केरल के सीएम विजयन के विवादास्पद बयान पर विपक्ष का सवाल—क्या मतदाता भी 'घर जाकर पूछो' कहें?
सारांश
Key Takeaways
- पिनाराई विजयन का विवादास्पद बयान राजनीतिक चर्चाओं का कारण बना।
- विपक्ष ने इसे एक चुनावी मुद्दा बनाया है।
- दर्शकों के सवाल का कड़ा जवाब देना मुख्यमंत्री के लिए विवादास्पद साबित हुआ।
- सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हुआ।
- आलोचकों ने मुख्यमंत्री की छवि पर सवाल उठाए हैं।
पथानामथिट्टा, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन एक बार फिर अपने एक विवादास्पद बयान को लेकर आलोचनाओं के घेरे में आ गए हैं। कोन्नी में हुए एक चुनावी सम्मेलन में उनके द्वारा दिया गया एक कड़ा उत्तर अब राजनीतिक चर्चा का मुख्य विषय बन गया है।
यह घटना सोमवार रात पथानामथिट्टा जिले में एलडीएफ के सम्मेलन के दौरान हुई। मुख्यमंत्री बुनियादी ढांचे के विकास पर अपने विचार साझा कर रहे थे, तभी दर्शकों में से एक व्यक्ति ने सवाल करने की कोशिश की। लेकिन इससे पहले कि वह अपनी बात पूरी कर पाता, मुख्यमंत्री ने उसे रोकते हुए कहा, "घर जाकर पूछो।"
बाद में उस व्यक्ति की पहचान दास पी. जॉर्ज के रूप में हुई, जो अट्टाचक्कल ईस्ट मुक्कू से पार्टा कार्यकर्ता हैं। दास ने मुख्यमंत्री का समर्थन करते हुए कहा कि उनका सवाल विकास और केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड की कमी के बारे में था। उन्होंने स्वीकार किया कि उनका बीच में बोलना मुख्यमंत्री के भाषण में बाधा उत्पन्न कर सकता था। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि वह मुख्यमंत्री के प्रशंसक हैं और संभवतः उनका जवाब उसी संदर्भ में आया था।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया, जिसके बाद विपक्ष ने इसे एक मुद्दा बना लिया। यूडीएफ के समर्थकों ने इस क्लिप को मुख्यमंत्री के "असल व्यवहार" के रूप में पेश किया।
आलोचकों का कहना है कि मुख्यमंत्री की छवि को बेहतर दिखाने के लिए किए जा रहे जनसंपर्क प्रयास ऐसे घटनाओं के सामने कमजोर पड़ जाते हैं। विपक्ष ने इस बयान को चुनावी मुद्दा बनाते हुए सवाल उठाया है कि जब पार्टी कार्यकर्ता वोट मांगने आएंगे, तो क्या मतदाता भी उन्हें इसी तरह जवाब देंगे।
इससे पहले भी चुनावी मौसम में मुख्यमंत्री के कई बयान विवादों में रह चुके हैं। उन्होंने अंबालाप्पुझा से निर्दलीय उम्मीदवार और अपने पूर्व कैबिनेट सहयोगी जी. सुधाकरन के रुख को "घृणित" बताते हुए इसे "विश्वासघात" करार दिया था। इस पर सुधाकरन ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री बिना सामाजिक प्रभाव को समझे अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो एक नेता के लिए उचित नहीं है।