यूपीआई एमडीआर विवाद: नवीन पटनायक ने उठाई आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों की सुरक्षा की माँग
सारांश
मुख्य बातें
बीजू जनता दल (BJD) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को भुवनेश्वर में ₹2,000 से अधिक के कुछ यूपीआई लेनदेन पर हाल ही में घोषित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस नीतिगत निर्णय में आम उपभोक्ताओं और छोटे दुकानदारों जैसे व्यापारियों के हितों को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए।
नवीन पटनायक का बयान
पटनायक ने बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, भुवनेश्वर पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान के विस्तार का लाभ आम जनता और छोटे व्यवसायियों तक पहुँचना चाहिए, न कि उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला जाए। यह ऐसे समय में आया है जब यूपीआई शुल्क को लेकर राजनीतिक और आर्थिक विमर्श तेज़ हो गया है।
ओडिशा कांग्रेस की तीखी आलोचना
इससे पहले ओडिशा कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला था। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनाली साहू ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पिछले 12 वर्षों से गरीबों, मज़दूरों और कामकाजी वर्ग से अलग-अलग तरीकों से पैसा वसूलने की कोशिश कर रही है।
साहू ने दावा किया कि महंगाई से पहले ही परेशान लोगों पर ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाना उनकी मुश्किलें और बढ़ाने जैसा है। उल्लेखनीय है कि ओडिशा कांग्रेस ने 0.4 प्रतिशत एमडीआर की तुलना ऐतिहासिक 'जजिया कर' से भी की, जो एक तीखा राजनीतिक वार था।
अमेरिकी दबाव का आरोप
सोनाली साहू ने यह भी दावा किया कि यूपीआई व्यवस्था से Google Pay, Paytm, Amazon, Visa Card और एटीएम सेवाओं जैसी कंपनियों के हित प्रभावित हो रहे थे। कथित तौर पर इन कंपनियों ने इस मुद्दे को यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) के सामने उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत सरकार पर मुफ्त यूपीआई लेनदेन की व्यवस्था समाप्त कर $25 से अधिक के लेनदेन पर शुल्क लगाने का दबाव बनाया गया। हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
एनपीसीआई की घोषणा और वित्त मंत्रालय का स्पष्टीकरण
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने हाल ही में 0.4 प्रतिशत शुल्क की घोषणा की थी, जिसके बाद भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई। इसे दूर करने के लिए वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया।
मंत्रालय के अनुसार, यूपीआई की नई व्यवस्था का व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) भुगतान पर कोई असर नहीं पड़ेगा — ऐसे लेनदेन राशि चाहे कितनी भी हो, पूरी तरह निःशुल्क बने रहेंगे। इसके अलावा, व्यापारियों को किए जाने वाले ₹2,000 तक के भुगतान और छोटे व्यापारियों के लिए जीरो-एमडीआर श्रेणी के तहत आने वाले लेनदेन भी मुफ्त रहेंगे।
आम जनता पर वास्तविक असर
वित्त मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, व्यक्ति से व्यापारी (P2M) के लगभग 96 प्रतिशत यूपीआई लेनदेन पर इस शुल्क का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। एमडीआर केवल ₹2,000 से अधिक के कुछ निर्धारित श्रेणी के व्यापारी लेनदेन पर ही लागू होगा। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब भारत में यूपीआई का उपयोग रिकॉर्ड स्तर पर है और डिजिटल भुगतान की नीति पर अंतरराष्ट्रीय नज़र भी है। आने वाले हफ्तों में इस मुद्दे पर संसद में भी बहस की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।