18 सितंबर 2026
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यूपीआई एमडीआर विवाद: नवीन पटनायक ने उठाई आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों की सुरक्षा की माँग

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यूपीआई एमडीआर विवाद: नवीन पटनायक ने उठाई आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों की सुरक्षा की माँग

सारांश

यूपीआई पर 0.4% एमडीआर की घोषणा ने राजनीतिक भूचाल ला दिया है। नवीन पटनायक से लेकर ओडिशा कांग्रेस तक — सभी ने आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा की माँग उठाई। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 96% P2M लेनदेन पर कोई असर नहीं होगा।

मुख्य बातें

नवीन पटनायक ने 18 सितंबर 2026 को भुवनेश्वर में यूपीआई एमडीआर विवाद पर आम लोगों और छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा की माँग की।
NPCI ने ₹2,000 से अधिक के कुछ यूपीआई व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर की घोषणा की है।
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि P2P लेनदेन और ₹2,000 तक के P2M लेनदेन पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे।
कुल P2M लेनदेन के लगभग 96 प्रतिशत पर नए शुल्क का कोई असर नहीं पड़ेगा।
ओडिशा कांग्रेस की सोनाली साहू ने आरोप लगाया कि USTR के दबाव में मुफ्त यूपीआई व्यवस्था समाप्त की जा रही है।

बीजू जनता दल (BJD) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को भुवनेश्वर में ₹2,000 से अधिक के कुछ यूपीआई लेनदेन पर हाल ही में घोषित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस नीतिगत निर्णय में आम उपभोक्ताओं और छोटे दुकानदारों जैसे व्यापारियों के हितों को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए।

नवीन पटनायक का बयान

पटनायक ने बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, भुवनेश्वर पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान के विस्तार का लाभ आम जनता और छोटे व्यवसायियों तक पहुँचना चाहिए, न कि उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला जाए। यह ऐसे समय में आया है जब यूपीआई शुल्क को लेकर राजनीतिक और आर्थिक विमर्श तेज़ हो गया है।

ओडिशा कांग्रेस की तीखी आलोचना

इससे पहले ओडिशा कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला था। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनाली साहू ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पिछले 12 वर्षों से गरीबों, मज़दूरों और कामकाजी वर्ग से अलग-अलग तरीकों से पैसा वसूलने की कोशिश कर रही है।

साहू ने दावा किया कि महंगाई से पहले ही परेशान लोगों पर ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाना उनकी मुश्किलें और बढ़ाने जैसा है। उल्लेखनीय है कि ओडिशा कांग्रेस ने 0.4 प्रतिशत एमडीआर की तुलना ऐतिहासिक 'जजिया कर' से भी की, जो एक तीखा राजनीतिक वार था।

अमेरिकी दबाव का आरोप

सोनाली साहू ने यह भी दावा किया कि यूपीआई व्यवस्था से Google Pay, Paytm, Amazon, Visa Card और एटीएम सेवाओं जैसी कंपनियों के हित प्रभावित हो रहे थे। कथित तौर पर इन कंपनियों ने इस मुद्दे को यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) के सामने उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत सरकार पर मुफ्त यूपीआई लेनदेन की व्यवस्था समाप्त कर $25 से अधिक के लेनदेन पर शुल्क लगाने का दबाव बनाया गया। हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

एनपीसीआई की घोषणा और वित्त मंत्रालय का स्पष्टीकरण

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने हाल ही में 0.4 प्रतिशत शुल्क की घोषणा की थी, जिसके बाद भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई। इसे दूर करने के लिए वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया।

मंत्रालय के अनुसार, यूपीआई की नई व्यवस्था का व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) भुगतान पर कोई असर नहीं पड़ेगा — ऐसे लेनदेन राशि चाहे कितनी भी हो, पूरी तरह निःशुल्क बने रहेंगे। इसके अलावा, व्यापारियों को किए जाने वाले ₹2,000 तक के भुगतान और छोटे व्यापारियों के लिए जीरो-एमडीआर श्रेणी के तहत आने वाले लेनदेन भी मुफ्त रहेंगे।

आम जनता पर वास्तविक असर

वित्त मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, व्यक्ति से व्यापारी (P2M) के लगभग 96 प्रतिशत यूपीआई लेनदेन पर इस शुल्क का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। एमडीआर केवल ₹2,000 से अधिक के कुछ निर्धारित श्रेणी के व्यापारी लेनदेन पर ही लागू होगा। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब भारत में यूपीआई का उपयोग रिकॉर्ड स्तर पर है और डिजिटल भुगतान की नीति पर अंतरराष्ट्रीय नज़र भी है। आने वाले हफ्तों में इस मुद्दे पर संसद में भी बहस की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस जनभावना को संबोधित नहीं करता जो 'मुफ्त यूपीआई' को एक अर्जित अधिकार मान चुकी है। अमेरिकी व्यापार दबाव के आरोप — भले ही अपुष्ट हों — राष्ट्रीय डिजिटल संप्रभुता की बहस को तेज़ करते हैं और सरकार के लिए संचार-संकट का रूप ले सकते हैं। असली परीक्षा यह है कि नीति-निर्माता इस बदलाव को नागरिकों तक किस तरह पहुँचाते हैं — पारदर्शिता के साथ या बचाव की मुद्रा में।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीआई पर एमडीआर क्या है और यह नया विवाद क्यों है?
NPCI ने ₹2,000 से अधिक के कुछ निर्धारित श्रेणी के व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) की घोषणा की है। चूँकि यूपीआई अब तक सभी के लिए निःशुल्क था, इस घोषणा ने राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी है।
क्या आम यूपीआई उपयोगकर्ताओं को अब पैसे देने होंगे?
वित्त मंत्रालय के अनुसार, व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) सभी लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे, चाहे राशि कितनी भी हो। ₹2,000 तक के व्यापारी लेनदेन और छोटे व्यापारियों के लिए जीरो-एमडीआर श्रेणी के तहत आने वाले लेनदेन भी निःशुल्क रहेंगे।
नवीन पटनायक ने इस मामले में क्या कहा?
BJD के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने 18 सितंबर 2026 को भुवनेश्वर में मीडिया से बातचीत में कहा कि यूपीआई शुल्क के इस मामले में आम नागरिकों और छोटे दुकानदारों जैसे व्यापारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
कांग्रेस ने यूपीआई एमडीआर पर क्या आरोप लगाए?
ओडिशा कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनाली साहू ने आरोप लगाया कि अमेरिकी कंपनियों के दबाव में USTR के ज़रिए भारत पर मुफ्त यूपीआई व्यवस्था खत्म कर $25 से अधिक के लेनदेन पर शुल्क लगाने का दबाव बनाया गया। उन्होंने एमडीआर की तुलना ऐतिहासिक 'जजिया कर' से भी की।
यूपीआई एमडीआर का असल प्रभाव कितने लेनदेन पर पड़ेगा?
वित्त मंत्रालय के अनुसार, व्यक्ति से व्यापारी (P2M) के लगभग 96 प्रतिशत यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह शुल्क केवल ₹2,000 से अधिक के कुछ निर्धारित श्रेणी के व्यापारी लेनदेन पर लागू होगा।
राष्ट्र प्रेस
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