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यूपीआई एमडीआर पर कांग्रेस का हमला: ₹2,000 से ऊपर के ट्रांजेक्शन पर 0.4% चार्ज, संसदीय समिति में नहीं हुई चर्चा

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यूपीआई एमडीआर पर कांग्रेस का हमला: ₹2,000 से ऊपर के ट्रांजेक्शन पर 0.4% चार्ज, संसदीय समिति में नहीं हुई चर्चा

सारांश

NPCI ने ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजेक्शन पर 0.4% MDR की घोषणा की — और कांग्रेस का आरोप है कि यह निर्णय संसदीय स्थायी समिति को बताए बिना लिया गया। गोगोई और तिवारी ने एकजुट होकर दावा किया: सरकार ने समिति के सामने कोई ठोस प्रस्ताव नहीं रखा, कोई जवाब नहीं दिया।

मुख्य बातें

NPCI ने ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI ट्रांजेक्शन पर 0.4% MDR लागू करने की घोषणा की है।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने दावा किया कि वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति में इस प्रस्ताव पर कोई चर्चा नहीं हुई।
सांसद मनीष तिवारी ने गोगोई के दावे का समर्थन किया और कहा कि समिति की कार्यवाही को 'भ्रामक' तरीके से पेश किया गया।
समिति में कांग्रेस के 5 सदस्य हैं — पी.
चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के.
गोगोई का आरोप: नई MDR नीति छोटे व्यापारियों को नुकसान और बड़ी विदेशी कंपनियों को फायदा पहुँचाएगी।

कांग्रेस सांसदों ने गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को ₹2,000 से अधिक के कुछ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ट्रांजेक्शन पर नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा घोषित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पर गंभीर आपत्ति जताई। पार्टी का आरोप है कि इस प्रस्ताव पर वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति में कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई और सरकारी प्रतिनिधियों ने समिति के सामने कोई विशेष प्रस्ताव नहीं रखा।

क्या है प्रस्तावित MDR और किसे होगा असर

NPCI की घोषणा के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजेक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा, जो व्यापारियों को बैंकों और पेमेंट प्रोसेसर को चुकाना होगा। अब तक UPI पर MDR शून्य था, जिसे डिजिटल भुगतान की मुख्य विशेषता माना जाता था। यह बदलाव खासतौर पर छोटे व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेताओं और स्टार्टअप उद्यमियों को प्रभावित कर सकता है, जो बड़े मूल्य के UPI लेनदेन पर निर्भर हैं।

गौरव गोगोई का एक्स पर सीधा हमला

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने इस प्रस्तावित 'UPI टैक्स' पर कभी चर्चा नहीं की। उन्होंने कहा, 'वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने उस UPI टैक्स प्रस्ताव पर चर्चा नहीं की है जिसकी घोषणा मोदी सरकार ने हाल ही में की है। जब वित्त विभाग के अधिकारी वित्त समिति के सदस्यों से मिले, तो उनके पास UPI टैक्स पर कोई खास प्रस्ताव नहीं था।'

गोगोई ने आगे दावा किया कि समिति के सदस्यों ने MDR की आवश्यकता पर सवाल उठाए, लेकिन सरकारी प्रतिनिधियों की ओर से कोई 'संतोषजनक जवाब' नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि 'हालिया UPI टैक्स नीतियाँ छोटे भारतीय व्यापारियों, वेंडर्स और उद्यमियों को नुकसान पहुँचाएंगी और बड़ी अमेरिकी कंपनियों को फायदा पहुँचाएंगी।'

मनीष तिवारी का समर्थन और गोपनीयता पर चेतावनी

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने गोगोई के दावों का समर्थन करते हुए कहा कि संसदीय स्थायी समितियों की कार्यवाही गोपनीय होती है और इसका इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किया जाना चाहिए। तिवारी ने इस दावे पर भी आपत्ति जताई कि प्रस्तावित MDR को समिति के 'कुछ सदस्यों' का समर्थन प्राप्त था।

उन्होंने कहा, 'यह दावा करना कि किसी खास उपाय को कमेटी के कुछ सदस्यों का समर्थन मिला था, संसदीय कमेटी की गोपनीय कार्यवाही का गलत और भ्रामक वर्णन है।' तिवारी ने यह भी स्पष्ट किया कि समिति के सामने MDR की प्रस्तावित दर और छूट का कोई विशेष विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया था।

समिति में कांग्रेस के पाँच सदस्य

गौरतलब है कि वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति में कांग्रेस के पाँच सदस्य शामिल हैं — पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ। यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल भुगतान प्रणाली को लेकर नीतिगत दिशा पर व्यापक बहस जारी है और UPI की शून्य-शुल्क संरचना को लेकर बैंकिंग उद्योग लंबे समय से पुनर्विचार की माँग करता रहा है।

आगे क्या होगा

अभी तक केंद्र सरकार या NPCI की ओर से कांग्रेस के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह मामला संसद के आगामी सत्र में तीखी बहस का केंद्र बन सकता है, खासकर तब जब छोटे व्यापारियों और डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर सवाल बढ़ रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

खासकर तब जब बैंकिंग उद्योग और बड़े पेमेंट एग्रीगेटर्स को इसका सबसे ज़्यादा फायदा होगा। कांग्रेस का संसदीय प्रक्रिया वाला तर्क — कि समिति को विश्वास में नहीं लिया गया — एक गंभीर प्रश्न खड़ा करता है: क्या नीतिगत निर्णयों में संवैधानिक निगरानी तंत्र को दरकिनार किया जा रहा है? सरकार की चुप्पी इस बहस को और गहरा करती है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UPI पर MDR चार्ज क्या है और यह कब से लागू होगा?
NPCI ने ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI ट्रांजेक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) की घोषणा की है, जो व्यापारियों को बैंकों और पेमेंट प्रोसेसर को चुकाना होगा। लागू होने की तारीख की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
कांग्रेस ने UPI MDR पर क्या आपत्ति जताई है?
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और मनीष तिवारी ने दावा किया है कि वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति के सामने MDR का कोई विशेष प्रस्ताव — दर और छूट सहित — कभी पेश नहीं किया गया। उनका कहना है कि सरकारी प्रतिनिधि समिति के सवालों का संतोषजनक जवाब देने में विफल रहे।
MDR लागू होने से छोटे व्यापारियों पर क्या असर पड़ेगा?
₹2,000 से ऊपर के हर UPI भुगतान पर 0.4% अतिरिक्त लागत आएगी, जो छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं और उद्यमियों के लिए बोझ बन सकती है। कांग्रेस का आरोप है कि इससे छोटे व्यापारियों को नुकसान होगा जबकि बड़ी पेमेंट कंपनियों को फायदा मिलेगा।
वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति में कांग्रेस के कौन-से सदस्य हैं?
समिति में कांग्रेस के पाँच सदस्य हैं — पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ। इन्हीं सदस्यों ने MDR प्रस्ताव को लेकर संसदीय प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
क्या सरकार ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया है?
अभी तक केंद्र सरकार या NPCI की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मुद्दा संसद के आगामी सत्र में प्रमुख बहस का विषय बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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