्कालीन सामान्य शिक्षा सचिव ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर केरल की योजना लागू करने की इच्छा जताई थी।

मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि 16 अक्टूबर 2025 को एलडीएफ सरकार ने केंद्र के साथ एक ऐसे समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें यह शर्त स्वीकार की गई थी कि समझौते से हटने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास होगा। शम्सुद्दीन ने कहा, 'पिछली सरकार ने इस समझौते पर हस्ताक्षर करके केरल के हितों से समझौता किया। वर्तमान सरकार ने न तो कोई नया समझौता किया है और न ही राज्य के अधिकारों से समझौता किया है।'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि UDF सरकार द्वारा गठित कैबिनेट उपसमिति का उद्देश्य योजना को लागू करना नहीं है, और इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है — समिति की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

विपक्ष के नेता का तीखा जवाब

विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने सरकार पर पलटवार करते हुए कहा कि सत्ता में आने से पहले UDF ने पीएम श्री योजना का विरोध किया था, लेकिन अब उसका रुख बदल गया है। विजयन ने कहा, 'UDF ने वादा किया था कि वह इस योजना को बाहर का रास्ता दिखाएगी। अब वह ऐसा करने को तैयार क्यों नहीं है?'

उन्होंने दावा किया कि LDF सरकार ने उस MoU को प्रभावी रूप से ठंडे बस्ते में डाल दिया था और इसके क्रियान्वयन की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। विजयन के अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर होने के आठ महीने बाद भी केरल में योजना लागू नहीं हुई और राज्य ने योजना में शामिल किए जाने वाले स्कूलों की सूची तक केंद्र को नहीं भेजी। उन्होंने सरकार पर 'संघ परिवार के एजेंडे के आगे झुकने' का आरोप लगाते हुए माँग की कि सरकार स्पष्ट रूप से आश्वासन दे कि राज्य में पीएम श्री योजना लागू नहीं की जाएगी।

स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार, LDF का वॉकआउट

शिक्षा मंत्री के जवाब के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव को अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके विरोध में LDF सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया, जिसके साथ ही इस मुद्दे पर हुई गरमागरम बहस समाप्त हुई। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब केरल में शिक्षा नीति को लेकर केंद्र-राज्य संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं।

आगे क्या होगा

कैबिनेट उपसमिति की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि UDF सरकार पीएम श्री योजना के बारे में अंतिम रूप से क्या निर्णय लेती है। तब तक राज्य और केंद्र के बीच MoU की स्थिति अनिश्चित बनी रहेगी, और यह मुद्दा केरल की राजनीति में तूल पकड़ता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ दोनों पक्ष विरोध और समर्थन की भूमिकाएँ सुविधानुसार बदलते रहते हैं। UDF का MoU-दस्तावेज़ दिखाना राजनीतिक रूप से चतुर है, लेकिन असली सवाल यह है कि वर्तमान सरकार खुद योजना पर क्या रुख अपनाएगी — कैबिनेट उपसमिति की आड़ में अनिश्चितता बनाए रखना भी एक रणनीति हो सकती है। LDF का वॉकआउट प्रतीकात्मक विरोध से अधिक कुछ नहीं लगता, क्योंकि उसके अपने कार्यकाल में हस्ताक्षरित MoU ने उसकी नैतिक स्थिति कमज़ोर कर दी है। मुख्यधारा की कवरेज इस बात को नज़रअंदाज़ कर रही है कि आठ महीने की निष्क्रियता के बाद भी स्कूलों की सूची न भेजना — चाहे किसी भी सरकार का हो — केरल के लाखों छात्रों के लिए योजना को ठप रखना है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम श्री योजना क्या है और केरल में विवाद क्यों है?
पीएम श्री (प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया) केंद्र सरकार की एक शिक्षा योजना है, जिसके तहत देशभर में चुनिंदा स्कूलों को आदर्श विद्यालयों के रूप में विकसित किया जाना है। केरल में विवाद इसलिए है क्योंकि UDF और LDF दोनों एक-दूसरे पर राज्य के हितों से समझौता करने का आरोप लगा रहे हैं।
16 अक्टूबर 2025 का MoU क्या था?
शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन के अनुसार, 16 अक्टूबर 2025 को तत्कालीन LDF सरकार ने केंद्र सरकार के साथ पीएम श्री योजना पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इस MoU में यह शर्त शामिल थी कि समझौते से हटने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास होगा।
LDF ने केरल विधानसभा से वॉकआउट क्यों किया?
LDF विधायक पी. प्रसाद द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव को विधानसभा अध्यक्ष ने शिक्षा मंत्री के जवाब के बाद अस्वीकार कर दिया। इसी के विरोध में LDF सदस्यों ने 24 जून 2026 को सदन से वॉकआउट किया।
क्या केरल में पीएम श्री योजना लागू होगी?
अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। UDF सरकार ने इस उद्देश्य के लिए एक कैबिनेट उपसमिति गठित की है और उसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। शिक्षा मंत्री के अनुसार, उपसमिति का उद्देश्य योजना को लागू करना नहीं, बल्कि इस पर विचार करना है।
पिनराई विजयन ने UDF पर क्या आरोप लगाए?
विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने आरोप लगाया कि UDF ने सत्ता में आने से पहले पीएम श्री योजना का विरोध किया था, लेकिन अब उसका रुख बदल गया है। उन्होंने सरकार पर 'संघ परिवार के एजेंडे के आगे झुकने' का आरोप लगाते हुए माँग की कि सरकार स्पष्ट आश्वासन दे कि यह योजना केरल में लागू नहीं होगी।
राष्ट्र प्रेस
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