1 अगस्त 2026
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पीएम श्री योजना पर केरल कैबिनेट की उप-समिति गठित, सतीशन बोले — राज्य के अधिकारों से समझौता नहीं

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पीएम श्री योजना पर केरल कैबिनेट की उप-समिति गठित, सतीशन बोले — राज्य के अधिकारों से समझौता नहीं

सारांश

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने पीएम श्री योजना पर साफ कहा — फंड लिया जा चुका है, पर राज्य की शिक्षा नीति से समझौता नहीं। चार सदस्यीय मंत्रिस्तरीय उप-समिति तय करेगी आगे का रास्ता। साथ ही पिछली Left सरकार पर कैबिनेट को बताए बिना समझौते पर दस्तखत करने का गंभीर आरोप।

मुख्य बातें

केरल सरकार ने पीएम श्री योजना पर भविष्य का रुख तय करने के लिए चार सदस्यीय मंत्रिस्तरीय उप-समिति गठित की।
CM वीडी सतीशन ने कहा कि राज्य को केंद्र से ₹99 करोड़ मिल चुके हैं और ₹106 करोड़ और मंजूर हुए हैं।
सतीशन का रुख — पाठ्यक्रम और स्कूल चयन का अधिकार राज्य का है, केंद्र का नहीं।
पूर्ववर्ती Left सरकार पर आरोप — कैबिनेट को बताए बिना पीएम श्री समझौते पर हस्ताक्षर किए।
गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ संयुक्त रणनीति पर बातचीत हुई।
नई सरकार का पहला 100-दिन का कार्यक्रम 1 जुलाई 2026 से शुरू होगा।

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने 17 जून 2026 को तिरुवनंतपुरम में साप्ताहिक कैबिनेट बैठक के बाद स्पष्ट किया कि राज्य सरकार पीएम श्री योजना पर अपनी शिक्षा नीति से बिना समझौता किए आगे बढ़ने का रास्ता तलाशेगी। इस मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए केरल सरकार ने चार सदस्यीय मंत्रिस्तरीय उप-समिति का गठन किया है, जो राज्य का भविष्य का रुख तय करेगी।

पीएम श्री योजना और केरल का जुड़ाव

सतीशन ने बताया कि पिछली वामपंथी (Left Front) सरकार द्वारा समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद केरल पीएम श्री योजना का हिस्सा बन गया। राज्य को केंद्र से अब तक ₹99 करोड़ की राशि मिल चुकी है और उसका उपयोग हो चुका है। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार ने ₹106 करोड़ और मंजूर किए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, 'केरल अब पीएम श्री का हिस्सा है क्योंकि हम पहले ही फंड ले चुके हैं। हमारे सामने सवाल यह है कि बिना समझौता किए आगे कैसे बढ़ा जाए।'

राज्य का वैचारिक रुख

सतीशन ने स्पष्ट किया कि केरल सरकार का सैद्धांतिक रुख यह है कि पाठ्यक्रम निर्धारण और स्कूलों का चयन केंद्र का नहीं, बल्कि राज्य का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति पर राज्य की स्वायत्तता से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है।

यह ऐसे समय में आया है जब कई गैर-भाजपा शासित राज्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) से जुड़ी केंद्रीय योजनाओं में भागीदारी को लेकर अपनी शर्तें रखने की कोशिश कर रहे हैं। सतीशन ने बताया कि इस मुद्दे पर गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ भी संयुक्त रणनीति की संभावना तलाशने के लिए बातचीत हुई है।

पिछली सरकार पर आरोप

सतीशन ने पूर्ववर्ती वामपंथी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार तत्कालीन मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने कैबिनेट को सूचित किए बिना पीएम श्री समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए, जबकि सार्वजनिक रूप से यह कहा जाता रहा था कि वे इस पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे।

गौरतलब है कि यह आरोप राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि इससे पारदर्शिता और कैबिनेट की सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांत पर सवाल उठते हैं।

प्रशासनिक सुधार और अन्य घोषणाएँ

कैबिनेट बैठक में प्रशासनिक सुधारों पर भी चर्चा हुई। सतीशन ने बताया कि वित्त विभाग में फाइलों के बैकलॉग के कारण निर्णय लेने में देरी हो रही है। इसके समाधान के लिए हर विभाग में संयुक्त सचिव स्तर के एकीकृत वित्तीय सलाहकार नियुक्त किए जाएंगे।

पुराने खरीद मैनुअल की समीक्षा भी कैबिनेट उप-समिति करेगी। साथ ही, नई सरकार का पहला 100-दिन का कार्यक्रम 1 जुलाई से शुरू होने की घोषणा की गई।

विपक्ष के आरोपों पर सतीशन का जवाब

तीन कुलपतियों (Vice-Chancellors) के एक संघ-संबद्ध कार्यक्रम में शामिल होने पर हो रही आलोचना के जवाब में सतीशन ने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में भी चार कुलपति ऐसे ही कार्यक्रम में शामिल हुए थे, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री चुप रहे थे। उन्होंने वामपंथी विपक्ष पर 'गलत बातें' फैलाने का आरोप लगाया।

सहकारी विभाग की फीस वृद्धि, मुफ्त यात्रा योजना से पहले बसें हटाने और राशन वितरण में रुकावट के आरोपों को भी सतीशन ने बेबुनियाद बताते हुए खारिज किया।

उप-समिति की रिपोर्ट आने के बाद केरल का अंतिम रुख स्पष्ट होगा — और यह तय करेगा कि राज्य केंद्र के साथ शिक्षा क्षेत्र में किन शर्तों पर आगे बढ़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसी ने कथित तौर पर चुपचाप समझौते पर दस्तखत कर दिए — और अब कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार उस विरासत को संभालते हुए वैचारिक विरोध और व्यावहारिक मजबूरी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। गैर-भाजपा राज्यों में संयुक्त मोर्चे की कोशिश राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन जब तक ₹106 करोड़ की अगली किस्त सामने हो, तब तक 'सिद्धांत बनाम फंड' का यह द्वंद्व और गहरा होगा।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम श्री योजना क्या है और केरल इससे क्यों जुड़ा?
पीएम श्री (PM SHRI) केंद्र सरकार की एक योजना है जिसके तहत देशभर में चुनिंदा स्कूलों को 'मॉडल स्कूल' के रूप में विकसित किया जाता है। केरल पिछली Left सरकार द्वारा समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद इस योजना का हिस्सा बना और राज्य को ₹99 करोड़ की राशि पहले ही मिल चुकी है।
केरल सरकार ने पीएम श्री पर उप-समिति क्यों बनाई?
CM वीडी सतीशन के अनुसार, राज्य की शिक्षा नीति की स्वायत्तता से बिना समझौता किए योजना में आगे बढ़ने का रास्ता तलाशना जरूरी है। इसी के लिए चार सदस्यीय मंत्रिस्तरीय उप-समिति का गठन किया गया है जो राज्य का भविष्य का रुख तय करेगी।
केरल सरकार का पीएम श्री योजना पर मुख्य आपत्ति क्या है?
केरल सरकार का मानना है कि पाठ्यक्रम तय करने और स्कूलों का चयन करने का अधिकार राज्य का है, केंद्र का नहीं। CM सतीशन ने स्पष्ट किया कि शिक्षा नीति में राज्य की स्वायत्तता से किसी भी स्थिति में समझौता स्वीकार्य नहीं है।
पिछली Left सरकार पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
CM सतीशन ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती Left सरकार के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने कैबिनेट को सूचित किए बिना ही पीएम श्री समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए, जबकि सार्वजनिक रूप से यह कहा जाता रहा था कि वे इस पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे।
केरल में प्रशासनिक सुधार के तहत क्या नई व्यवस्था होगी?
वित्त विभाग में फाइलों के बैकलॉग को दूर करने के लिए हर विभाग में संयुक्त सचिव स्तर के एकीकृत वित्तीय सलाहकार नियुक्त किए जाएंगे। पुराने खरीद मैनुअल की समीक्षा कैबिनेट उप-समिति करेगी और नई सरकार का 100-दिन का कार्यक्रम 1 जुलाई 2026 से शुरू होगा।
राष्ट्र प्रेस
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