14 जुलाई 2026
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केरल पीएम-श्री विवाद: पूर्व मंत्री सिवानकुट्टी ने कालियाडन के दावों को किया खारिज, एलडीएफ के रुख का बचाव

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केरल पीएम-श्री विवाद: पूर्व मंत्री सिवानकुट्टी ने कालियाडन के दावों को किया खारिज, एलडीएफ के रुख का बचाव

सारांश

केरल के पूर्व शिक्षा मंत्री सिवानकुट्टी ने पीएम-श्री विवाद में पूर्व सीएम विजयन के करीबी कालियाडन के दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया। उन्होंने कहा — एलडीएफ ने न योजना लागू की, न केंद्र से फंड लिया। साथ ही भाजपा चुनाव खर्च में कथित अनियमितताओं की जाँच की माँग भी की।

मुख्य बातें

पूर्व शिक्षा मंत्री वी.
सिवानकुट्टी ने 13 जुलाई को पीएम-श्री योजना पर एलडीएफ के रुख का बचाव किया।
उन्होंने रतीश कालियाडन के इस दावे को खारिज किया कि एमओयू के बाद केरल कानूनी रूप से योजना से नहीं हट सकता।
एलडीएफ सरकार ने न पीएम-श्री लागू की, न ही इसके तहत केंद्र से कोई फंड लिया।
₹92.41 करोड़ के दावे को खारिज किया — यह राशि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत राज्य के खर्च से संबंधित है।
सतीसन कैबिनेट ने पीएम-श्री के भविष्य पर विचार के लिए कैबिनेट उप-समिति गठित की है।
सिवानकुट्टी ने भाजपा चुनाव प्रचार में ₹3.5 करोड़ के झंडा ठेके सहित कथित वित्तीय अनियमितताओं की पुलिस जाँच की माँग की।

केरल के पूर्व सामान्य शिक्षा मंत्री वी. सिवानकुट्टी ने सोमवार, 13 जुलाई को पीएम-श्री स्कूल योजना पर पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार के रुख का जोरदार बचाव किया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के अतिरिक्त निजी सचिव रतीश कालियाडन के इस दावे को तथ्यात्मक रूप से गलत ठहराया कि समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर के बाद केरल कानूनी तौर पर इस योजना से एकतरफा नहीं हट सकता।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह प्रतिक्रिया कालियाडन के एक लेख के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने कैबिनेट की चर्चा के बिना एमओयू पर हस्ताक्षर को एक प्रशासनिक कमी बताया था। पूर्व नौकरशाह ने तर्क दिया था कि एमओयू की शर्तों के अनुसार, इसे समाप्त करने का अधिकार 30 दिन के नोटिस के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के पास था, जिससे राज्य का एकतरफा बाहर निकलना कानूनी रूप से संभव नहीं था। हालाँकि, उन्होंने यह भी सुझाया कि मौजूदा वी.डी. सतीसन सरकार एलडीएफ के राजनीतिक रुख को जारी रख सकती है।

सिवानकुट्टी का पलटवार

सिवानकुट्टी ने स्पष्ट किया कि पीएम-श्री योजना को लागू करने के मामले में किसी को भी पूर्व मुख्यमंत्री के अतिरिक्त निजी सचिव से सलाह लेने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि एलडीएफ सरकार का रुख — योजना की कानूनी वैधता और एमओयू को लेकर — पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और स्वयं उनके द्वारा विधानसभा के भीतर और बाहर कई बार स्पष्ट किया जा चुका है।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भले ही एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे, एलडीएफ सरकार ने न तो योजना को लागू करने की दिशा में कोई कदम उठाया और न ही इसके तहत केंद्र से कोई वित्तीय सहायता ली। उनके अनुसार, राज्य के पास इस परियोजना को लागू न करने का पूरा अधिकार था।

₹92.41 करोड़ के दावे पर स्पष्टीकरण

सिवानकुट्टी ने उन दावों को भी सिरे से नकार दिया जिनमें कहा गया था कि केरल को पीएम-श्री योजना के तहत ₹92.41 करोड़ मिले हैं। उन्होंने कहा कि यह राशि वास्तव में 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम' के तहत 2023-24 और 2025-26 के बीच राज्य द्वारा पहले ही किए गए खर्च को दर्शाती है और इसे पीएम-श्री योजना के तहत प्राप्त सहायता के रूप में प्रस्तुत करना भ्रामक है।

राजनीतिक आरोप और भाजपा पर निशाना

सिवानकुट्टी ने आरोप लगाया कि कालियाडन के बयानों से केवल यूडीएफ-भाजपा गठबंधन को राजनीतिक लाभ होगा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह बयान मौजूदा यूडीएफ सरकार में कोई पद पाने की उम्मीद में दिया गया था, और कहा कि ऐसे बयान मौकापरस्त सोच को उजागर करते हैं।

इसके साथ ही, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं की व्यापक पुलिस जाँच की माँग की। इन कथित अनियमितताओं में हेलीकॉप्टर और वाहनों के किराए में कथित गबन तथा एक करोड़ पार्टी झंडे बनवाने के लिए ₹3.5 करोड़ के ठेके में कथित गड़बड़ी शामिल है।

आगे क्या होगा

यह विवाद ऐसे समय में और गहरा हो गया है जब मौजूदा वी.डी. सतीसन कैबिनेट ने पीएम-श्री कार्यक्रम के भविष्य पर विचार करने के लिए एक कैबिनेट उप-समिति गठित की है। यह कदम उस एमओयू के संदर्भ में उठाया गया है जिस पर विजयन सरकार ने हस्ताक्षर किए थे। केरल में शिक्षा नीति और केंद्र-राज्य संबंधों पर यह बहस आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि केरल की राजनीति में बदलती वफादारियों और केंद्र-राज्य शिक्षा नीति की टकराहट का आईना है। कालियाडन का लेख — जो एलडीएफ के भीतर से ही एमओयू प्रक्रिया पर सवाल उठाता है — यह दर्शाता है कि सत्ता परिवर्तन के बाद पुराने सहयोगी भी नई स्थिति के अनुसार ढलने लगते हैं। सिवानकुट्टी का पलटवार इस बात की याद दिलाता है कि राजनीतिक निष्ठा और नौकरशाही की 'तटस्थता' के बीच की रेखा कितनी धुंधली हो सकती है। असली सवाल यह है कि सतीसन सरकार की कैबिनेट उप-समिति अंततः किस दिशा में जाएगी — और क्या केरल के स्कूल इस राजनीतिक खींचतान की कीमत चुकाते रहेंगे।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम-श्री स्कूल योजना क्या है और केरल का इससे क्या विवाद है?
पीएम-श्री (PM SHRI) केंद्र सरकार की एक स्कूल उन्नयन योजना है जिसके तहत राज्यों को एमओयू साइन कर केंद्रीय वित्तीय सहायता मिलती है। केरल में एलडीएफ सरकार ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए लेकिन योजना लागू नहीं की, और अब सतीसन सरकार के दौर में इसकी कानूनी और राजनीतिक स्थिति पर बहस छिड़ी है।
रतीश कालियाडन ने क्या दावा किया था?
पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के अतिरिक्त निजी सचिव रतीश कालियाडन ने अपने एक लेख में कहा था कि कैबिनेट की चर्चा के बिना एमओयू पर हस्ताक्षर एक कमी थी और एमओयू की शर्तों के अनुसार 30 दिन के नोटिस के बाद समझौता समाप्त करने का अधिकार केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के पास था, इसलिए केरल एकतरफा बाहर नहीं निकल सकता।
सिवानकुट्टी ने ₹92.41 करोड़ के दावे को क्यों खारिज किया?
सिवानकुट्टी के अनुसार, यह राशि पीएम-श्री योजना के तहत केंद्र से मिली सहायता नहीं है, बल्कि 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम' के तहत 2023-24 और 2025-26 के बीच राज्य द्वारा पहले ही किए गए खर्च को दर्शाती है। इसे पीएम-श्री फंडिंग के रूप में प्रस्तुत करना भ्रामक है।
वी.डी. सतीसन सरकार ने पीएम-श्री पर क्या कदम उठाया है?
मौजूदा वी.डी. सतीसन कैबिनेट ने पीएम-श्री कार्यक्रम के भविष्य पर विचार करने के लिए एक कैबिनेट उप-समिति गठित की है। यह कदम उस एमओयू के संदर्भ में है जिस पर पूर्ववर्ती विजयन सरकार ने हस्ताक्षर किए थे।
सिवानकुट्टी ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए?
सिवानकुट्टी ने भाजपा के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं की व्यापक पुलिस जाँच की माँग की। इनमें हेलीकॉप्टर और वाहनों के किराए में कथित गबन तथा एक करोड़ पार्टी झंडे बनवाने के लिए ₹3.5 करोड़ के ठेके में कथित गड़बड़ी शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
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