10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पिनाराई विजयन की माँग: केरल में 308 आदिवासी मार्गदर्शक शिक्षकों को तत्काल बहाल करे यूडीएफ सरकार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पिनाराई विजयन की माँग: केरल में 308 आदिवासी मार्गदर्शक शिक्षकों को तत्काल बहाल करे यूडीएफ सरकार

सारांश

केरल में 308 आदिवासी मार्गदर्शक शिक्षकों की बर्खास्तगी ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्ष नेता पिनाराई विजयन ने यूडीएफ सरकार के इस फैसले को 'घोर अन्याय' बताया है — यह वही कार्यक्रम है जिसे 2016 में एलडीएफ ने आदिवासी बच्चों की स्कूल छोड़ने की दर रोकने के लिए शुरू किया था।

मुख्य बातें

केरल में यूडीएफ सरकार ने वर्तमान शैक्षणिक वर्ष में 308 आदिवासी मार्गदर्शक शिक्षकों की सेवाएँ समाप्त कर दीं।
प्रभावित शिक्षकों में वायनाड के 241 , पलक्कड़ के 50 और मलप्पुरम के 17 शिक्षक शामिल हैं।
गोत्र बंधु योजना के तहत नियुक्त इन शिक्षकों का मासिक वेतन ₹21,900 था; ये कक्षा 1 से 4 तक पढ़ाते थे।
विपक्ष नेता पिनाराई विजयन ने इसे 'घोर अन्याय' बताते हुए तत्काल बहाली की माँग की।
यह कार्यक्रम 2016 में पहली एलडीएफ सरकार ने शुरू किया था; आईटीडीपी अधिकारियों ने निदेशक के निर्देश पर सेवाएँ समाप्त कीं।

केरल में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने शुक्रवार, 5 जून को यूडीएफ सरकार द्वारा 308 आदिवासी मार्गदर्शक शिक्षकों को बर्खास्त किए जाने के फैसले को 'घोर अन्याय' करार देते हुए उनकी तत्काल बहाली की माँग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यह कदम वायनाड, पलक्कड़ और मलप्पुरम जिलों के आदिवासी छात्रों की शिक्षा पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।

क्या है पूरा मामला

गोत्र बंधु योजना के तहत नियुक्त ये शिक्षक कक्षा 1 से 4 तक के आदिवासी छात्रों को पढ़ाते थे और उनका मासिक वेतन ₹21,900 था। इन पदों के लिए टीटीसी और बी.एड जैसी योग्यताएँ रखने वाले आदिवासी युवाओं को प्राथमिकता दी गई थी।

विजयन के अनुसार, अनुसूचित जनजाति विभाग के निदेशक के निर्देशों के बाद एकीकृत जनजातीय विकास परियोजना (आईटीडीपी) के अधिकारियों ने वर्तमान शैक्षणिक वर्ष में इन शिक्षकों की सेवाएँ समाप्त करने के आदेश जारी किए, जिसके चलते स्कूल खुलने पर वे ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हो सके।

एलडीएफ की मूल पहल और उसका महत्व

पूर्व मुख्यमंत्री विजयन ने बताया कि यह मेंटर टीचर कार्यक्रम 2016 में पहली एलडीएफ सरकार की सबसे महत्वपूर्ण पहलों में से एक था। उन्होंने दावा किया कि केरल देश का पहला राज्य था जिसने आदिवासी छात्रों के लिए इस तरह की समर्पित शैक्षिक सहायता प्रणाली शुरू की थी।

विजयन ने कहा, 'इस कार्यक्रम ने आदिवासी समुदायों के शिक्षकों को छात्रों से उनकी अपनी भाषा में संवाद करने में सक्षम बनाया, जिससे सीखने के परिणामों में सुधार हुआ और स्कूल छोड़ने की दर में काफी कमी आई।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस पहल से आदिवासी परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थितियों में सुधार लाने में भी सहायता मिली थी।

प्रभावित शिक्षकों की स्थिति

बर्खास्त किए गए 308 शिक्षकों में से वायनाड में 241, पलक्कड़ में 50 और मलप्पुरम में 17 शिक्षक शामिल हैं। इनमें से अधिकांश कमज़ोर आदिवासी समुदायों से संबंधित हैं।

गौरतलब है कि इनमें से कई शिक्षकों ने अप्रैल और मई के दौरान भी बिना वेतन के स्कूली गतिविधियों में सहयोग दिया और आदिवासी बच्चों को कक्षाओं में वापस लाने में मदद करते रहे।

विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक माँग

विजयन ने बताया कि बर्खास्त शिक्षक इस समय विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'राज्य सरकार को उनकी जायज माँगों पर विचार करना चाहिए और उनकी नौकरियों को बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।'

यह ऐसे समय में आया है जब केरल में आदिवासी शिक्षा और जनजातीय अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस पहले से ही तेज़ है। विशेषज्ञों का मानना है कि मातृभाषा में शिक्षा देने वाले ऐसे शिक्षकों की अनुपस्थिति से आदिवासी बच्चों में स्कूल छोड़ने की दर फिर बढ़ सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील है — क्योंकि गोत्र बंधु योजना एलडीएफ की पहचान से जुड़ी थी और इसे बंद करना विपक्ष को स्वाभाविक मुद्दा देता है। असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार के पास इन शिक्षकों की जगह कोई वैकल्पिक व्यवस्था है, या आदिवासी बच्चे फिर बिना मातृभाषा-सहायता के कक्षाओं में बैठने को मजबूर होंगे। केरल की साक्षरता दर की चमक अक्सर आदिवासी समुदायों की वास्तविक शैक्षिक स्थिति को ढक लेती है — जहाँ ड्रॉपआउट दर अब भी राज्य के औसत से कहीं अधिक है। बिना पारदर्शी कारण बताए 308 पदों को एक झटके में समाप्त करना, उस नीतिगत निरंतरता पर सवाल उठाता है जिसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत हाशिये पर खड़े समुदायों को है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में आदिवासी मार्गदर्शक शिक्षकों को क्यों बर्खास्त किया गया?
अनुसूचित जनजाति विभाग के निदेशक के निर्देशों के बाद आईटीडीपी अधिकारियों ने वर्तमान शैक्षणिक वर्ष में इन शिक्षकों की सेवाएँ जारी न रखने का आदेश जारी किया। सरकार की ओर से अब तक इस निर्णय का विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
गोत्र बंधु योजना क्या है और इसे किसने शुरू किया था?
गोत्र बंधु योजना 2016 में पहली एलडीएफ सरकार द्वारा शुरू की गई थी, जिसके तहत टीटीसी और बी.एड योग्यता रखने वाले आदिवासी युवाओं को कक्षा 1 से 4 तक के आदिवासी छात्रों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाने के लिए नियुक्त किया गया था। इन शिक्षकों का मासिक वेतन ₹21,900 था।
कितने शिक्षक प्रभावित हुए हैं और किन जिलों में?
कुल 308 आदिवासी मार्गदर्शक शिक्षकों की नौकरी गई है — वायनाड में 241, पलक्कड़ में 50 और मलप्पुरम में 17। इनमें से अधिकांश कमज़ोर आदिवासी समुदायों से संबंधित हैं।
पिनाराई विजयन ने इस मामले में क्या माँग की है?
विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने यूडीएफ सरकार से इन 308 शिक्षकों की तत्काल बहाली की माँग की है। उन्होंने इस फैसले को 'घोर अन्याय' बताया और कहा कि इससे आदिवासी छात्रों की शिक्षा पर गंभीर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
इन शिक्षकों की बर्खास्तगी से आदिवासी छात्रों पर क्या असर पड़ेगा?
विजयन के अनुसार, ये शिक्षक आदिवासी बच्चों से उनकी मातृभाषा में संवाद करते थे, जिससे स्कूल छोड़ने की दर में उल्लेखनीय कमी आई थी। इनकी अनुपस्थिति से ड्रॉपआउट दर फिर बढ़ने की आशंका है और आदिवासी बच्चों को शैक्षिक सहायता मिलना बंद हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले