जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन: मणिकम टैगोर ने स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया, अमित शाह से संसद में जवाब माँगा
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर बी. ने 5 अगस्त 2026 को लोकसभा महासचिव को पत्र भेजकर स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। तमिलनाडु के विरुधुनगर से निर्वाचित इस सांसद ने 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संसद में विस्तृत बयान देने की माँग की है।
स्थगन प्रस्ताव में क्या है
मणिकम टैगोर ने अपने पत्र में कहा कि जंतर-मंतर पर हुई इस घटना से जुड़ी खबरों और आरोपों ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए इस्तेमाल किए गए बल के तरीके और उसकी उचित मात्रा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनके अनुसार, आरोप है कि छात्रों के खिलाफ लाठीचार्ज, पैलेट गन, आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया, जिससे लोग घायल हुए।
सांसद ने लिखा, 'इन आरोपों की पूरी, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की आवश्यकता है।' उन्होंने यह भी माँग की कि इस घटना की सच्चाई का पता लगाने के लिए एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और समय-सीमा वाली न्यायिक जाँच का आदेश दिया जाए।
सांसद के प्रमुख सवाल
मणिकम टैगोर ने सदन के माध्यम से सरकार से कई तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि पुलिस कार्रवाई का आदेश किसने दिया और क्या बल का प्रयोग संवैधानिक प्रावधानों तथा स्थापित पुलिस प्रक्रियाओं के अनुरूप था। साथ ही उन्होंने जानना चाहा कि क्या पुलिस के कथित दुर्व्यवहार या अत्यधिक बल प्रयोग को लेकर कोई शिकायत दर्ज हुई है और उस पर क्या कार्रवाई हुई।
एफआईआर वापसी और संवाद की माँग
सांसद ने माँग की कि दिल्ली विरोध-प्रदर्शनों के सिलसिले में छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तुरंत वापस ली जाएँ। उन्होंने सरकार से यह भी आग्रह किया कि वह ज़बरदस्ती के बजाय बातचीत के ज़रिए छात्रों की शिकायतों को दूर करे। मणिकम टैगोर ने यह भी सवाल उठाया कि यदि जाँच में अत्यधिक बल प्रयोग साबित होता है, तो क्या प्रधानमंत्री संसद में खेद व्यक्त करेंगे।
नागरिक स्वतंत्रता और जवाबदेही का सवाल
मणिकम टैगोर ने अपने पत्र में रेखांकित किया कि इस घटना ने भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा के अधिकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों में जनता के विश्वास से जुड़े गंभीर संवैधानिक मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों की जाँच करना और सरकार को जवाबदेह ठहराना संसद का कर्तव्य है। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल छात्र आंदोलनों पर पुलिसिया कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं।
आगे क्या होगा
स्थगन प्रस्ताव नोटिस की स्वीकृति लोकसभा अध्यक्ष के विवेकाधिकार पर निर्भर करती है। यदि प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो सदन के सामान्य कामकाज को स्थगित कर इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की जा सकती है। गृह मंत्री अमित शाह की प्रतिक्रिया और सरकार का रुख इस पूरे प्रकरण की अगली दिशा तय करेगा।