30 सितंबर 2026
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व्यापारियों ने वापस लिया 'नो यूपीआई डे' का आह्वान, सीतारमण से बैठक के बाद बनी सहमति

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व्यापारियों ने वापस लिया 'नो यूपीआई डे' का आह्वान, सीतारमण से बैठक के बाद बनी सहमति

सारांश

व्यापारियों का 'नो यूपीआई डे' टला — लेकिन असल लड़ाई अभी बाकी है। वित्त मंत्री सीतारमण ने सुनने का भरोसा दिया, पर 15 अक्टूबर को ₹2,000 से अधिक लेनदेन पर 0.4% MDR शुल्क की तलवार अभी भी लटकी है। 96% यूपीआई लेनदेन इस दायरे से बाहर हैं, फिर भी व्यापारी चिंतित हैं।

मुख्य बातें

CAIT, AICPDF और अन्य संगठनों ने 2 अक्टूबर 2026 का 'नो यूपीआई डे' आह्वान वापस लिया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में हुई बैठक में करीब 20 व्यापार प्रतिनिधि शामिल हुए।
₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर 0.4% MDR शुल्क 15 अक्टूबर 2026 से प्रस्तावित है।
NPCI के अनुसार यूपीआई मर्चेंट वॉल्यूम का 96% से अधिक हिस्सा ₹2,000 से कम का है, जिस पर MDR शून्य रहेगा।
व्यापारिक संगठनों ने विरोध वापस लिया, लेकिन शुल्क को लेकर चिंता बनाए रखी है और सरकार से 15 अक्टूबर से पहले समाधान की उम्मीद जताई।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने 2 अक्टूबर को प्रस्तावित 'नो यूपीआई डे' का आह्वान वापस ले लिया है। यह विरोध ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत शुल्क (MDR) के खिलाफ था, जिसे 15 अक्टूबर 2026 से लागू किया जाना है।

बैठक का घटनाक्रम

बैठक में देशभर के विभिन्न राज्यों से करीब 20 व्यापार प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चांदनी चौक के सांसद और कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने किया। प्रतिनिधिमंडल में ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA), ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF) और ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) सहित कई संगठन शामिल थे।

व्यापारियों ने तर्क दिया कि प्रस्तावित शुल्क से छोटे और मध्यम कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा और डिजिटल भुगतान अपनाने की रफ्तार धीमी हो सकती है।

विरोध वापसी का फैसला

इससे पहले ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स फेडरेशन और ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन ने 2 अक्टूबर को 'नो यूपीआई डे' मनाने की घोषणा की थी। वित्त मंत्री के साथ चर्चा के बाद दोनों संगठनों ने यह कार्यक्रम वापस लेने का निर्णय किया।

बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए खंडेलवाल ने कहा, 'वित्त मंत्री से हुई सकारात्मक चर्चा के बाद AICPDF और CAIT ने 2 अक्टूबर को प्रस्तावित 'नो यूपीआई डे' अभियान को वापस लेने का फैसला किया है।' उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने सभी सुझावों और चिंताओं को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि उन पर ध्यानपूर्वक विचार किया जाएगा।

प्रस्तावित शुल्क का दायरा और एनपीसीआई का स्पष्टीकरण

गौरतलब है कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने इसी महीने स्पष्ट किया था कि MDR केवल ₹2,000 से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेनदेन पर लागू होगा। ₹2,000 तक के सभी यूपीआई लेनदेन पर MDR शून्य रहेगा और इसलिए उन पर जीएसटी का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, ₹2,000 तक के लेनदेन यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 96 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हैं, जिसका अर्थ है कि अधिकांश व्यापारियों पर इस शुल्क का सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा।

आगे की राह

हालाँकि विरोध वापस लेने के बावजूद व्यापारिक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे प्रस्तावित शुल्क को लेकर अपनी चिंता बनाए हुए हैं। खंडेलवाल ने कहा कि व्यापारिक संगठन सरकार के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेंगे कि डिजिटल भुगतान प्रणाली अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और सभी हितधारकों के लिए लाभकारी बने। साइबर खतरों और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार के साथ आगे चर्चा होगी।

आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि 15 अक्टूबर 2026 से प्रस्तावित MDR शुल्क अपने मौजूदा स्वरूप में लागू होता है या व्यापारियों की माँगों को देखते हुए उसमें कोई संशोधन किया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मूल मुद्दा — 15 अक्टूबर से प्रस्तावित 0.4% MDR — अनसुलझा है। सरकार की 'विचार करेंगे' वाली भाषा कोई ठोस आश्वासन नहीं है। गौरतलब है कि NPCI के ही आँकड़े बताते हैं कि 96% लेनदेन इस शुल्क के दायरे से बाहर हैं, फिर भी व्यापारी आशंकित हैं — यह दर्शाता है कि सरकारी संचार में स्पष्टता की कमी है। डिजिटल भुगतान के विस्तार में भारत ने जो बढ़त हासिल की है, उसे नीतिगत अस्पष्टता से कमज़ोर नहीं किया जाना चाहिए।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'नो यूपीआई डे' क्या था और इसे क्यों वापस लिया गया?
'नो यूपीआई डे' 2 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित वह व्यापारिक विरोध था, जिसमें ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर 0.4% MDR शुल्क का विरोध किया जाना था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ 30 सितंबर को सकारात्मक बैठक के बाद CAIT और AICPDF ने इसे वापस ले लिया।
यूपीआई पर प्रस्तावित 0.4% MDR शुल्क क्या है?
₹2,000 से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई लेनदेन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का प्रस्ताव है, जो 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने वाला है। ₹2,000 तक के सभी यूपीआई लेनदेन पर MDR शून्य रहेगा।
इस शुल्क से किन व्यापारियों पर असर पड़ेगा?
NPCI के अनुसार यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 96% से अधिक हिस्सा ₹2,000 तक का है, जो MDR के दायरे से बाहर रहेगा। केवल ₹2,000 से अधिक के लेनदेन — जो मुख्यतः बड़े मूल्य के व्यापार में होते हैं — पर यह शुल्क लागू होगा।
व्यापारिक संगठनों की मुख्य माँग क्या है?
व्यापारिक संगठनों ने सरकार से प्रस्तावित शुल्क को लेकर स्पष्टता माँगी है और आग्रह किया है कि 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने से पहले उनकी चिंताओं का समाधान निकाला जाए। वे चाहते हैं कि छोटे और मध्यम कारोबारियों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े।
आगे क्या होगा — क्या 15 अक्टूबर से शुल्क लागू होगा?
फिलहाल यह अनिश्चित है। व्यापारी संगठनों और सरकार के बीच संवाद जारी है। 15 अक्टूबर 2026 से पहले यह स्पष्ट होगा कि शुल्क अपने मौजूदा स्वरूप में लागू होता है या व्यापारियों की माँगों के मद्देनज़र इसमें संशोधन किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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