एआईएमआरए ने निर्मला सीतारमण को लिखा पत्र, यूपीआई एमडीआर से 1.50 लाख मोबाइल रिटेलर्स को छूट की माँग
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (एआईएमआरए) ने 21 सितंबर 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर देशभर के छोटे और मध्यम मोबाइल फोन विक्रेताओं को प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) यानी यूपीआई ट्रांजैक्शन शुल्क से पूरी तरह मुक्त रखने की माँग की है। संगठन का तर्क है कि 0.75% से 1.5% के बेहद सीमित शुद्ध लाभ मार्जिन पर काम कर रहे मोबाइल रिटेलर्स के लिए 0.4% एमडीआर उनकी व्यावसायिक व्यवहार्यता को सीधी चुनौती देगा। यह माँग ऐसे समय में आई है जब देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की नीति और छोटे कारोबारियों के हित के बीच टकराव तेज़ हो रहा है।
एसोसिएशन की मुख्य चिंताएँ
एआईएमआरए के अनुसार, वह देशभर के 1.50 लाख से अधिक छोटे मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेलर्स का प्रतिनिधित्व करता है। संगठन ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि यूपीआई अब खुदरा कारोबार में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है और इस पर शुल्क लागू होने का असर सीधे लाभप्रदता पर पड़ेगा।
एसोसिएशन का कहना है, 'मुख्यधारा के मोबाइल रिटेलर्स का शुद्ध लाभ मार्जिन आमतौर पर केवल 0.75% से 1.5% के बीच होता है। यदि यूपीआई भुगतान पर 0.4% एमडीआर लागू किया जाता है, तो यह सीधे उनके अस्तित्व से जुड़े मुनाफे को कम कर देगा।'
मासिक वित्तीय बोझ का अनुमान
एआईएमआरए ने पत्र में एक व्यावहारिक गणना भी प्रस्तुत की है। संगठन के अनुसार, यदि कोई रिटेलर हर महीने ₹10 लाख से ₹40 लाख तक के यूपीआई ट्रांजैक्शन करता है, तो 0.4% शुल्क लागू होने पर उसे ₹4,000 से ₹16,000 तक की अतिरिक्त मासिक लागत उठानी पड़ सकती है।
गौरतलब है कि मोबाइल रिटेल क्षेत्र पहले से ही कमज़ोर बिक्री और बढ़ती परिचालन लागतों के दोहरे दबाव में है, जिससे यह अतिरिक्त बोझ और भी गंभीर हो जाता है।
स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों का संकट
एआईएमआरए ने हैंडसेट की कीमतों में तेज़ उछाल का मुद्दा भी उठाया है। संगठन के अनुसार, नवंबर 2025 के बाद से कंपोनेंट्स और मेमोरी की लागत बढ़ने से एंट्री-लेवल स्मार्टफोन की कीमत ₹10,000 से बढ़कर अब ₹17,000 के आसपास पहुँच गई है। एसोसिएशन का अनुमान है कि दिसंबर 2026 तक यह ₹20,000 तक जा सकती है।
बढ़ती कीमतों के कारण माँग में नरमी पहले ही खुदरा विक्रेताओं के कारोबार को प्रभावित कर रही है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क छोटे दुकानदारों की कमर और तोड़ सकता है।
सरकार से चार सूत्री माँगें
एआईएमआरए ने सरकार के समक्ष चार प्रमुख माँगें रखी हैं। पहली, छोटे और मध्यम रिटेलर्स के लिए यूपीआई एमडीआर से पूर्ण छूट। दूसरी, कम लागत वाले डिजिटल भुगतान तंत्र की निरंतर उपलब्धता। तीसरी, कोई भी नया शुल्क ढाँचा लागू करने से पहले व्यापार संगठनों से अनिवार्य परामर्श। चौथी, खुदरा क्षेत्र के लिए अतिरिक्त नीतिगत समर्थन।
संगठन का तर्क है कि डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन देने की नीति तभी सफल होगी जब छोटे कारोबारियों को अतिरिक्त वित्तीय बोझ से बचाया जाए, ताकि डिजिटल ट्रांजैक्शन की वृद्धि और खुदरा व्यापार दोनों को एक साथ समर्थन मिल सके।
आगे क्या होगा
वित्त मंत्रालय की ओर से अभी इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह माँग ऐसे वक्त महत्त्वपूर्ण हो जाती है जब सरकार यूपीआई के दीर्घकालिक वित्तपोषण मॉडल पर विचार-विमर्श कर रही है। विश्लेषकों का कहना है कि एमडीआर लागू होने या न होने का निर्णय लाखों छोटे कारोबारियों के डिजिटल भुगतान अपनाने की रफ़्तार को सीधे प्रभावित करेगा।