यूपीआई पर MDR: मणिकम टैगोर ने निर्मला सीतारमण को घेरा, FMCG क्षेत्र पर ₹9,000 करोड़ बोझ की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) के अध्यक्ष और सांसद मणिकम टैगोर ने 29 सितंबर को यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने के फैसले पर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उस बयान को सीधे चुनौती दी, जिसमें कहा गया था कि MDR का बोझ ग्राहकों पर नहीं, बल्कि व्यापारियों पर पड़ेगा। टैगोर के अनुसार, यह सफाई जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाती।
व्यापारियों पर आर्थिक बोझ का आकलन
ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन — जो देशभर के 4.5 लाख वितरकों और 1.3 करोड़ छोटे खुदरा व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करता है — ने चेतावनी दी है कि यूपीआई लेनदेन पर MDR लागू होने से फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) वितरण क्षेत्र पर सालाना ₹7,000 से ₹9,000 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ सकता है। टैगोर ने इस आँकड़े का हवाला देते हुए कहा कि सरकार की दलील खोखली है।
टैगोर ने कहा, 'केवल 3.5 से 6 प्रतिशत के बेहद कम मार्जिन पर काम करने वाले व्यापारी इस शुल्क को कैसे वहन कर सकते हैं? यह उपभोक्ताओं और खुदरा व्यापार दोनों पर दोहरा बोझ बन जाएगा।'
MRP व्यवस्था बनी बाधा
कांग्रेस नेता ने एक और व्यावहारिक पहलू की ओर ध्यान दिलाया — अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) की बाध्यता के चलते व्यापारी इस अतिरिक्त लागत को सीधे ग्राहकों पर नहीं डाल सकते। यानी न तो उपभोक्ता से वसूली संभव है, न ही वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के लिए इसे खुद वहन करना व्यावहारिक है। टैगोर ने इसे एक ऐसी स्थिति बताया जहाँ छोटे व्यापारी दोनों तरफ से दबाव में आ जाते हैं।
सरकार की जिम्मेदारी पर सवाल
टैगोर ने कहा कि केंद्र सरकार यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकती कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है और यह नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) तथा बैंकों का निर्णय है। उनके अनुसार, यूपीआई की नीतिगत दिशा तय करने वाली सरकार इस फैसले के परिणामों की जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।
गौरतलब है कि यूपीआई को डिजिटल भुगतान की रीढ़ माना जाता है और इस पर MDR शून्य रखने की नीति वर्षों से लागू थी। यह ऐसे समय में आया है जब देश में डिजिटल लेनदेन की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और छोटे व्यापारी इसके सबसे बड़े उपयोगकर्ता बन चुके हैं।
मांग और आगाह
टैगोर ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार से MDR लागू करने के फैसले को तत्काल वापस लेने की माँग की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में आगाह किया कि यदि यह निर्णय नहीं पलटा गया, तो देश के करोड़ों उपभोक्ताओं और व्यापारियों पर इसका गंभीर आर्थिक असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और व्यापारिक संगठनों के बीच और तीखा होने की संभावना है।