13 अक्टूबर 2026
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UPI MDR दीपावली के बाद लागू होगा: NPCI का ऐलान, ₹2,000 से अधिक लेनदेन पर 0.4% शुल्क

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UPI MDR दीपावली के बाद लागू होगा: NPCI का ऐलान, ₹2,000 से अधिक लेनदेन पर 0.4% शुल्क

सारांश

NPCI ने त्योहारी सीजन का लिहाज़ करते हुए UPI MDR लागू करने की तारीख टाल दी — लेकिन यह टला है, रद्द नहीं हुआ। ₹2,000 से ऊपर के P2M लेनदेन पर 0.4% शुल्क दीपावली के बाद आएगा। व्यापारियों के लिए लागत बढ़ेगी, मगर सरकार ने इसे ग्राहकों पर डालने से रोका है।

मुख्य बातें

NPCI ने 13 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि UPI MDR फ्रेमवर्क दीपावली के तुरंत बाद लागू होगा; सटीक तारीख अभी तय नहीं।
₹2,000 से अधिक के P2M यूपीआई लेनदेन पर 0.4% (40 बेसिस पॉइंट्स) MDR लागू होगा।
₹10,000 के लेनदेन पर व्यापारी को ₹40 अतिरिक्त देने होंगे; यह शुल्क ग्राहकों पर नहीं डाला जा सकता।
व्यापारी संगठनों और फिनटेक कंपनियों के अनुरोध पर त्योहारी सीजन के दौरान क्रियान्वयन टाला गया।
विश्व बैंक समूह के कार्यकारी निदेशक नीलकंठ मिश्रा के अनुसार प्रतिस्पर्धी बाज़ार के कारण बड़े पैमाने पर शुल्क वृद्धि की आशंका कम है।

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि प्रस्तावित यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क को दीपावली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा, हालाँकि इसकी सटीक तारीख अभी तय नहीं की गई है। NPCI की यूपीआई और सर्विसेज स्टीयरिंग कमिटी ने यह निर्णय त्योहारी सीजन में व्यापारियों और फिनटेक कंपनियों की आपत्तियों को देखते हुए लिया है।

मुख्य घोषणा और पृष्ठभूमि

NPCI की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया, 'यूपीआई और सर्विसेज स्टीयरिंग कमिटी ने आज फैसला किया कि त्योहारों के सीजन को ध्यान में रखते हुए, चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई ट्रांजैक्शन पर MDR को दीपावली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा। इसकी तारीख की घोषणा अलग से की जाएगी।' गौरतलब है कि पिछले महीने NPCI की स्टीयरिंग कमिटी ने ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत (यानी 40 बेसिस पॉइंट्स) MDR तय किया था।

MDR क्या है और इसका व्यावहारिक असर

मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान संसाधित करने के बदले में व्यापारियों से लिया जाता है। 0.4 प्रतिशत की दर का व्यावहारिक अर्थ यह है कि प्रत्येक ₹2,000 के लेनदेन पर ₹8 और प्रत्येक ₹10,000 के यूपीआई भुगतान पर ₹40 का अतिरिक्त खर्च व्यापारियों पर पड़ेगा। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यह शुल्क केवल व्यापारियों पर लागू होगा और वे इसे किसी भी रूप में ग्राहकों पर नहीं थोप सकते।

उद्योग की आपत्तियाँ और स्थगन की वजह

व्यापारी संगठनों, फिनटेक और पेमेंट कंपनियों ने NPCI से फ्रेमवर्क लागू करने की तारीख आगे बढ़ाने का अनुरोध किया था। इन पक्षों ने तर्क दिया था कि त्योहारी सीजन में होने वाली बिक्री पर MDR का प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में यूपीआई लेनदेन की मात्रा प्रतिमाह अरबों में पहुँच चुकी है और व्यापारियों के लिए लागत में कोई भी वृद्धि सीधे उनके मार्जिन को प्रभावित करती है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

विश्व बैंक समूह के कार्यकारी निदेशक नीलकंठ मिश्रा ने पहले कहा था कि यूपीआई लेनदेन पर MDR की अनुमति देना एक 'अधिकार प्रदान करने वाला नियामक कदम' होगा। उन्होंने यह भी कहा, 'मुझे नहीं लगता कि इससे बड़े पैमाने पर शुल्क में बढ़ोतरी होगी, क्योंकि यह एक मुक्त और प्रतिस्पर्धी बाज़ार है। ऐसी कंपनियाँ भी थीं, जो MDR शुल्क नहीं ले पाने के बावजूद अपना कारोबार चलाने में सक्षम रहीं और बाज़ार में बनी रहीं।' आलोचकों का कहना है कि छोटे व्यापारियों पर इसका बोझ असमान रूप से अधिक पड़ सकता है।

आगे क्या होगा

NPCI अब दीपावली के बाद MDR लागू करने की आधिकारिक तारीख की घोषणा अलग से करेगी। उद्योग जगत की नज़रें इस पर टिकी हैं कि कमिटी किस तिथि को अंतिम रूप देती है और क्या छोटे व्यापारियों के लिए किसी छूट का प्रावधान किया जाएगा। यह कदम भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के वित्तपोषण मॉडल को दीर्घकालिक रूप से पुनर्परिभाषित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

रद्द नहीं करो' वाला रुख उस संरचनात्मक तनाव को उजागर करता है जो UPI के मुफ़्त मॉडल और भुगतान कंपनियों की वित्तीय व्यवहार्यता के बीच वर्षों से बना हुआ है। त्योहारी सीजन की आड़ में की गई यह देरी असल में उद्योग की उस पैरवी की जीत है जो MDR के पूरे विचार को ही खींचती रही है। विडंबना यह है कि सरकार ने व्यापारियों को शुल्क ग्राहकों पर डालने से रोका है, लेकिन छोटे दुकानदार जिनके मार्जिन पहले से पतले हैं, उनके लिए 0.4% भी बोझिल हो सकता है। असली परीक्षा यह होगी कि दीपावली के बाद की तारीख कब आती है और क्या छोटे व्यापारियों के लिए कोई स्लैब-आधारित राहत दी जाएगी।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UPI MDR क्या है और यह कब से लागू होगा?
UPI MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान संसाधित करने के बदले व्यापारियों से लिया जाता है। NPCI ने घोषणा की है कि ₹2,000 से अधिक के P2M यूपीआई लेनदेन पर 0.4% MDR दीपावली के तुरंत बाद लागू होगा, हालाँकि सटीक तारीख अभी तय नहीं है।
UPI MDR का व्यापारियों पर क्या असर पड़ेगा?
₹2,000 के प्रत्येक यूपीआई लेनदेन पर व्यापारी को ₹8 अतिरिक्त देने होंगे, जबकि ₹10,000 के भुगतान पर यह राशि ₹40 होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि व्यापारी इस शुल्क को ग्राहकों पर नहीं थोप सकते।
दीपावली तक MDR लागू क्यों नहीं होगा?
व्यापारी संगठनों, फिनटेक और पेमेंट कंपनियों ने NPCI से अनुरोध किया था कि त्योहारी सीजन में बिक्री पर पड़ने वाले नकारात्मक असर को देखते हुए तारीख आगे बढ़ाई जाए। NPCI की स्टीयरिंग कमिटी ने इस चिंता को स्वीकार करते हुए दीपावली के बाद क्रियान्वयन का फैसला किया।
क्या UPI MDR से ग्राहकों के लिए यूपीआई भुगतान महँगा हो जाएगा?
सरकार ने साफ कर दिया है कि MDR केवल व्यापारियों पर लागू होगा और वे इसे किसी भी रूप में ग्राहकों पर नहीं डाल सकते। विश्व बैंक समूह के कार्यकारी निदेशक नीलकंठ मिश्रा के अनुसार, प्रतिस्पर्धी बाज़ार के कारण शुल्क में बड़ी बढ़ोतरी की आशंका कम है।
MDR किन लेनदेन पर लागू होगा?
यह MDR केवल चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई लेनदेन पर लागू होगा, और केवल उन लेनदेन पर जिनकी राशि ₹2,000 से अधिक हो। ₹2,000 तक के लेनदेन पर यह शुल्क लागू नहीं होगा।
राष्ट्र प्रेस
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