पश्चिम बंगाल की नई औद्योगिक नीति फिर टली, दुर्गा पूजा के बाद अक्टूबर मध्य में होगी जारी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल की नई औद्योगिक नीति लगातार दूसरी बार समयसीमा चूकने के बाद अब अक्टूबर मध्य से पहले जारी होने की संभावना नहीं है। राज्य सचिवालय 'नबन्ना' के सूत्रों के अनुसार, यह नीति दुर्गा पूजा समाप्त होने के बाद ही सार्वजनिक की जाएगी। यह वही नीति है जिसकी पहली समयसीमा 15 अगस्त और दूसरी सितंबर के मध्य में तय की गई थी — दोनों बार घोषणा नहीं हो सकी।
क्यों हो रही है देरी
प्रक्रिया से जुड़े सचिवालय के एक सूत्र के अनुसार, नीति के अधिकांश पहलुओं पर काम पूरा हो चुका है, किंतु उद्योगों के लिए जमीन खरीद नीति को अंतिम रूप देना सबसे जटिल चुनौती बनी हुई है। राज्य सरकार ऐसी व्यवस्था तैयार करना चाहती है, जिसमें जमीन मालिकों, बटाईदारों और खेतिहर मजदूरों — तीनों के हितों की एक साथ रक्षा हो सके।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में जमीन हमेशा से एक अत्यंत संवेदनशील राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा रहा है। राज्य में कृषि भूमि अत्यधिक विखंडित है, जिससे बड़े मैन्युफैक्चरिंग उद्योगों के लिए एक साथ पर्याप्त जमीन जुटाना कठिन हो जाता है।
सरकार का प्रस्तावित मॉडल
राज्य सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट है कि वह न तो पुराने भूमि अधिग्रहण नियमों को लागू करेगी और न ही जमीन जुटाने की पूरी ज़िम्मेदारी निवेशकों पर छोड़ेगी। सूत्र के अनुसार, 'नई नीति के तहत राज्य सरकार जमीन मालिकों से सीधे बातचीत करेगी, उनसे जमीन खरीदेगी और फिर खरीदी गई जमीन निवेशकों को सौंपेगी।'
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में सिंगूर और नंदीग्राम जैसे भूमि अधिग्रहण विवादों की ऐतिहासिक स्मृति अभी भी जीवित है, जिसने दो दशक पहले तत्कालीन वाम सरकार को सत्ता से बाहर करने में निर्णायक भूमिका निभाई थी।
जमीन मालिकों को भागीदार बनाने की योजना
सरकार एक ऐसा फॉर्मूला भी तैयार कर रही है, जिसके तहत जमीन देने वाले मालिकों को संबंधित औद्योगिक इकाइयों में भागीदार बनाया जा सके। इसके लिए दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है — पहला, जमीन देने वाले परिवार के एक सदस्य को औद्योगिक इकाई में रोज़गार देना; और दूसरा, जमीन मालिकों को ऐसे सहायक व्यवसाय शुरू करने का अवसर देना जो मुख्य इकाई को अप्रत्यक्ष सेवाएँ प्रदान कर सकें।
यह मॉडल देश में अपनी तरह का अनूठा प्रयोग हो सकता है, जिसमें भूमि-से-आजीविका का सीधा सेतु बनाने की कोशिश है।
व्यापक औद्योगिक संदर्भ
पश्चिम बंगाल पिछले कुछ वर्षों में निवेश आकर्षित करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में राज्य सरकार 'बंगाल ग्लोबल बिज़नेस समिट' जैसे आयोजनों के माध्यम से बड़े निवेशकों को राज्य में लाने की कोशिश करती रही है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि समिट में घोषित निवेशों का ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन अपेक्षाओं से कम रहा है।
नई औद्योगिक नीति को राज्य में निवेश की गति तेज़ करने के लिए ज़रूरी माना जा रहा है, और इसमें और देरी निवेशकों के विश्वास को प्रभावित कर सकती है।
आगे क्या होगा
सूत्रों के अनुसार, दुर्गा पूजा के बाद — यानी अक्टूबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह में — नीति की औपचारिक घोषणा की उम्मीद है। भूमि खरीद नीति पर अंतिम सहमति बनते ही पूरा दस्तावेज़ तैयार हो जाएगा। राज्य के उद्योग जगत की नज़रें अब इस घोषणा पर टिकी हैं, जिससे निवेश की राह कुछ स्पष्ट होने की उम्मीद है।