13 अगस्त 2026
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ओडिशा विजिलेंस ने ₹3.02 करोड़ गबन मामले में जगतसिंहपुर के दो पूर्व अधिकारी गिरफ्तार

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ओडिशा विजिलेंस ने ₹3.02 करोड़ गबन मामले में जगतसिंहपुर के दो पूर्व अधिकारी गिरफ्तार

सारांश

ओडिशा विजिलेंस ने टर्टोल ब्लॉक में एक दशक तक चली सुनियोजित वित्तीय धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया — ₹3.02 करोड़ का गबन, फर्जी वेतन बिल और रकम सीधे निजी खातों में। मुख्यमंत्री माझी की जीरो-टॉलरेंस नीति के बीच यह गिरफ्तारी प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा है।

मुख्य बातें

ओडिशा विजिलेंस ने 13 अगस्त 2026 को जगतसिंहपुर के टर्टोल ब्लॉक के दो पूर्व अधिकारियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपी हैं पूर्व SRA भंजा किशोर बेहरा और सेवानिवृत्त पूर्व PEO प्रदीपता कुमार मल्लिक ।
आरोप है कि 2011-12 से 2021-22 के बीच ₹3,02,95,000 का सरकारी फंड गबन किया गया।
फर्जी वेतन बिल बनाकर रकम आरोपियों के व्यक्तिगत बचत बैंक खातों में स्थानांतरित की गई।
मामला कटक विजिलेंस पुलिस स्टेशन में केस नंबर 30/26 के तहत दर्ज।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भ्रष्टाचार पर जीरो-टॉलरेंस नीति की पुष्टि की।

ओडिशा विजिलेंस ने जगतसिंहपुर जिले के टर्टोल ब्लॉक में ₹3.02 करोड़ के सरकारी फंड के कथित गबन के मामले में 13 अगस्त 2026 को दो पूर्व सरकारी अधिकारियों को गिरफ्तार किया। आरोप है कि इन अधिकारियों ने 2011-12 से 2021-22 के बीच सरकारी वेतन रजिस्टर और भुगतान दस्तावेजों में हेराफेरी कर यह रकम अपने व्यक्तिगत बैंक खातों में स्थानांतरित की।

गिरफ्तार अधिकारियों की पहचान

गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों में पहले हैं भंजा किशोर बेहरा, जो टर्टोल ब्लॉक के पूर्व सीनियर रेवेन्यू असिस्टेंट (SRA) हैं और वर्तमान में नौगांव तहसील में SRA के पद पर तैनात हैं। दूसरे आरोपी हैं प्रदीपता कुमार मल्लिक, जो टर्टोल ब्लॉक के पूर्व पंचायत एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (PEO) हैं और सेवानिवृत्त हो चुके हैं। विजिलेंस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इस धोखाधड़ी में एक तीसरे आरोपी, पूर्व असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर स्वर्गीय राजदीप हंसदा की भी संलिप्तता पाई गई है।

गबन का तरीका और जाँच के निष्कर्ष

विजिलेंस की गहन जाँच में सामने आया कि तीनों आरोपी अधिकारियों ने मिलकर एक सुनियोजित वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया। जाँच अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने स्वीकृत बजट से कहीं अधिक वेतन बिल तैयार कर जमा किए और गबन की गई ₹3,02,95,000 की रकम को सीधे अपने व्यक्तिगत बचत बैंक खातों में स्थानांतरित किया। यह धोखाधड़ी लगभग एक दशक तक चलती रही, जो प्रशासनिक निगरानी में गंभीर खामियों की ओर इशारा करती है।

कानूनी कार्रवाई

ओडिशा विजिलेंस ने 12 अगस्त 2026 को कटक विजिलेंस पुलिस स्टेशन में केस संख्या 30/26 दर्ज किया है। यह मामला प्रिवेंशन ऑफ करप्शन (अमेंडमेंट) एक्ट, 2018 की धारा 13(2) और 13(1)(A) के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409, 420, 467, 468, 471 और 34 के तहत दर्ज किया गया है।

मुख्यमंत्री की जीरो-टॉलरेंस नीति

इस गिरफ्तारी से अलग, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने हाल ही में गजपति जिले के गुरंडी कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (CHC) में तैनात पतितापाबन बारिक को सेवा से बर्खास्त कर दिया। बारिक को सुंदरगढ़ जिले के गुरुंडिया CHC में मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यकाल के दौरान दर्ज भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषी पाया गया था। मुख्यमंत्री माझी ने प्रशासन के सभी स्तरों पर भ्रष्टाचार के प्रति जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाने का स्पष्ट निर्देश दिया है और कहा है कि किसी भी दोषी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।

आगे क्या होगा

गिरफ्तार दोनों अधिकारियों को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की प्रक्रिया जारी है। विजिलेंस सूत्रों के अनुसार मामले में संपत्ति कुर्की और अन्य आरोपियों की संलिप्तता की भी जाँच की जा रही है। यह कार्रवाई ओडिशा सरकार की भ्रष्टाचार-विरोधी मुहिम के तहत की गई ताज़ा कड़ी कार्रवाइयों में से एक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो भर्ती और निगरानी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। असली जवाबदेही तभी सिद्ध होगी जब संपत्ति वसूली और उच्च-स्तरीय जाँच के नतीजे सामने आएँ।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा विजिलेंस ने टर्टोल ब्लॉक में किसे और क्यों गिरफ्तार किया?
ओडिशा विजिलेंस ने 13 अगस्त 2026 को टर्टोल ब्लॉक के पूर्व SRA भंजा किशोर बेहरा और सेवानिवृत्त पूर्व PEO प्रदीपता कुमार मल्लिक को ₹3.02 करोड़ के सरकारी फंड के कथित गबन के आरोप में गिरफ्तार किया। आरोप है कि दोनों ने 2011-12 से 2021-22 के बीच फर्जी वेतन बिल बनाकर सरकारी रकम अपने निजी खातों में डाली।
टर्टोल ब्लॉक गबन मामले में धोखाधड़ी कैसे की गई?
जाँच अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने सरकारी वेतन रजिस्टर और भुगतान दस्तावेजों में हेराफेरी की और स्वीकृत बजट से अधिक वेतन बिल तैयार कर जमा किए। गबन की गई ₹3,02,95,000 की रकम सीधे उनके व्यक्तिगत बचत बैंक खातों में स्थानांतरित की गई।
इस मामले में कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
ओडिशा विजिलेंस ने 12 अगस्त 2026 को कटक विजिलेंस पुलिस स्टेशन में केस नंबर 30/26 दर्ज किया है। यह मामला प्रिवेंशन ऑफ करप्शन (अमेंडमेंट) एक्ट, 2018 की धारा 13(2) और 13(1)(A) तथा IPC की धारा 409, 420, 467, 468, 471 और 34 के तहत दर्ज है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का भ्रष्टाचार पर क्या रुख है?
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने प्रशासन के सभी स्तरों पर भ्रष्टाचार के प्रति जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाने का निर्देश दिया है। उन्होंने हाल ही में एक दोषी मेडिकल ऑफिसर पतितापाबन बारिक को सेवा से बर्खास्त भी किया, जो इस नीति का व्यावहारिक उदाहरण है।
क्या इस मामले में और आरोपी हैं?
जाँच में तीसरे आरोपी के रूप में पूर्व असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर स्वर्गीय राजदीप हंसदा की संलिप्तता भी सामने आई है। विजिलेंस सूत्रों के अनुसार मामले में अन्य संभावित आरोपियों और संपत्ति कुर्की की जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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