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राज्यपाल अर्लेकर चला रहे समानांतर प्रशासन — पिनाराई विजयन का आरोप, CM सतीसन से जवाब की माँग

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राज्यपाल अर्लेकर चला रहे समानांतर प्रशासन — पिनाराई विजयन का आरोप, CM सतीसन से जवाब की माँग

सारांश

पिनाराई विजयन ने राज्यपाल अर्लेकर पर सरकारी अधिकारियों से सीधी बैठकें कर समानांतर प्रशासन चलाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने CM सतीसन की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए संवैधानिक मर्यादा की रक्षा की माँग की।

मुख्य बातें

पिनाराई विजयन ने 18 जून 2026 को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर पर समानांतर प्रशासन चलाने का आरोप लगाया।
राज्यपाल ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पहले अलग-अलग सरकारी विभागों की बैठकें बुलाई थीं।
विजयन ने मुख्यमंत्री वी.डी.
सतीसन से राज्य की संवैधानिक गरिमा की रक्षा के लिए अपना रुख स्पष्ट करने की माँग की।
PSC द्वारा चुने गए लगभग 400 डॉक्टर अभी भी नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे हैं।
विजयन ने पीएम-श्री योजना पर यूडीएफ के रुख को विरोधाभासी बताया और पंजाब का उदाहरण दिया।

विपक्ष के नेता और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई(एम) — के वरिष्ठ नेता पिनाराई विजयन ने 18 जून 2026 को तिरुवनंतपुरम में केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर पर गंभीर संवैधानिक आरोप लगाए। विजयन ने दावा किया कि राज्यपाल सरकारी अधिकारियों के साथ सीधे बैठकें आयोजित कर एक समानांतर प्रशासनिक तंत्र खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं, जो स्थापित लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है।

मुख्य आरोप और घटनाक्रम

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पूर्व राज्यपाल द्वारा अलग-अलग सरकारी विभागों की बैठकें बुलाए जाने को लेकर विजयन ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "यह बहुत गंभीर मामला है। राज्यपाल एक समानांतर प्रशासनिक अथॉरिटी बनने की ओर बढ़ रहे हैं, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।" उनका तर्क था कि राज्यपाल का यह कदम सरकार की संवैधानिक सत्ता को सीधी चुनौती है।

मुख्यमंत्री सतीसन से हस्तक्षेप की माँग

पूर्व मुख्यमंत्री विजयन ने मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की अथॉरिटी और गरिमा की रक्षा करना मुख्यमंत्री की सीधी जिम्मेदारी है और उन्हें अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। विजयन ने 2024 की मिसाल याद दिलाई, जब तत्कालीन राज्यपाल ने मुख्य सचिव और राज्य पुलिस प्रमुख से रिपोर्ट माँगी थी — उस समय तत्कालीन वाम सरकार ने उस कदम का कड़ा विरोध किया था।

पीएम-श्री शिक्षा योजना पर यूडीएफ को घेरा

विजयन ने यूडीएफ सरकार के केंद्र की पीएम-श्री एजुकेशन स्कीम को आगे बढ़ाने के फैसले पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने पहले इस मुद्दे पर विवाद खड़ा किया था और अब पलटी मार रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछली वाम सरकार ने केरल के 'समग्र शिक्षा' फंड रोके जाने के बाद केंद्र के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन बाद में उसे रोक दिया गया था। उन्होंने पंजाब का उदाहरण दिया, जिसने हस्ताक्षर के नौ महीने बाद पीएम-श्री कार्यक्रम से बाहर निकलने का फैसला किया — यह दर्शाते हुए कि एमओयू पर हस्ताक्षर का अर्थ योजना का क्रियान्वयन नहीं है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र पर चिंता

विजयन ने राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र की स्थिति पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि संक्रामक बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच सरकारी अस्पतालों में दवाओं और स्टाफ की कमी बनी हुई है। उन्होंने बताया कि लोक सेवा आयोग (PSC) द्वारा चुने गए लगभग 400 डॉक्टर अभी भी नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे हैं।

आगे क्या

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब केरल में नई यूडीएफ सरकार अभी अपने शुरुआती महीनों में है और राज्यपाल-सरकार संबंध एक बार फिर केंद्र में आ गए हैं। विजयन की माँग है कि मुख्यमंत्री सतीसन राज्यपाल के इस कदम पर सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करें — अन्यथा यह संवैधानिक असंतुलन गहराता जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नई यूडीएफ सरकार की परीक्षा भी है — क्या सतीसन उसी मुखरता से राज्यपाल का विरोध करेंगे, जो वाम सरकार ने 2024 में की थी? विडंबना यह है कि जो दल विपक्ष में रहते हुए राज्यपाल के अतिक्रमण पर सबसे तीखे थे, वे सत्ता में आते ही चुप हो गए हैं। राज्यपाल-सरकार टकराव भारत के कई गैर-भाजपा शासित राज्यों में एक स्थायी पैटर्न बन चुका है, लेकिन केरल में यह दोहरा राजनीतिक खेल — जहाँ विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों ने बारी-बारी से राज्यपाल का विरोध किया — संवैधानिक बहस को दलगत सुविधा का औज़ार बना देता है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पिनाराई विजयन ने राज्यपाल अर्लेकर पर क्या आरोप लगाए हैं?
विजयन ने आरोप लगाया है कि राज्यपाल अर्लेकर सरकारी अधिकारियों के साथ सीधी बैठकें कर एक समानांतर प्रशासनिक तंत्र खड़ा कर रहे हैं, जो संवैधानिक नियमों और लोकतांत्रिक परंपराओं के विरुद्ध है। यह विवाद योग दिवस से पहले राज्यपाल द्वारा विभागीय बैठकें बुलाए जाने के बाद उभरा।
विजयन ने मुख्यमंत्री सतीसन से क्यों हस्तक्षेप माँगा?
विजयन का कहना है कि राज्य सरकार की संवैधानिक गरिमा की रक्षा करना मुख्यमंत्री की सीधी जिम्मेदारी है। उन्होंने सतीसन की चुप्पी को अपर्याप्त बताते हुए माँग की कि वे राज्यपाल के इस कदम पर सार्वजनिक रूप से अपना रुख स्पष्ट करें।
2024 में राज्यपाल-सरकार विवाद का क्या संदर्भ है?
2024 में तत्कालीन राज्यपाल ने मुख्य सचिव और राज्य पुलिस प्रमुख से सीधे रिपोर्ट माँगी थी, जिसका तत्कालीन वाम सरकार ने कड़ा विरोध किया था। विजयन ने इस मिसाल का हवाला देते हुए यूडीएफ सरकार से वही दृढ़ता दिखाने की अपेक्षा जताई है।
पीएम-श्री योजना को लेकर विजयन ने क्या कहा?
विजयन ने यूडीएफ सरकार के पीएम-श्री योजना अपनाने के फैसले को विरोधाभासी बताया, क्योंकि कांग्रेस और आईयूएमएल ने पहले इस योजना का विरोध किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि एमओयू पर हस्ताक्षर का अर्थ योजना का क्रियान्वयन नहीं है और पंजाब का उदाहरण दिया जिसने नौ महीने बाद योजना से बाहर निकलने का फैसला किया।
केरल के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र पर विजयन की क्या चिंताएँ हैं?
विजयन ने आरोप लगाया कि संक्रामक बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच सरकारी अस्पतालों में दवाओं और स्टाफ की गंभीर कमी है। उन्होंने बताया कि PSC द्वारा चुने गए लगभग 400 डॉक्टर अभी भी नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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