29 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पीएम श्री योजना पर केरल विधानसभा में तकरार: ₹2,000 करोड़ के नुकसान की आशंका, मंत्री बोले — बाहर निकलने का रास्ता नहीं

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पीएम श्री योजना पर केरल विधानसभा में तकरार: ₹2,000 करोड़ के नुकसान की आशंका, मंत्री बोले — बाहर निकलने का रास्ता नहीं

सारांश

केरल के शिक्षा मंत्री शमसुद्दीन ने विधानसभा में माना — पीएम श्री योजना से बाहर निकलना कानूनी रूप से नामुमकिन है। बाहर निकले तो ₹2,000 करोड़ का नुकसान तय। दोष पिछली एलडीएफ सरकार पर — जिसने बिना किसी चर्चा के समझौते पर दस्तखत कर दिए।

मुख्य बातें

केरल के शिक्षा मंत्री एन.
शमसुद्दीन ने 29 जून को विधानसभा में कहा कि पीएम श्री योजना से बाहर निकलने का कोई कानूनी रास्ता नहीं है।
योजना से अलग होने पर केरल को ₹2,000 करोड़ से अधिक के केंद्रीय अनुदान का नुकसान हो सकता है।
152 ब्लॉकों के 304 सरकारी स्कूलों के लिए ₹1,000 करोड़ और समग्र शिक्षा के तहत ₹1,151.48 करोड़ दाँव पर हैं।
मंत्री ने पिछली एलडीएफ सरकार पर बिना हितधारक चर्चा और मंत्री-स्तरीय उप-समिति की बैठक के समझौते पर हस्ताक्षर करने का आरोप लगाया।
शिवनकुट्टी ने मुस्लिम लीग और कांग्रेस पर शैक्षिक स्वायत्तता को खतरे में डालने वाली योजना लागू करने का आरोप लगाया।

केरल के सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शमसुद्दीन ने 29 जून को केरल विधानसभा में स्पष्ट किया कि केंद्र की पीएम श्री स्कूल डेवलपमेंट योजना से बाहर निकलना राज्य के लिए कानूनी रूप से संभव नहीं है, क्योंकि समझौते की शर्तों के अनुसार केवल केंद्र सरकार ही इसे एकतरफा रद्द कर सकती है। उन्होंने आगाह किया कि यदि केरल इस योजना से अलग होता है, तो राज्य को ₹2,000 करोड़ से अधिक के केंद्रीय अनुदान से हाथ धोना पड़ सकता है। साथ ही उन्होंने पिछली एलडीएफ (वाम लोकतांत्रिक मोर्चा) सरकार पर बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के इस समझौते पर हस्ताक्षर करने का आरोप लगाया।

मुख्य घटनाक्रम

विधानसभा में प्रश्नोत्तर के दौरान शमसुद्दीन ने बताया कि पीएम श्री कार्यक्रम के तहत 152 ब्लॉकों में चुने गए 304 सरकारी स्कूलों के विकास के लिए लगभग ₹1,000 करोड़ निर्धारित हैं। इसके अतिरिक्त, 'समग्र शिक्षा' योजना के अंतर्गत केरल को मिलने वाले ₹1,151.48 करोड़ भी खतरे में पड़ सकते हैं, यदि राज्य समझौते से पीछे हटता है।

मंत्री ने कहा, 'केंद्र ने पहले भी केरल का वाजिब फंड रोका है। पूरी संभावना है कि अगर राज्य समझौते से पीछे हटता है, तो दूसरी ग्रांट पर भी असर पड़ सकता है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य और केंद्र के बीच वित्तीय संबंध पहले से ही तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं।

पिछली सरकार पर आरोप

शमसुद्दीन ने आरोप लगाया कि पिछली एलडीएफ सरकार ने इस समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले न तो हितधारकों से कोई सार्थक बातचीत की और न ही इसके दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन किया। उन्होंने कहा, 'रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे पता चले कि पिछली सरकार ने समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा की हो या कोई तैयारी की हो। यहाँ तक कि योजना की जाँच के लिए एलडीएफ सरकार द्वारा बनाई गई मंत्री-स्तरीय उप-समिति की एक बार भी बैठक नहीं हुई।'

गौरतलब है कि यह वही एलडीएफ है जिसकी मौजूदा यूडीएफ (संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा) सरकार उत्तराधिकारी है, और अब वही सरकार उन फैसलों के परिणाम भुगत रही है।

पाठ्यक्रम और शैक्षिक स्वायत्तता पर आपत्ति

मंत्री ने पीएम श्री योजना के कुछ प्रावधानों — विशेषकर पाठ्यक्रम और शैक्षणिक स्वतंत्रता से जुड़े — पर यूडीएफ सरकार की आपत्तियाँ भी दोहराईं। उन्होंने कहा, 'स्कूलों में क्या पढ़ाया जाए, यह राज्य का अधिकार होना चाहिए। ऐसे मुद्दों पर किसी पक्के समझौते में शामिल होने से पहले व्यापक बातचीत की जरूरत थी।'

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब कई गैर-भाजपा शासित राज्य केंद्र प्रायोजित शिक्षा योजनाओं में केंद्र के बढ़ते हस्तक्षेप को लेकर चिंता जता चुके हैं।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

विधानसभा में मंत्री का बयान सुनने के बाद पूर्व शिक्षा मंत्री और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई(एम) — के वरिष्ठ नेता वी. शिवनकुट्टी ने मुस्लिम लीग और कांग्रेस पर एक ऐसी योजना लागू करने का आरोप लगाया, जिसे पिछली वामपंथी सरकार ने राज्य की शैक्षिक स्वायत्तता के लिए संभावित खतरा मानते हुए रोक दिया था।

आगे की राह

शमसुद्दीन ने स्पष्ट किया कि मौजूदा सरकार केंद्र से मिलने वाली आवश्यक सहायता को गँवाए बिना केरल के हितों की रक्षा के तरीके तलाश रही है। उन्होंने कहा, 'हमारी प्राथमिकता केंद्र से मिलने वाली हर जायज ग्रांट हासिल करना और उसका उपयोग सरकारी स्कूलों को मजबूत बनाने के लिए करना है।' राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच 304 सरकारी स्कूलों का भविष्य और केरल की शैक्षिक स्वायत्तता — दोनों ही दाँव पर हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि केंद्र-राज्य संबंधों की उस पुरानी पहेली का है जिसमें वित्तीय निर्भरता राजनीतिक असहमति को दबा देती है। विडंबना यह है कि एलडीएफ — जो अब विपक्ष में बैठकर आरोप लगा रही है — उसी ने वह समझौता किया था जिसे आज 'जाल' कहा जा रहा है। असली सवाल यह है कि जब मंत्री-स्तरीय उप-समिति एक बार भी नहीं बैठी, तो समझौते पर हस्ताक्षर किसकी मंजूरी से हुए? केरल की शैक्षिक स्वायत्तता की चिंता जायज है, लेकिन ₹2,000 करोड़ की वित्तीय बाध्यता यह भी बताती है कि राज्यों की केंद्रीय अनुदान पर निर्भरता उनकी नीतिगत स्वतंत्रता को किस हद तक सीमित कर देती है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम श्री योजना क्या है और केरल इससे क्यों नहीं निकल सकता?
पीएम श्री (PM SHRI) केंद्र सरकार की स्कूल विकास योजना है, जिसके तहत चुने गए सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाया जाता है। केरल के शिक्षा मंत्री के अनुसार, समझौते की शर्तें ऐसी हैं कि केवल केंद्र ही इसे एकतरफा रद्द कर सकता है, जिससे राज्य के पास कानूनी रूप से बाहर निकलने का कोई विकल्प नहीं बचता।
केरल को पीएम श्री योजना से बाहर निकलने पर कितना नुकसान होगा?
शिक्षा मंत्री एन. शमसुद्दीन के अनुसार, योजना से बाहर निकलने पर केरल को कुल लगभग ₹2,000 करोड़ का नुकसान हो सकता है — इसमें 304 स्कूलों के लिए ₹1,000 करोड़ और समग्र शिक्षा के तहत ₹1,151.48 करोड़ शामिल हैं।
पिछली एलडीएफ सरकार पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
मंत्री शमसुद्दीन ने आरोप लगाया कि पिछली एलडीएफ सरकार ने बिना हितधारकों से चर्चा किए और बिना मंत्री-स्तरीय उप-समिति की एक भी बैठक बुलाए यह समझौता कर लिया। उनके अनुसार, यह निर्णय केंद्र से अन्य अनुदान रुकने के डर से लिया गया था।
पीएम श्री योजना में पाठ्यक्रम को लेकर केरल की आपत्ति क्या है?
केरल सरकार का कहना है कि स्कूलों में क्या पढ़ाया जाए, यह तय करने का अधिकार राज्य को होना चाहिए। मंत्री ने कहा कि पाठ्यक्रम और शैक्षणिक स्वतंत्रता से जुड़े प्रावधानों पर व्यापक बातचीत के बिना इस समझौते में शामिल होना उचित नहीं था।
इस मुद्दे पर विपक्ष का क्या रुख है?
सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता और पूर्व शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने मुस्लिम लीग और कांग्रेस पर ऐसी योजना लागू करने का आरोप लगाया जिसे पिछली वामपंथी सरकार ने राज्य की शैक्षिक स्वायत्तता के लिए खतरा मानकर रोका था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले