ओडिशा: ₹1.08 करोड़ के सरकारी कोष गबन मामले में दंपति गिरफ्तार, 25 बैंक खातों की जांच शुरू
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा सतर्कता विभाग ने 7 मई 2026 को भुवनेश्वर में एक दंपति को सरकारी कोष से ₹1.08 करोड़ से अधिक की राशि के कथित गबन मामले में गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार विरोधी विभाग की उस चल रही जांच का हिस्सा है, जिसमें मलकानगिरी स्थित एक सहकारी बैंक के शाखा प्रबंधक को पहले ही हिरासत में लिया जा चुका है।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार दंपति की पहचान निवेदिता तराई और उनके लिव-इन पार्टनर नरसिंह प्रसाद खमारी के रूप में हुई है। सतर्कता विभाग के सूत्रों के अनुसार, दोनों लंबे समय से लिव-इन रिलेशनशिप में थे। इससे पहले 5 मई को विभाग ने कोरापुट सेंट्रल को-ऑपरेटिव (KCC) बैंक की मलकानगिरी शाखा के प्रबंधक सुधांशु खोरा को इसी मामले में गिरफ्तार किया था, जो अभी भी पुलिस हिरासत में हैं।
कैसे रची गई गबन की साजिश
सतर्कता विभाग ने बताया कि आरोपी सुधांशु खोरा का संपर्क निवेदिता तराई से फेसबुक के माध्यम से हुआ था। इसके बाद तीनों ने कथित तौर पर मिलकर बैंक की धनराशि हड़पने की योजना बनाई। जांच में यह सामने आया कि खोरा ने पकड़े जाने से बचने की साजिश के तहत गबन की गई लगभग ₹63 लाख की राशि तराई और खमारी को ट्रांसफर कर दी थी।
पेशेवर अपराधियों का जाल
विभाग ने अलग-अलग समानांतर जांच और पूछताछ के हवाले से बताया कि खमारी और तराई कथित तौर पर पेशेवर अपराधी हैं और उन्होंने अनेक लोगों को धोखा देकर इस तरह के कई घोटाले किए होंगे। विभाग की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बेंगलुरु पुलिस आयुक्त कार्यालय में खमारी के विरुद्ध ₹14 लाख की धोखाधड़ी का मामला पहले से दर्ज है। इसके अतिरिक्त, जगतसिंहपुर में ₹30 लाख की धोखाधड़ी की भी आशंका जताई गई है। बारीपाड़ा, पारादीप और भुवनेश्वर में भी इनके द्वारा धोखाधड़ी किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
25 बैंक खातों की जांच
सतर्कता विभाग के वित्त और बैंकिंग विशेषज्ञ अब तक विभिन्न बैंकों में आरोपियों के 25 बैंक खातों की जांच कर रहे हैं। यह जांच यह स्थापित करने की कोशिश कर रही है कि गबन की गई राशि किन-किन माध्यमों से स्थानांतरित की गई और क्या अन्य लोग भी इस नेटवर्क से जुड़े हैं। आगामी दिनों में जांच के दायरे के और विस्तृत होने की संभावना है।