24 सितंबर 2026
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बड़गाईं जमीन-मनी लॉन्ड्रिंग केस: CM हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से PMLA अदालत में पेश, 30 सितंबर को अगली सुनवाई

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बड़गाईं जमीन-मनी लॉन्ड्रिंग केस: CM हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से PMLA अदालत में पेश, 30 सितंबर को अगली सुनवाई

सारांश

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में PMLA अदालत के सामने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हुए। आरोप गठन पर अगली अहम सुनवाई 30 सितंबर को होगी — जब अदालत के फैसले पर राज्य की राजनीति की नज़र टिकी है।

मुख्य बातें

CM हेमंत सोरेन 24 सितंबर 2026 को बड़गाईं मनी लॉन्ड्रिंग केस में PMLA अदालत के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से उपस्थित हुए।
मुख्य मुद्दा उनके खिलाफ आरोप गठन (फ्रेमिंग ऑफ चार्ज) की प्रक्रिया थी।
अदालत ने अगली सुनवाई 30 सितंबर 2026 , सुबह 11:15 बजे के लिए तय की।
ईडी ने सोरेन समेत करीब 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है; 16 अन्य के खिलाफ आरोप पहले ही गठित।
झारखंड उच्च न्यायालय ने सोरेन की डिस्चार्ज पिटीशन खारिज करने का आदेश बरकरार रखा था।
मामला रांची के बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और फर्जी दस्तावेज़ निर्माण से जुड़ा है।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को रांची के बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये उपस्थित हुए। इस सुनवाई में मुख्य बिंदु उनके खिलाफ आरोप गठन (फ्रेमिंग ऑफ चार्ज) की प्रक्रिया थी। अदालत ने अगली सुनवाई 30 सितंबर को सुबह 11:15 बजे के लिए निर्धारित की है।

अदालत में क्या हुआ

सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री सोरेन ने पीएमएलए की विशेष अदालत से मामले से संबंधित दस्तावेज़ों के अवलोकन हेतु अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया। अदालत ने इस पर स्पष्ट टिप्पणी की कि वर्तमान चरण आरोप गठन का है, दस्तावेज़ निरीक्षण का नहीं। फिर भी, मुख्यमंत्री के आग्रह पर विचार करते हुए अदालत ने 30 सितंबर 2026 को अगली तारीख तय की।

ईडी की जाँच और आरोपी

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस मामले में बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ विवादित जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण, फर्जी दस्तावेज़ निर्माण और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की गहन जाँच कर रहा है। ईडी अब तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत करीब 18 आरोपियों के विरुद्ध अदालत में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।

इन आरोपियों में पूर्व राजस्वकर्मी भानु प्रताप प्रसाद, अंतू तिर्की, आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह, बिजेंद्र सिंह, बिपिन सिंह, प्रियरंजन सहाय, मनोज कुमार यादव, कुमार राजश्री, राजकुमार पाहन, संजीत कुमार, शेखर कुशवाहा, तापस घोष, मोहम्मद इरशाद अख्तर, अफसर अली, मोहम्मद सद्दाम हुसैन और मोहम्मद इरशाद शामिल हैं। पीएमएलए की विशेष अदालत इन 16 अन्य आरोपियों के खिलाफ पहले ही आरोप गठित कर चुकी है।

झारखंड हाईकोर्ट का फैसला और पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि हाल ही में झारखंड उच्च न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा मुख्यमंत्री सोरेन की डिस्चार्ज पिटीशन खारिज किए जाने के आदेश को बरकरार रखा था। इस फैसले के बाद उनके खिलाफ आरोप गठन की न्यायिक प्रक्रिया का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया था।

यह मामला ऐसे समय में सुर्खियों में है जब झारखंड में राजनीतिक सक्रियता चरम पर है। सोरेन के खिलाफ चल रही यह कानूनी प्रक्रिया राज्य की सत्ता-राजनीति पर गहरी छाया डाल रही है।

आगे क्या होगा

अब 30 सितंबर 2026 को सुबह 11:15 बजे पीएमएलए की विशेष अदालत में आरोप गठन के बिंदु पर आगे की सुनवाई होगी। यदि अदालत उस दिन आरोप तय कर देती है, तो मुख्यमंत्री सोरेन को इस केस में आधिकारिक रूप से अभियुक्त माना जाएगा और मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि सोरेन पहले भी जमीन मामले में ईडी की हिरासत में रह चुके हैं। असली सवाल यह है कि 30 सितंबर को आरोप गठन होता है या टलता है — राजनीतिक समीकरणों की दृष्टि से दोनों स्थितियों के अलग-अलग निहितार्थ हैं। झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा डिस्चार्ज पिटीशन खारिज रखने के बाद न्यायिक रास्ता साफ है, लेकिन प्रक्रियागत देरी की गुंजाइश भी बनी रहती है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बड़गाईं जमीन मनी लॉन्ड्रिंग केस क्या है?
यह रांची के बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण, फर्जी दस्तावेज़ निर्माण और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा मामला है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत करीब 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
हेमंत सोरेन के खिलाफ अगली सुनवाई कब है?
पीएमएलए की विशेष अदालत ने आरोप गठन पर अगली सुनवाई 30 सितंबर 2026 को सुबह 11:15 बजे निर्धारित की है। इसी तारीख को यह तय होगा कि मुख्यमंत्री सोरेन के खिलाफ आधिकारिक रूप से आरोप तय किए जाएँ या नहीं।
क्या झारखंड हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन को राहत दी है?
नहीं। झारखंड उच्च न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा सोरेन की डिस्चार्ज पिटीशन खारिज किए जाने के आदेश को बरकरार रखा है। इससे उनके खिलाफ आरोप गठन की न्यायिक प्रक्रिया का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
इस मामले में कुल कितने आरोपी हैं?
ईडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत करीब 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इनमें से 16 अन्य आरोपियों के खिलाफ पीएमएलए की विशेष अदालत पहले ही आरोप गठित कर चुकी है।
फ्रेमिंग ऑफ चार्ज (आरोप गठन) का क्या मतलब है?
आरोप गठन वह न्यायिक प्रक्रिया है जिसमें अदालत यह तय करती है कि अभियोजन पक्ष के पास किसी आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सामग्री है या नहीं। यदि आरोप तय हो जाते हैं तो औपचारिक सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होती है।
राष्ट्र प्रेस
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