केरल: सील विवाद पर मुख्यमंत्री विजयन का निर्वाचन आयोग पर तीखा आरोप, निष्पक्षता पर उठाए प्रश्न
सारांश
Key Takeaways
- मुख्यमंत्री विजयन का निर्वाचन आयोग पर आरोप गंभीर है।
- आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं।
- पुलिस की कार्रवाई को अलोकतांत्रिक बताया गया है।
- जांच के नतीजे सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
- यह विवाद राजनीतिक दलों और जनता के बीच विश्वसनीयता का प्रश्न है।
तिरुवनंतपुरम, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने ‘सील’ विवाद को लेकर भारतीय निर्वाचन आयोग पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र में सत्तारूढ़ दल के कार्यालय की मुहर वाले दस्तावेज़ का अन्य राजनीतिक दलों में वितरण करना आयोग की निष्पक्षता का गंभीर उल्लंघन है।
मुख्यमंत्री ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखे पत्र में इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि एक संवैधानिक संस्था के रूप में चुनाव आयोग को पूरी तरह राजनीतिक रूप से निष्पक्ष होना चाहिए।
विजयन ने इस मामले में आलोचना करने वालों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि आलोचना एक लोकतांत्रिक अधिकार है और जो लोग आयोग की गलती को उजागर कर रहे थे, उन्हें पुलिस नोटिस भेजना “अलोकतांत्रिक” कदम है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जो आलोचना मानहानिकारक या व्यक्तिगत नहीं है, उसे वैध अभिव्यक्ति के रूप में लिया जाना चाहिए। पुलिस के जरिए नोटिस भेजना उचित नहीं है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस घटना को किसी एक अधिकारी की गलती बताकर खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि इतना महत्वपूर्ण दस्तावेज़ वरिष्ठ अधिकारियों की जांच के बिना कैसे प्रसारित हो गया।
विजयन ने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता और साख उनकी निष्पक्ष कार्यप्रणाली पर निर्भर करती है और हर कार्रवाई में यह स्पष्ट होनी चाहिए।
हालांकि मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इस मामले में जांच कराने की बात कही है, लेकिन मुख्यमंत्री ने मांग की कि जांच के नतीजे सार्वजनिक किए जाएं, ताकि राजनीतिक दलों और जनता का भरोसा बना रहे।
गौरतलब है कि यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब चुनाव आयोग का एक सर्कुलर, जिस पर कथित रूप से सत्तारूढ़ दल की मुहर लगी थी, अन्य राजनीतिक दलों को भेजा गया। इसके बाद विपक्षी दलों ने आयोग और सत्ता के बीच अनुचित संबंध होने का आरोप लगाया।
इस बीच सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाने वालों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की खबरों ने विवाद को और बढ़ा दिया है, जिससे संस्थागत जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है।