क्या झारखंड में हेमंत सोरेन को ईडी समन की अवहेलना से जुड़ी केस में हाईकोर्ट से झटका मिला?

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क्या झारखंड में हेमंत सोरेन को ईडी समन की अवहेलना से जुड़ी केस में हाईकोर्ट से झटका मिला?

सारांश

क्या मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है? जानिए रांची भूमि घोटाले से जुड़े समन की अवहेलना के मामले में क्या हुआ है। इस नाटकीय घटनाक्रम में कानून और राजनीति के बीच का संघर्ष देखने को मिला है।

Key Takeaways

  • ईडी ने हेमंत सोरेन को 10 बार समन भेजा।
  • हाईकोर्ट ने राहत दी, लेकिन मामला जारी है।
  • राजनीति और कानून के बीच संघर्ष देखने को मिल रहा है।
  • मुख्यमंत्री ने ईडी के समनों का जवाब दिया था।
  • मामला एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहा है।

रांची, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। रांची के प्रसिद्ध भूमि घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जारी समन की अवहेलना के आरोप से जुड़े मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को झारखंड हाईकोर्ट से झटका मिला है। जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की बेंच ने इस मामले में हेमंत सोरेन के खिलाफ एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहे केस को समाप्त करने की याचिका खारिज कर दी है।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इस मामले में मुख्यमंत्री को निचली अदालत में उपस्थित होने से पहले छूट प्रदान की है। ईडी की शिकायत के आधार पर एमपी-एमएलए कोर्ट ने संज्ञान लिया और न्यायिक कार्यवाही आरंभ की। मुख्यमंत्री ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी और इसे खारिज करने का अनुरोध किया। ईडी ने फरवरी 2024 में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) अदालत में हेमंत सोरेन के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी।

एजेंसी का कहना है कि रांची के बड़गाईं अंचल से जुड़े कथित भूमि घोटाले में पूछताछ के लिए उन्हें कई बार समन भेजे गए थे। ईडी के अनुसार, सबसे पहले 14 अगस्त 2023 को समन भेजा गया था। इसके बाद 2023 में 19 अगस्त, 1 सितंबर, 17 सितंबर, 26 सितंबर, 11 दिसंबर, 29 दिसंबर और 2024 में 13 जनवरी, 22 जनवरी तथा 27 जनवरी को भी समन भेजे गए। कुल 10 समन जारी हुए, लेकिन हेमंत सोरेन केवल दो समनों पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए।

एजेंसी का दावा है कि यह प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की धारा 63 और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 174 का उल्लंघन है। सीजेएम कोर्ट ने इस शिकायत पर 4 मार्च 2024 को संज्ञान लिया था, जिसके बाद मामला एमपी-एमएलए विशेष अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया।

हेमंत सोरेन ने संज्ञान लेने की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि जिन समनों पर वह उपस्थित नहीं हुए थे, उनके लिखित जवाब उन्होंने ईडी को भेज दिए थे। पुराने समन समाप्त होने के बाद नए समन पर उन्होंने हाजिरी दी थी और एजेंसी के निर्देशों का पालन किया था। उनका कहना है कि ईडी ने दुर्भावना से प्रेरित होकर अनावश्यक रूप से बार-बार समन भेजे।

Point of View

वहीं दूसरी तरफ कानून की प्रक्रिया भी अपनी गति से आगे बढ़ रही है। यह मामला न केवल झारखंड बल्कि समस्त देश के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बताता है कि कानून किसी भी व्यक्ति पर लागू होता है, चाहे उनकी राजनीतिक स्थिति कुछ भी हो।
NationPress
15/01/2026

Frequently Asked Questions

ईडी ने हेमंत सोरेन को कितनी बार समन भेजा?
ईडी ने कुल 10 बार हेमंत सोरेन को समन भेजा था।
क्या हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन को राहत दी?
हां, हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन को निचली अदालत में उपस्थित होने से पहले छूट दी है।
मामला किस अदालत में चल रहा है?
मामला एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहा है।
ईडी के खिलाफ हेमंत सोरेन ने क्या कहा?
हेमंत सोरेन ने कहा कि उन्होंने ईडी को समनों का लिखित जवाब भेजा था।
क्या यह मामला राजनीतिक है?
यह मामला कानून और राजनीति के बीच का संघर्ष दर्शाता है।
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