29 जून 2026
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केरल CM सतीशन ने LDF की महिला सुरक्षा योजना की समीक्षा के दिए संकेत, चुनावी मंशा पर उठाए सवाल

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केरल CM सतीशन ने LDF की महिला सुरक्षा योजना की समीक्षा के दिए संकेत, चुनावी मंशा पर उठाए सवाल

सारांश

केरल के नए मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने LDF की महिला सुरक्षा योजना को सीधे निशाने पर लिया — आरोप है कि 31 लाख से घटाकर 16 लाख लाभार्थी और चुनाव से 33 दिन पहले लॉन्च, यह कल्याण नहीं बल्कि वोट की राजनीति थी। ₹1,950 करोड़ का फैसला अब जाँच के बाद होगा।

मुख्य बातें

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने 29 जून 2026 को विधानसभा में LDF की महिला सुरक्षा योजना की समीक्षा के संकेत दिए।
योजना 11 फरवरी 2026 को लागू हुई थी — चुनाव अधिसूचना ( 16 मार्च 2026 ) से केवल 33 दिन पहले ; पहली किस्त आदर्श आचार संहिता लागू होने के दिन दी गई।
लाभार्थियों की संख्या 31.34 लाख से घटाकर 16.4 लाख की गई — चयन प्रक्रिया पर सवाल।
राज्य बजट में योजना के लिए ₹1,950 करोड़ का प्रावधान; अंतिम निर्णय जाँच के बाद।
नई सरकार ने पहली कैबिनेट में महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा और आशा कार्यकर्ताओं को ₹3,000 मानदेय वृद्धि दी।

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने सोमवार, 29 जून 2026 को विधानसभा में स्पष्ट किया कि पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार की प्रमुख महिला सुरक्षा योजना बिना जाँच के जारी नहीं रहेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह योजना कल्याणकारी उद्देश्य से नहीं, बल्कि महिला मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए विधानसभा चुनाव से महज एक महीने पहले जल्दबाजी में शुरू की गई थी।

योजना की पृष्ठभूमि और विवाद

सतीशन ने बताया कि पिछली LDF सरकार ने यह योजना 11 फरवरी 2026 को लागू की थी — विधानसभा चुनाव की अधिसूचना 16 मार्च 2026 से केवल 33 दिन पहले। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पहली किस्त का भुगतान उसी दिन किया गया जब आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू हुई थी, जो उनके अनुसार योजना की राजनीतिक मंशा को उजागर करती है।

गौरतलब है कि LDF ने इस योजना के तहत शुरुआत में 31.34 लाख लाभार्थियों का अनुमान लगाया था, जिसे बाद में घटाकर 16.4 लाख कर दिया गया। सतीशन ने इस भारी कटौती को लाभार्थी चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल के रूप में पेश किया।

चयन प्रक्रिया पर गंभीर आरोप

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आवेदनों को स्थानीय निकाय सचिवों द्वारा कुछ ही दिनों में बिना उचित सत्यापन के निपटाया गया। उन्होंने कहा, 'यह भी जाँच नहीं की गई कि आवेदक पहले से किसी अन्य सरकारी पेंशन योजना का लाभ तो नहीं ले रहे हैं।' सतीशन के अनुसार, जमीनी स्तर पर सत्यापन की पूरी तरह अनदेखी की गई और लाभार्थियों का चयन तय प्रक्रियाओं के विरुद्ध हुआ।

सरकार की मौजूदा स्थिति

सतीशन ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ने अभी इस योजना को बंद करने का कोई निर्णय नहीं लिया है। राज्य बजट में इस योजना के लिए ₹1,950 करोड़ का प्रावधान बरकरार है। अंतिम निर्णय शिकायतों की विस्तृत जाँच के बाद ही लिया जाएगा।

उन्होंने LDF पर यह भी कटाक्ष किया कि उसने 120 महीने तक केरल में शासन किया, लेकिन महिला सुरक्षा योजना को अपने कार्यकाल के अंतिम महीने में ही लागू किया — वह भी तब, जब उसे स्थानीय निकाय चुनावों में झटका लग चुका था।

नई सरकार के महिला-कल्याण कदम

अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाते हुए सतीशन ने बताया कि नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा और आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में ₹3,000 की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई। इसके अलावा आंगनवाड़ी शिक्षकों, सहायकों और प्री-प्राइमरी शिक्षकों के वेतन में भी वृद्धि की गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली LDF सरकार ने आशा कार्यकर्ताओं के लंबे आंदोलन की अनदेखी की और उनकी माँगों का समाधान करने के बजाय उनका मजाक उड़ाया।

आगे क्या होगा

योजना का भविष्य अब शिकायत जाँच की प्रक्रिया पर निर्भर है। यदि जाँच में अनियमितताएँ साबित होती हैं, तो सरकार लाभार्थी सूची में बड़े बदलाव कर सकती है या योजना के ढाँचे को पुनर्गठित कर सकती है। ₹1,950 करोड़ के बजट प्रावधान और 16.4 लाख लाभार्थियों के भविष्य को लेकर राजनीतिक तनाव बने रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उत्तर प्रदेश हो या अब केरल। असली सवाल यह है कि क्या जाँच का दायरा वास्तविक अनियमितताओं को उजागर करेगा, या यह महज राजनीतिक पुनर्लेखन का औजार बनेगी। 16.4 लाख लाभार्थियों — जिनमें से अधिकांश आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाएँ हो सकती हैं — के लिए अनिश्चितता का यह दौर कल्याणकारी योजनाओं को राजनीतिक हथियार बनाने की कीमत को रेखांकित करता है। ₹1,950 करोड़ का बजट प्रावधान बरकरार रखना सतर्कता दिखाता है, लेकिन जाँच की समयसीमा और स्वतंत्रता तय करेगी कि यह समीक्षा जवाबदेही है या विरोधी राजनीति।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल की महिला सुरक्षा योजना क्या है और विवाद क्यों है?
यह LDF सरकार द्वारा 11 फरवरी 2026 को शुरू की गई योजना है, जिसके तहत 16.4 लाख महिला लाभार्थियों को वित्तीय सहायता दी जानी थी। विवाद इसलिए है क्योंकि नई सरकार का आरोप है कि इसे चुनाव से महज 33 दिन पहले बिना उचित सत्यापन के जल्दबाजी में लागू किया गया।
क्या केरल सरकार इस योजना को बंद कर देगी?
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने स्पष्ट किया है कि अभी योजना बंद करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। राज्य बजट में ₹1,950 करोड़ का प्रावधान बरकरार है और अंतिम फैसला शिकायतों की जाँच पूरी होने के बाद ही होगा।
लाभार्थियों की संख्या 31 लाख से 16 लाख कैसे हो गई?
LDF सरकार ने शुरुआत में 31.34 लाख लाभार्थियों का अनुमान लगाया था, जिसे बाद में घटाकर 16.4 लाख कर दिया गया। नई सरकार इस कटौती को चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी का संकेत मानती है और कहती है कि आवेदनों की बिना उचित जाँच के निपटारा किया गया।
नई केरल सरकार ने महिलाओं के लिए क्या नए कदम उठाए हैं?
वीडी सतीशन की सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा और आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में ₹3,000 की बढ़ोतरी को मंजूरी दी। आंगनवाड़ी शिक्षकों, सहायकों और प्री-प्राइमरी शिक्षकों के वेतन में भी वृद्धि की गई है।
LDF ने 120 महीने शासन किया, तो योजना अंत में क्यों लाई?
मुख्यमंत्री सतीशन ने यही सवाल उठाया है — LDF ने 120 महीने शासन किया, लेकिन महिला सुरक्षा योजना अंतिम महीने में लागू की, जब उसे स्थानीय निकाय चुनावों में झटका लग चुका था। उनके अनुसार यह घोषणापत्र वादा होता तो पहले ही लागू होती।
राष्ट्र प्रेस
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