पीएम श्री योजना पर केरल विधानसभा में तकरार: ₹2,000 करोड़ के नुकसान की आशंका, मंत्री बोले — बाहर निकलने का रास्ता नहीं
सारांश
मुख्य बातें
केरल के सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शमसुद्दीन ने 29 जून को केरल विधानसभा में स्पष्ट किया कि केंद्र की पीएम श्री स्कूल डेवलपमेंट योजना से बाहर निकलना राज्य के लिए कानूनी रूप से संभव नहीं है, क्योंकि समझौते की शर्तों के अनुसार केवल केंद्र सरकार ही इसे एकतरफा रद्द कर सकती है। उन्होंने आगाह किया कि यदि केरल इस योजना से अलग होता है, तो राज्य को ₹2,000 करोड़ से अधिक के केंद्रीय अनुदान से हाथ धोना पड़ सकता है। साथ ही उन्होंने पिछली एलडीएफ (वाम लोकतांत्रिक मोर्चा) सरकार पर बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के इस समझौते पर हस्ताक्षर करने का आरोप लगाया।
मुख्य घटनाक्रम
विधानसभा में प्रश्नोत्तर के दौरान शमसुद्दीन ने बताया कि पीएम श्री कार्यक्रम के तहत 152 ब्लॉकों में चुने गए 304 सरकारी स्कूलों के विकास के लिए लगभग ₹1,000 करोड़ निर्धारित हैं। इसके अतिरिक्त, 'समग्र शिक्षा' योजना के अंतर्गत केरल को मिलने वाले ₹1,151.48 करोड़ भी खतरे में पड़ सकते हैं, यदि राज्य समझौते से पीछे हटता है।
मंत्री ने कहा, 'केंद्र ने पहले भी केरल का वाजिब फंड रोका है। पूरी संभावना है कि अगर राज्य समझौते से पीछे हटता है, तो दूसरी ग्रांट पर भी असर पड़ सकता है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य और केंद्र के बीच वित्तीय संबंध पहले से ही तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं।
पिछली सरकार पर आरोप
शमसुद्दीन ने आरोप लगाया कि पिछली एलडीएफ सरकार ने इस समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले न तो हितधारकों से कोई सार्थक बातचीत की और न ही इसके दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन किया। उन्होंने कहा, 'रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे पता चले कि पिछली सरकार ने समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा की हो या कोई तैयारी की हो। यहाँ तक कि योजना की जाँच के लिए एलडीएफ सरकार द्वारा बनाई गई मंत्री-स्तरीय उप-समिति की एक बार भी बैठक नहीं हुई।'
गौरतलब है कि यह वही एलडीएफ है जिसकी मौजूदा यूडीएफ (संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा) सरकार उत्तराधिकारी है, और अब वही सरकार उन फैसलों के परिणाम भुगत रही है।
पाठ्यक्रम और शैक्षिक स्वायत्तता पर आपत्ति
मंत्री ने पीएम श्री योजना के कुछ प्रावधानों — विशेषकर पाठ्यक्रम और शैक्षणिक स्वतंत्रता से जुड़े — पर यूडीएफ सरकार की आपत्तियाँ भी दोहराईं। उन्होंने कहा, 'स्कूलों में क्या पढ़ाया जाए, यह राज्य का अधिकार होना चाहिए। ऐसे मुद्दों पर किसी पक्के समझौते में शामिल होने से पहले व्यापक बातचीत की जरूरत थी।'
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब कई गैर-भाजपा शासित राज्य केंद्र प्रायोजित शिक्षा योजनाओं में केंद्र के बढ़ते हस्तक्षेप को लेकर चिंता जता चुके हैं।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विधानसभा में मंत्री का बयान सुनने के बाद पूर्व शिक्षा मंत्री और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई(एम) — के वरिष्ठ नेता वी. शिवनकुट्टी ने मुस्लिम लीग और कांग्रेस पर एक ऐसी योजना लागू करने का आरोप लगाया, जिसे पिछली वामपंथी सरकार ने राज्य की शैक्षिक स्वायत्तता के लिए संभावित खतरा मानते हुए रोक दिया था।
आगे की राह
शमसुद्दीन ने स्पष्ट किया कि मौजूदा सरकार केंद्र से मिलने वाली आवश्यक सहायता को गँवाए बिना केरल के हितों की रक्षा के तरीके तलाश रही है। उन्होंने कहा, 'हमारी प्राथमिकता केंद्र से मिलने वाली हर जायज ग्रांट हासिल करना और उसका उपयोग सरकारी स्कूलों को मजबूत बनाने के लिए करना है।' राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच 304 सरकारी स्कूलों का भविष्य और केरल की शैक्षिक स्वायत्तता — दोनों ही दाँव पर हैं।