व्यापारियों ने वापस लिया 'नो यूपीआई डे' का आह्वान, सीतारमण से बैठक के बाद बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने 2 अक्टूबर को प्रस्तावित 'नो यूपीआई डे' का आह्वान वापस ले लिया है। यह विरोध ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत शुल्क (MDR) के खिलाफ था, जिसे 15 अक्टूबर 2026 से लागू किया जाना है।
बैठक का घटनाक्रम
बैठक में देशभर के विभिन्न राज्यों से करीब 20 व्यापार प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चांदनी चौक के सांसद और कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने किया। प्रतिनिधिमंडल में ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA), ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF) और ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) सहित कई संगठन शामिल थे।
व्यापारियों ने तर्क दिया कि प्रस्तावित शुल्क से छोटे और मध्यम कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा और डिजिटल भुगतान अपनाने की रफ्तार धीमी हो सकती है।
विरोध वापसी का फैसला
इससे पहले ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स फेडरेशन और ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन ने 2 अक्टूबर को 'नो यूपीआई डे' मनाने की घोषणा की थी। वित्त मंत्री के साथ चर्चा के बाद दोनों संगठनों ने यह कार्यक्रम वापस लेने का निर्णय किया।
बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए खंडेलवाल ने कहा, 'वित्त मंत्री से हुई सकारात्मक चर्चा के बाद AICPDF और CAIT ने 2 अक्टूबर को प्रस्तावित 'नो यूपीआई डे' अभियान को वापस लेने का फैसला किया है।' उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने सभी सुझावों और चिंताओं को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि उन पर ध्यानपूर्वक विचार किया जाएगा।
प्रस्तावित शुल्क का दायरा और एनपीसीआई का स्पष्टीकरण
गौरतलब है कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने इसी महीने स्पष्ट किया था कि MDR केवल ₹2,000 से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेनदेन पर लागू होगा। ₹2,000 तक के सभी यूपीआई लेनदेन पर MDR शून्य रहेगा और इसलिए उन पर जीएसटी का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, ₹2,000 तक के लेनदेन यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 96 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हैं, जिसका अर्थ है कि अधिकांश व्यापारियों पर इस शुल्क का सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
आगे की राह
हालाँकि विरोध वापस लेने के बावजूद व्यापारिक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे प्रस्तावित शुल्क को लेकर अपनी चिंता बनाए हुए हैं। खंडेलवाल ने कहा कि व्यापारिक संगठन सरकार के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेंगे कि डिजिटल भुगतान प्रणाली अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और सभी हितधारकों के लिए लाभकारी बने। साइबर खतरों और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार के साथ आगे चर्चा होगी।
आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि 15 अक्टूबर 2026 से प्रस्तावित MDR शुल्क अपने मौजूदा स्वरूप में लागू होता है या व्यापारियों की माँगों को देखते हुए उसमें कोई संशोधन किया जाता है।